आईआईटी बॉम्बे में भाषण-नाटक-म्यूज़िक पर मनाही, छात्रों पर ‘देश विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने पर रोक

ताज़ा ‘हॉस्टल कंडक्ट रूल’ को लेकर छात्रों के कहना है कि ये उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है. उनका ये भी कहना है कि संस्थान केंद्र सरकार के दबाव में ऐसा कर रहा है.

नई दिल्ली: आईआईटी बॉम्बे ने अपने छात्रों को ‘एंटी-नेशनल’ गतिविधियों में शामिल होने से मना किया है. हालांकि, संस्थान ने ये नहीं बताया है कि इसके मुताबिक़ ये कौन सी गतिविधियां है.

इस मामले में दिप्रिंट ने जब आईआईटी बॉम्बे के छात्रों से बात की तो पता चला कि छात्रों को मंगलवार को नया ‘हॉस्टल कंटक्ट रूल’ मेल से भेजा गया है, जिसमें ये बातें शामिल हैं. जिन छात्रों से बात हुई उन्हें मुख्य तौर पर प्वाइंट नंबर 1, 2 और 3 से आपत्ति है.

नाम न छापने की शर्त पर संस्थान के एक पीएएचडी छात्र ने कहा, ‘एंटी नेशनल-एक्टिविटी को परिभाषित नहीं किया गया है. इसकी वजह से संस्थान को खुली छूट होगी कि वो किसी भी गतिविधि और उसमें शामिल व्यक्ति को एंटी-नेशनल करार दे दें.’

एक और पीएचडी छात्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘हमें इसके प्वांइट नंबर 1, 2 और 3 से आपत्ति है.’ प्वाइंट नंबर 1 में लिखा है: हॉस्टल काउंसिल या डीन ऑफ स्टूडेंट अफ़ेयर की अनुमति के बिना हॉस्टल में किसी तरह के पोस्टर या लीफलेट/पंफलेट बांटने की अनुमति नहीं है.

प्वाइंट नंबर 2 में किसी भी तरह के भाषण, नाटक, म्यूज़िक और इससे मिलती जुलती गतिविधि पर रोक है जिससे हॉस्टल की शांति भंग हो. प्वाइंट नंबर 2 में आगे लिखा है: ऐसी गतिविधियों की अनुमति तब भी नहीं है जबकि शिक्षक भी इसका हिस्सा हों. इसमें आगे लिखा है: सिर्फ़ वही किया जा सकता है जिसकी अनुमति डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफ़ेयर से ली गई हो.

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जिन छात्रों से दिप्रिंट ने बात की उनमें से सभी को 10वें प्वाइंट पर सबसे ज़्यादा आपत्ति है जो कहता है: छात्रों को किसी एंटी-नेशनल, एंटी-सोशल और अवांछनीय गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं है. आपको बता दें कि पीएम मोदी को नकारात्मक तरीके से दिखाने के लिए कर्नाटक एक स्कूल पर सोमवार को देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

जिन छात्रों से दिप्रिंट ने बात की उनमें से सभी को 10वें प्वाइंट पर सबसे ज़्यादा आपत्ति है जो कहता है: छात्रों को किसी एंटी-नेशनल, एंटी-सोशल और अवांछनीय गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं है.

ताज़ा नियमों पर आईआईटी बॉम्बे के छात्रों का कहना है कि ये उनके लोकतांत्रिक अधिकारों, ख़ासकर आर्टिकल 19(1)(a) के तहत मिलने वाली भाषा एवम् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है. पहले पीएचडी छात्र ने कहा, ‘मुझे लगता है कि केंद्र सरकार संस्थान पर दबाव डालकर ऐसा करवा रही है.’

यहां के छात्र सीएए विरोधी प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं, जो कैंपस में दिसंबर के तीसरे सप्ताह से जारी है. यही नहीं, यहां के छात्र जामिया, एएमयू और जेएनयू में हिंसा का शिकार हुए छात्रों संग भी खड़े हुए. जामिया में 15 दिसंबर को हिंसा हुई थी जिसके बाद एएमयू में 17 दिसंबर को हिंसा हुई और जेएनयू में 5 जनवरी को मास्क पहले हमलावर घुस गए थे.

