कौन हैं विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, जिन्हें मोदी सरकार ने राम मंदिर का ट्रस्टी कमिश्नर बनाया है

अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने ट्रस्ट बनाया है. इसका नाम ‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ रखा गया है. अयोध्या के पूर्व राज परिवार के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को ट्रस्टी कमिश्नर बनाया गया है. वे अयोध्या के राजा कहलाते हैं. स्थानीय लोग उन्हें ‘राजा साहब’ कहकर बुलाते हैं. यार-दोस्त ‘पप्पू भैया’ कहकर पुकारते हैं. लेकिन वह भगवान राम के वंशज नहीं हैं. राम क्षत्रिय थे और विमलेंद्र ब्राह्मण हैं. इस वजह से वह राम मंदिर जमीन मामले में हिस्सेदार नहीं हैं.

अयोध्या में ऐसे आया मिश्रा राजपरिवार
कहते हैं अयोध्या राज परिवार में कई पीढ़ियों तक कोई वारिस पैदा नहीं हुआ था. ऐसे में बच्चे को गोद लेकर अयोध्या का वारिस बनाया गया था. बच्चा मिश्र परिवार से गोद लिया गया. ऐसे में अयोध्या में मिश्र सरनेम से वंश शुरु हो गया.

विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को राम जन्मभूमि ट्रस्ट में शामिल किया गया है.
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को राम जन्मभूमि ट्रस्ट में शामिल किया गया है.

विमलेंद्र ने अयोध्या में ही पढ़ाई की. मां ने राजनीति में जाने से मना किया था. बहुत सालों तक वे राजनीति से दूर रहे. लेकिन कई साल बाद 2009 में वे बसपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा. हार गए. इसके बाद पॉलिटिक्स से दूरी बना ली. उनका एक छोटा भाई भी हैं. जिनका नाम शैलेंद्र मोहन मिश्र हैं. विमलेंद्र के बेटे यतींद्र मिश्र साहित्यकार हैं.

मस्जिद ढहाई जा रही थी और महल में बैठे थे विमलेंद्र
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि जब बाबरी मस्जिद ढहाई जा रही थी तब वह महल में बैठे थे. 90 के दशक में विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को कांग्रेस का क़रीबी माना जाता था. ध्वंस के बाद अस्थायी मंदिर के निर्माण में उनका बहुत बड़ा रोल था.

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विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र अयोध्या के वर्तमान राजा हैं.
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र अयोध्या के वर्तमान राजा हैं.

वाजपेयी ने मांगी थी मदद
विमलेंद्र अयोध्या के राजपरिवार से होने की बात को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं. वे राजसी पोशाक में फोटो खिंचाने से भी बचते हैं. साल 2002 में बीजेपी ने शिलादान कार्यक्रम शुरू किया था. लेकिन अयोध्या के राजा के दखल के बाद इस अभियान को ज्यादा उछाल नहीं दिया गया. उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र से मदद मांगी थी. लेकिन राजा साहब ने कार्यक्रम को ठंडा रखने को ही कहा.

अयोध्या का कोरिया कनेक्शन
अयोध्या राजपरिवार का संबंध कोरिया से भी है. अयोध्या राजघराने के बारे में पता चलता है कि इसका संबंध भोजपुर के जमींदार सदानंद पाठक से रहा है. दक्षिण कोरिया के साहित्य में अयोध्या को अयुत कहा जाता है. संत इरियोन रचित कोरियाई ग्रंथ ‘समगुक युसा’ में अयोध्या से कोरिया के संबंध का उल्लेख मिलता है.

करीब 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्न समुद्री मार्ग से काया राज्य गई थीं. यह राज्य अब दक्षिण कोरिया में किमहे शहर के नाम से जाना जाता है. उनको वहां के राजा किम सुरो से प्यार हो गया और उन्होंने उनसे शादी कर ली. तब से अयोध्या का कोरिया कनेक्शन है.

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