पश्चिम बंगाल में कैदियों के लिए वरदान बन सकता है कोविड-19, पैरोल पर रिहा हो सकते हैं कैदी

राज्य सरकार ऐसे कुछ कैदियों को स्पेशल पैरोल पर पंद्रह दिनों के लिए रिहा करने पर विचार कर रही है ताकि जेलों में भीड़ कम की जा सके. इसके लिए कुछ मानदंड भी तय किए गए हैं.

कोलकाता: दुनियाभर के लिए अभिशाप बना कोरोनावायरस पश्चिम बंगाल की जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सैकड़ों कैदियों के लिए वरदान साबित हो सकता है. राज्य सरकार ऐसे कुछ कैदियों को स्पेशल पैरोल पर पंद्रह दिनों के लिए रिहा करने पर विचार कर रही है ताकि जेलों में भीड़ कम की जा सके. इसके लिए कुछ मानदंड भी तय किए गए हैं. अभी इस बारे में अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

बंगाल की 56 जेलों में लगभग 25 हजार कैदी रहते हैं. इनमें से सात हजार सजायाफ्ता हैं और बाकी विचाराधीन. इनमें से लगभग चार सौ कैदी सरकार की योजना के तहत जेल से पंद्रह दिनों के लिए बाहर आ कर अपने घर-परिवार के साथ रह सकते हैं.

सरकार ने ऐसे कैदियों के चयन के लिए कुछ मानदंड तय किए हैं. यह योजना आजीवन कारावास की सजा वाले उन कैदियों पर लागू होगी जिन्होंने कम से कम दस साल की सजा पूरी कर ली हो और इससे पहले तीन बार पैरोल पर बाहर जाकर तय समयसीमा के भीतर लौट आए हों.

जेल विभाग की ओर से जारी एक दिशानिर्देश में कहा गया है कि कोरोनावारयस के संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए राज्य के सुधार गृहों में भीड़ कम करना जरूरी है. ऐसे में सरकार आजीवान कारावस की सजा काट रहे ऐसे कैदियों को पंद्रह दिनों के लिए स्पेशल पैरोल पर रिहा करने पर विचार कर रही है जिन्होंने 10 साल की सजा पूरी कर ली हो और बिना पुलिस सुरक्षा के तीन बार पैरोल पर बाहर जाकर तय समय के भीतर लौट आए हों. इसके अलावा उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल रिपोर्ट भी नहीं होनी चाहिए. साथ ही जेल में मोबाइल या किसी नशीली वस्तु के सेवन के मामले में उनको सजा भी नहीं मिली हो.

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बंगाल के अतिरिक्त महानिदेशक (जेल) अरुण गुप्ता के मुताबिक, सरकार कोरोनावायरस के खतरे को ध्यान में रखते हुए ऐसे इच्छुक कैदियों को स्पेशल पैरोल पर रिहा करने पर विचार कर रही है. वह बताते हैं, ‘फिलहाल इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है. लेकिन जेलों में कैदियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.’

एक अन्य जेल अधिकारी बताते हैं, ‘कोरोनावायरस के खतरे पर जेल में कैदियो के बीच पर्याप्त दूरी जरूरी है. अधिकारियों का कहना है कि राज्य की जेलों में कैदियों और कर्मचारियों में फेस मास्क वितरित करने जैसे ऐहितयाती उपाय किए गए हैं.’

वैसे, कोरोना संक्रमण के खतरे की वजह से ही जेल विभाग ने इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत में कैदियों की पेशी पर रोक लगा दी थी. इसकी बजाय वीडियो कांफ्रेसिंग का सहारा लिया जा रहा है ताकि इन कैदियों को भीड़-भाड़ से बचाया जा सके.

एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, ‘राज्य के तमाम सुधार गृहों को कैदियों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने और हल्का संदेह होने की स्थिति में उच्चाधिकारियों को सूचित करने का निर्देश दिया गया है. जेलों में कोरोना के हल्के लक्षण वाले किसी भी कैदी को आइसोलेशन सेल में रखने को कहा गया है. घरवालों से मुलाकात के दौरान भी कैदियों को सुरक्षित दूरी पर रहने को कहा गया है. तमाम जेलों में इसका रिकार्ड खंगाला जा रहा है कि हाल में कोई विदेशी कैदी जेल में आया है या नहीं और अगर आया है तो बीते कुछ दिनों के दौरान उसने किन-किन जगहों की यात्रा की थी.’

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वैसे, पश्चिम बंगाल जेल सुधारों के मामले में पहले से ही ठोस कदम उठाता रहा है. राज्य की तमाम जेलों में कैदियों की स्थिति और रहन-सहन के स्तर की बेहतरी के लिए जल्दी ही अलग रेडियो स्टेशन भी खोले जाएंगे. इससे पहले सरकार ने डांस थेरापी के तहत इन कैदियों को अभिनय और नृत्य का प्रशिक्षण दिया था. इसके अलावा एक गैर-सरकारी संगठन की सहायता से कैदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है. कई जेलों के कैदी तो अब पुलिसवालों की वर्दी भी सिलने का काम रहे हैं.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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