आईआईटी बॉम्बे के छात्रों को इसका डर है कि अब अगर वो सरकार की किसी नीति या देश में हो रही किसी अप्रिय घटना का विरोध करेंगे, तो उन्होंने देश विरोधी करार दे दिया जाएगा और इन सबके बहाने उनके ऊपर शिकंजा कसा जाएगा. उन्हें लगता कि है ऐसी चीजें इन दिनों बहुत सामान्य हो गई हैं.

छात्र नए नियमों को उनके प्रदर्शनों को शांत करने के हथकंडे के रुप में देख रहे हैं. दूसरे पीएचडी छात्र ने तो इसे ‘अघोषित इमरजेंसी’ तक करार दे दिया. आईआईटी बॉम्बे में ‘आईआईटी बॉम्बे फ़ॉर जस्टिस’ नाम का एक समूह है जो सीएए विरोधी और जेएनयू-जामिया के समर्थन में लगातार प्रदर्शन कर रहा है.

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यहां के एक प्रोफेसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘पहले यहां इस तरह से प्रदर्शन नहीं हुआ करते थे. लेकिन जेएनयू की तर्ज पर यहां भी दो खेमें उभरे हैं जिनमें एक सरकार समर्थक है और दूसरे सीएए जैसी नीतियों और कैंपसों में हो रही हिंसा के विराधी हैं.’

उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी सरकारी संस्थान में कोई भी अहम नियुक्ति बिना राजनीतिक दखल के नहीं होती और ये आईआईटी बॉम्बे पर भी लागू होता है. ऐसा कहते हुए उन्होंने नए नियमों को राजनीति से प्रेरित और केंद्र के दबाव में लिया गया बताया. उन्हें भी लगता है कि ये नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है.

जब राज्यसभा से सीएए पास हुआ तो ‘आईआईटी बॉम्बे फ़ॉर जस्टिस’ ने 11 और 12 दिसंबर को इसके विरोध में प्रदर्शन किए. ये उनका पहला प्रदर्शन था जिसमें उन्होंने स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से हॉस्टल नंबर 12 तक एक मार्च निकाला. जब जामिया में हिंसा हुई तो आईआईटी बॉम्बे में आधी रात को इसके विरोध में एक मार्च निकाला गया. जेएनयू छात्रों पर कैंपस में घुसकर हमला हुआ तो छात्रों ने पोस्टर लेकर कैंपस में प्रदर्शन किया.

6-15 जनवरी तक यहां के छात्रों ने स्कूल ऑफ मैनेजमेंट पर अपना प्रदर्शन जारी रखा और 16 से 25 तक यहां संविधान की प्रस्तावना से जुड़े लेक्चर की सीरीज़ चलाई गई. 26 जनवरी को हाल में सीएए के खिलाफ ‘हम काग़ज़ नहीं दिखाएंगे’ जैसा वायरल गाना लिखने वाले कलाकार वरुण ग्रोवर भी छात्रों के बीच पहुंचे.

ताज़ा घटनाक्रम में आईआईटी बॉम्बे समेत अन्य आईआईटी के छात्रों ने देशद्रोह के अरोप के तहत गिरफ्तार किए गए शरजील इमाम के लिए सिग्नेचर कैंपेन भी चलाया. आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र रहे शरजील इमाम के बारे में छात्रों का कहना है कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.

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आपको बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश निशंक पोखरियाल ने जेएनयू फ़ीस हाइक मामले से लेकर एनआरसी विरोधी प्रदर्शन में शामिल छात्रों को लेकर बार-बार कहा है कि वो यूनिवर्सिटी को राजनीति का अड्डा नहीं बनने देंगे.

मामले में संस्थान का पक्ष जानने के लिए आईआईटी बॉम्बे के निदेशक से लेकर अन्य अधिकारियों को लिखे गए मेल, मैसेज और फोन कॉल्स का कोई जवाब नहीं मिला. जवाब आने पर ख़बर को अपडेट किया जाएगा.

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