कोरोना वायरस वाली बीमारी को अब WHO ने पक्का वाला नाम दे दिया है

कोरोना वायरस. इस वक़्त खौफ़ का दूसरा नाम. चौक-चौराहे या मेट्रो में किसी के खांसने-छींकने पर यही नाम दिमाग़ में घूमता है. पड़ोसी मुल्क चीन से चला कोरोना वायरस दुनियाभर में पांव पसार रहा है. इस बीमारी से सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं. हज़ारों बीमार हैं. अब WHO (World Health Organisation) ने इसे नया और पक्का नाम दे दिया है- COVID-19. इसमें CO का मतलब है Corona. VI का मतलब है Virus, और D है Disease. 19 इसलिए है, क्योंकि इसकी शुरुआत साल 2019 में हुई. WHO ने Coronavirus के वायरस को नाम दिया है nCoV-2019.

भीड़ भाड़ वाली जगहों पर कोरोना वायरस के मरीज़ों की जांच पड़ताल की जा रही है ताकि ये और ना फैले
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कोरोना वायरस के मरीज़ों की जांच पड़ताल की जा रही है, ताकि ये और ना फैले

 # कैसे रखा जाता है बीमारी का नाम?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) अकेले नाम नहीं रखता. सलाह लेता है. World Organisation for Animal Health (OIE) और Food and Agriculture Organization of the United Nations (FAO) के साथ सलाह-मशविरा करता है WHO. तब नई बीमारी का नाम रखा जाता है. एक गाइडलाइन के तहत किसी भी नई बीमारी को नाम दिया जाता है. किस बीमारी को नाम देना है, इसके लिए भी पैरामीटर तय किए गए हैं.

# कोई  infection या syndrome होना चाहिए.

# जब ये बीमारी मनुष्यों में पाई जाए, उससे पहले इस बीमारी को कभी पहचाना न गया हो.

# जब बीमारी से बड़ी तादाद में लोगों के मरने की आशंका हो.

# इस बीमारी को तब तक कोई आधिकारिक नाम न मिला हो.

समझने वाली बात ये भी है कि WHO के तय किए हुए नाम को International Classification of Diseases (ICD) बाद में मानने से इनकार भी कर सकता है. असल में ICD को भी WHO ही मैनेज करता है. और ICD ही तय मानकों के हिसाब से नाम फ़ाइनल करता है. नाम तय किए जाने में साइंस, भाषा और पॉलिसी, तीनों का संतुलन होना चाहिए.

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इस वायरस की वजह से WHO ने दुनिया भर में मेडिकल इमर्जेंसी के लिए कोड रेड घोषित कर दिया है (फ़ाइल फोटो)
इस वायरस की वजह से WHO ने दुनिया भर में मेडिकल इमरजेंसी के लिए कोड रेड घोषित कर दिया है (फ़ाइल फोटो)

ये संतुलन नाम तय किए जाने के दिशा-निर्देशों में से एक है. संतुलन किसलिए चाहिए? क्योंकि नाम तो आप पक्का साइंस वाला रख देंगे, लेकिन जब जनता बोल ही नहीं पाएगी, तो ‘वाइन्स टेन आर्मा क्यूब्रिक मेंश्निंग’ टाइप का नाम रखकर क्या फ़ायदा. लिखने और बोलने, दोनों में ही ये नाम बेहद मुश्किल है. इसलिए किसी भी बीमारी का नाम रखने में सबसे पहले ध्यान रखा जाता है कि उसमें जितना साइंस आए, उतनी ही मात्रा में ‘संचार’ भी आना चाहिए. टंग ट्विस्टर जैसा नाम नहीं होना चाहिए.

अब समझते हैं कि WHO की गाइडलाइन में नाम रखते वक़्त किन चीज़ों से परहेज़ रखा जाता है.

# नाम में कोई Geographical Location नहीं आनी चाहिए. जैसे मान लीजिए कि कोई बीमारी अगर Middle East Respiratory Syndrome, Spanish Flu, Japanese Encephalitis जैसे नाम की हो तो? ज़ाहिर सी बात है कि इन देशों के लिए अझेल बेइज्ज़ती हो जाएंगी ये बीमारियां. दुनियाभर में जब यहां के लोग टूरिस्ट बनकर जाएंगे, तो उन्हें बुखार और पेचिश की बीमारियों के नाम पर पहचाना जाएगा.

# किसी जानवर का नाम भी नहीं आना चाहिए. जैसे Swine Flu, Monkeypox. इससे ये होगा कि बीमारी तो बाद में ख़त्म हो सकती है, लेकिन जानवरों की पूरी प्रजाति ख़तरे में आ जाएगी. Monkeypox जैसे नाम सामने आने के बाद बंदरों को देखते ही इंसान को याद आ जाएगी, वो बीमारी जिसके नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया है.

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# और न ही किसी इंसान या किसी ग्रुप का नाम इसमें शामिल होना चाहिए. इसमें कोई ऐसा नाम नहीं शामिल होना चाहिए, जिससे बाद में उस नामधारी को शर्म आए. मान लीजिए किसी भयानक बीमारी का नाम अनिल या सुनील रख दिया जाए, तो फिर इन नाम वालों को कितनी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ेगा.

# किसी समुदाय या पेशे का नाम भी बीमारी में नहीं आना चाहिए. जैसे Butchers पॉक्स, Cooks फीवर.

# साथ ही नाम रखते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि नाम में किसी तरह का डर या ख़तरा ना हो.

कोरोना वायरस से चीन में मरने वालों की संख्या 1000 से भी पार पहुंच चुकी है (फ़ाइल फोटो)
कोरोना वायरस से चीन में मरने वालों की संख्या 1000 से भी पार पहुंच चुकी है (फ़ाइल फोटो)

इस तरह के नाम अगर चलन में आ भी जाते हैं, तो WHO इस बात का ध्यान रखता है कि इन नामों का इस्तेमाल न किया जाए.

मई 2015 में WHO ने मीडिया को एक चिट्ठी जारी की थी. इस चिट्ठी में निर्देश दिए गए थे कि Swine flu और Middle East Respiratory Syndrome जैसे नाम इस्तेमाल न किए जाएं. ये नाम WHO की गाइडलाइन का पालन नहीं करते.

# क्या करना चाहिए

आपने पढ़ लिया कि गाइडलाइन क्या करने से मना करती हैं. लेकिन गाइडलाइन ये भी बताती हैं कि क्या करना चाहिए. क्या मानक तय किए गए हैं वो भी समझ लेते हैं.

# बीमारी के नाम में Generic Descriptive Terms का इस्तेमाल करना चाहिए. बीमारी जिस्म के जिस हिस्से से जुड़ी हो, वो नाम में हो, तो अच्छा होगा.

# नाम में बीमारी के सामने आने का साल भी होना चाहिए. नाम छोटा होना चाहिए. जैसे Rabies, Malaria, Polio.

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नाम के आगे तब Severe जोड़ा जाता है, जब सामने आते ही बीमारी से बड़ी संख्या में इंसानों की मौत हुई हो. और अगर बीमारी की कैटेगरी पहले से पता हो, लेकिन इस बार बीमारी ज़्यादा भयानक हो, तब इसके नाम के आगे Novel जोड़ते हैं.

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