जेएनयू हिंसा: एक महीने बाद भी कार्रवाई न होने पर शिक्षकों का पुलिस हेडक्वार्टर पर प्रदर्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक पत्र लिखकर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है. शिक्षक संघ के अध्यक्ष डीके लोबियाल ने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषी पकड़े नहीं जाएंगे तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में बीते 5 जनवरी की शाम को हुई हिंसा के सिलसिले में एक महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) के शिक्षकों ने आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर पर एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया. शिक्षक संघ ने पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को एक पत्र लिखा और जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की.

मालूम हो कि बीते पांच जनवरी को जेएनयू परिसर में नकाबपोश लोगों की भीड़ ने घुसकर तीन छात्रावासों में छात्रों पर हमला किया. लाठी, लोहे की छड़ हाथ में लिए इन हमलावरों ने साबरमती हॉस्टल समेत कई बिल्डिंग में जमकर तोड़फोड़ की थी. हमलावरों ने टीचरों को भी नहीं छोड़ा.

इस मारपीट में छात्रसंघ की अध्यक्ष ओइशी घोष को काफी चोटें आई थी और कम से कम 30 लोग घायल हुए थे. प्रोफेसर सुचारिता सेन के सिर पर भी गंभीर चोट लगी हैं.

हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष ओइशी घोष सहित 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. जेएनयू के सर्वर रूम में तोड़फोड़ और सुरक्षा गार्डों पर हमला करने के आरोप में घोष और अन्य 19 लोगों के खिलाफ यह केस विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दर्ज कराया गया था.

इस मामले में पुलिस ने एक नकाबपोश महिला की पहचान दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा कोमल शर्मा के रूप में की थी. उन्होंने छात्रा के साथ दो अन्य युवकों अक्षत अवस्थी और रोहित शाह को आईपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस जारी किया था. पुलिस का कहना था कि तीनों की तलाश की जा रही है.

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हालांकि, एक महीने बाद भी पुलिस इस मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं कर सकी है.

जेएनयूटीए अध्यक्ष डीके लोबियाल ने द वायर से बात करते हुए कहा, ‘पांच जनवरी की घटना के तुरंत बाद हमने कहा था कि यह दिल्ली पुलिस, जेएनयू सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता है. ऐसी मिलीभगत के बिना इतने सारे गुंडे लाठी-डंडे लेकर अंदर नहीं घुस सकते हैं. 5 जनवरी की घटना के बाद 10 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक महीने बाद एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इससे पुलिस पर हमारा शक पुख्ता होता है.’

वे कहते हैं, ‘हम 34 शिक्षकों ने वसंत कुंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन वह आज तक एफआईआर में तब्दील नहीं हुआ. हमारी शिकायत को एफआईआर में तब्दील न करना और जांच की गति हमारे शक को पुख्ता करता है.
निष्पक्षतापूर्वक जांच करने के लिए दिल्ली पुलिस पर कहीं न कहीं से दबाव है.’

लोबियाल ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में 3 और 4 जनवरी की बात करती है लेकिन हमारे शिक्षकों और छात्रों पर पांच जनवरी को लाठी-डंडो और पत्थरों से हमला हुआ था और पुलिस ने उसका कोई जिक्र नहीं किया. एक महीने बाद भी दिल्ली पुलिस की इस चुप्पी पर कई सवाल खड़े होते हैं.’

वे कहते हैं, ‘आज का हमारा विरोध प्रदर्शन यह जताने के लिए है कि हम उस घटना को भूल नहीं गए हैं. वह घटना आज भी हमें उसी तरह से याद है. हमारी आंखों के सामने ही हमारे साथियों को मारा गया था. जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषी पकड़े नहीं जाएंगे तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. दिल्ली पुलिस जेएनयू प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है. वरना तीन-चार संगठनों का नाम लेने वाली पुलिस पांचवें ,संगठन को क्यों छोड़ देगी. हमें तो यह भी शक है कि इसमें सरकार भी शामिल है.’

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जेएनयूटीए के सचिव शिरोजीत मजूमदार कहते हैं, ‘हमारी मांग है कि 5 जनवरी की घटना को लेकर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे. पुलिस की अभी तक की गई कार्रवाई से हम संतुष्ट नहीं है.’

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