कर्नाटक: अवैध खनन एवं वन अपराधों के 15 मामलों के आरोपी को बनाया गया वन एवं पर्यावरण मंत्री

लौह अयस्क समृद्ध बेल्लारी जिले से चार बार के विधायक आनंद सिंह को सोमवार को कर्नाटक की बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बनाया गया था लेकिन पोर्टफोलियों में बदलाव की मांग के एक दिन बाद ही उन्हें वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी मंत्री बना दिया गया.

बेंगलुरु: कर्नाटक की बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने लौह अयस्क समृद्ध बेल्लारी जिले से चार बार के विधायक आनंद सिंह को वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी मंत्री बनाया है. सिंह पर साल 2012 से अवैध खनन और वन अपराधों के 15 मामले दर्ज हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 53 वर्षीय सिंह को सोमवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बनाया गया था लेकिन एक दिन बाद ही पोर्टफोलियों में बदलाव की मांग के बाद उन्हें वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी मंत्री बना दिया गया.

उन्हें यह मंत्रालय साल 2008-13 की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में उनके खिलाफ दर्ज किए अवैध खनन और वन अपराधों के लंबित मामलों के बावजूद दिया गया.

भाजपा सूत्रों के अनुसार, विजय नगर के विधायक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग मिलने से नाखुश थे. वे ऊर्जा मंत्रालय की मांग कर रहे थे लेकिन समझौते के तहत उन्हें पर्यावरण मंत्रालय सौंपा गया.

येदियुरप्पा ने छह फरवरी को उन ग्यारह में से 10 विधायकों को मंत्री बनाकर अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था जो दिसंबर में विधानसभा उपचुनाव जीते थे. उससे पहले वे कांग्रेस और जद (एस) से अलग हुए थे.

जुलाई 2019 में येदियुरप्पा सरकार बनवाने में मदद करने के कारण सिंह को 14 अन्य विधायकों के साथ अयोग्य घोषित कर दिया गया था. अयोग्यता को सही ठहराने और दोबारा चुनाव लड़ने की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिसंबर 2019 में वे बेल्लारी के विजय नगर से भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव जीते.

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सूत्रों के अनुसार, सिंह को वन विभाग इसलिए दिया गया क्योंकि येदियुरप्पा सरकार ने बेल्लारी जिले को दो भागों में बांटने की मांग को नहीं माना.

दिसंबर 2019 उपचुनाव के दौरान 173 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित करने वाले खनन माफिया सिंह सीबीआई के तीन मामलों का सामना कर रहे हैं.

वह और एक कथित अवैध खनन सिंडिकेट के अन्य सदस्य, जो कथित तौर पर भाजपा के पूर्व मंत्री गली जनार्दन रेड्डी के नेतृत्व में संचालित थे, पर अवैध खनन के माध्यम से सरकारी खजाने को 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने और बलारी में वन भूमि लूटने के निर्यात का आरोप है.

वे आपराधिक साजिश रचने, चोरी, विश्वास का आपराधिक उल्लंघन, धोखाधड़ी और बेईमानी, आपराधिक अतिचार और जालसाजी के आरोपी हैं. इल मामले की बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है जिसकी अगली तारीख 26 फरवरी है.

सिंह को सीबीआई ने 2013 में गिरफ्तार किया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया था.

साल 2008-13 के दौरान जब भाजपा की सरकार थी तब से सिंह के खिलाफ कुल 15 आपराधिक मामले लंबित हैं. ये सभी मामले बिना लाइसेंस और परमिट के बेल्लारी में वैध एवं अवैध खानों से लौह अयस्क चुराने से जुड़े हैं. उन्होंने इन सभी मामलों का जिक्र पिछले साल के अपने चुनावी हलफनामे में किया था.

सिंह को साल 2015 में एसआईटी ने गिरफ्तार किया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया था.

अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती सफर में सिंह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के नेृतृत्व वाली जेडीएस से जुड़े थे. इसके बाद साल 2008 में भाजपा से विधायक बने. वहीं, 2013 में निर्दलीय विधायक बनने वाले सिंह को 2018 में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राहुल गांधी की मौजूदगी में पार्टी में शामिल कराया था.

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(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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