जामिया हिंसा: छात्रों द्वारा जारी वीडियो में लाइब्रेरी में बर्बरता से मारपीट करती दिखी पुलिस

15 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में जामिया नगर में हुए एक प्रदर्शन के बाद जामिया मिलिया परिसर में हिंसा हुई थी, जहां छात्र-छात्राओं ने पुलिस पर लाठीचार्ज और लाइब्रेरी में आंसू गैस फेंकने का आरोप लगाया था. पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया था.

नई दिल्ली: जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस में 15 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के संबंध में छात्रों के एक समूह ने दिल्ली पुलिस की निर्मम कार्रवाई को लेकर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें पुलिस के जवान लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ रहे छात्रों पर बेरहमी से लाठियां बरसते नज़र आ रहे हैं.

जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी) द्वारा ट्विटर पर जारी 44 सेकेंड का यह वीडियो एक सीसीटीवी कैमरा की फुटेज का हिस्सा है, जिस पर 15 दिसंबर की तारीख और शाम के छह बजे का समय अंकित दिखता है.

जेसीसी जामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों का समूह है, जिसके द्वारा कैंपस में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं.

जेसीसी के अनुसार यह सीसीटीवी फुटेज लाइब्रेरी के पहले फ्लोर पर बने ओल्ड रीडिंग हॉल की है, जहां एमए और एमफिल का सेक्शन है. वीडियो में कुछ छात्र यहां बैठकर पढ़ते दिख रहे हैं, जब पुलिसकर्मी आते हैं और उन्हें लाठियों से मारना शुरू कर देते हैं.

वीडियो में कुछ पुलिसकर्मियों और छात्रों के चेहरे ढंके हुए भी दिखते हैं. द वायर स्वतंत्र रूप से इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

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गौरतलब है कि 13 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामिया के छात्रों के प्रदर्शन के बाद 15 दिसंबर को जामिया परिसर में हिंसा हुई थी, जहां पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, साथ ही लाइब्रेरी में आंसू गैस फेंकी गयी थी.

इस कार्रवाई में 50 के करीब छात्रों को हिरासत में  लिया गया था और 100 के करीब लोग घायल हुए थे. चश्मदीद लोगों और छात्र-छात्राओं का आरोप था कि पुलिस द्वारा उन्हें निर्ममता से मारा गया, लेकिन पुलिस द्वारा इन सभी से इनकार किया गया था.

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जामिया में हुई हिंसा के बाद लाइब्रेरी. (फोटो: पीटीआई)

कैंपस में हुई इस कार्रवाई में एक छात्र के आंख की रोशनी चली गई थी. बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले एलएलएम के फाइनल ईयर के छात्र मिन्हाजुद्दीन (26) का कहना था कि वह लाइब्रेरी के इब्न-ए-सिना (जामिया की पुरानी लाइब्रेरी) में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे कि तभी 20 से 25 पुलिसकर्मी अंदर घुसे और छात्रों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी.

इसके बाद सामने आई कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि पुलिस ने गोलियां भी चलाई थीं.

दिल्ली पुलिस की आंतरिक जांच में कहा गया था कि दो पुलिसकर्मियों ने एसीपी रैंक के एक ऑफिसर के सामने छात्रों पर गोलियां चलाई थीं.

पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) की एक टीम ने भी जामिया के छात्रों, टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ, डॉक्टर, घायल छात्रों, मरीजों, स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर ‘ब्लडी संडे’ नाम की एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था है कि पुलिस ने जामिया के छात्रों को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने के इरादे से हमला किया था.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पुलिस ने जानबूझकर लोगों को हिरासत में रखा और घायलों तक चिकित्सकीय मदद नहीं पहुंचने दी.

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जामिया में हुई हिंसा के बाद लाइब्रेरी में मिला आंसू गैस का शेल. (फोटो: पीटीआई)

जामिया में हुई हिंसा के बाद लाइब्रेरी में मिला आंसू गैस का शेल. (फोटो: पीटीआई)

जेसीसी द्वारा जारी फुटेज सामने आने पर सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने झूठ बोला कि उन्होंने लाइब्रेरी में घुसकर किसी को नहीं पीटा गया. इस वीडियो को देखने के बाद जामिया में हुई हिंसा को लेकर अगर किसी पर एक्शन नहीं लिया जाता तो सरकर की नीयत पूरी तरह से देश के सामने आ जाएगी.

वहीं, दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (क्राइम) प्रवीर रंजन ने कहा है कि वे इसका संज्ञान लेंगे और इसकी जांच करेंगे.

ज्ञात हो कि जामिया में हुई दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जामिया प्रशासन की ओर से पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. जामिया के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से दिल्ली पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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