AAP के घोषणापत्र से ‘टॉयलेट’, ‘रोजगार’ जैसे शब्द ही गायब हो गए!

दिल्ली का चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है. 8 फरवरी को वोटिंग है. 11 को नतीजे आएंगे. आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव अभियान के दौरान पांच साल के अपने कामकाज के दावों पर फोकस रखा. स्कूल, शिक्षा, बिजली-पानी अहम मुद्दे रहे. 4 फरवरी, मंगलवार को AAP ने अपना घोषणा पत्र जारी किया. इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने ‘गारंटी कार्ड’ जारी किया था.

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने AAP के 2020 के घोषणा पत्र और 2015 के घोषणा पत्र की तुलना की है. कितना काम हुआ, इसकी भी झलक दी गई है.

इससे क्या निकलकर आया?

– 2015 के घोषणा पत्र में 70 वादे थे. इस बार 28 वादे हैं.

– इस बार वादों के अलावा शब्दों में भी कमी आई है. पिछली बार घोषणा पत्र में 5,300 शब्द थे. इस बार 1500 शब्द हैं.

– घोषणा पत्र में गांव, टॉयलेट, झुग्गी, रोजगार, हाउसिंग, डिस्कॉम, भ्रष्टाचार, कनेक्टिविटी जैसे शब्द गायब हैं, जो पिछली बार थे.

– AAP ने 2 लाख टॉयलेट बनाने का वादा किया था, लेकिन ‘आप’ सरकार के ही मुताबिक 2018 तक 22,000 टॉयलेट ही बने.

– टॉयलेट बनाने के लिए ‘स्वच्छ भारत’ अभियान के फंड का भी इस्तेमाल नहीं हुआ.

– 2015 में पार्टी ने वादा किया कि 8 लाख रोज़गार पैदा करेगी, लेकिन कोई ऐसी बड़ी भर्ती नहीं हुई, जिससे दिल्ली में रोज़गार का स्तर बढ़ सके.

– 2018 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एक RTI के मुताबिक, पहले तीन साल में AAP सरकार ने मुश्किल से 214 रोज़गार दिए.

– AAP ने ये भी वादा किया कि झुग्गी वालों को फिर से बसाया जाएगा. लेकिन झुग्गी के लगभग 65,000 परिवारों को पिछले साल (2018) दिसंबर में सर्टिफिकेट दिया गया, जिनके निर्माण में समय लगेगा.

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– दिल्ली की झुग्गी बस्ती में पानी का भी वादा था, लेकिन 2019 तक झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनियों के बहुत से परिवारों के लिए पाइप का पानी एक सपना ही रहा.

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