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Wednesday, November 30, 2022

जाली दस्तावेज बनाकर सीएचसी में हेल्थ सुपरवाइजर के पद पर की 23 साल नौकरी,अब ले रहा पेंशन, निदेशक परिवार कल्याण ने दिया जांच का आदेश

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

जाली नियुक्ति पत्र बनाकर सिद्धार्थनगर के सीएचसी उसका बाजार में कर ली 23 साल नौकरी, अब ले रहा पेंशन।

बस्ती।जिले के रघऊपुर गांव निवासी वंश गोपाल ने जाली दस्तावेजों के आधार पर बस्ती मण्डल अधीन सीएचसी, उसका बाजार, सिद्धार्थनगर में हेल्थ सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति लेकर करीब 23 साल तक नौकरी की और अब पेंशन भी ले रहा है। मामले का संज्ञान लेते हुए निदेशक, परिवार कल्याण ने जांच का आदेश दिया है।

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदहाली के बीच जाली दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने का मामला प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है। इस जालसाजी में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों का शामिल होना भी बताया जा रहा है।

शिकायत के मुताबिक गायघाट अंतर्गत गांव रघऊपुर निवासी वंश गोपाल ने महानिदेशालय, परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अधिकारियों – कर्मचारियों की मिलीभगत से जौनपुर जिले के सीएचसी जलालपुर से स्थानान्तरण का जाली आदेश दिनांकित 15 दिसंबर 1997 तैयार किया और वहीं पर अस्थाई हेल्थ असिस्टेंट के पद पर अपनी पूर्व की नियुक्ति भी दिखाई। इसके लिए बकायदा जिलाधिकारी, जौनपुर के पदनाम से जारी दिखने वाले फर्जी नियुक्ति आदेश दिनांकित 20/06/1981 की भी कूट रचना की। सीएचसी, उसका बाजार – सिद्धार्थनगर में फर्जी स्थानांतरण आदेश के आधार पर वर्ष 1998 से 2021 तक नौकरी की और साल 2021 में नौकरी से अवकाश लेकर पेंशन प्राप्त कर रहा है।

बस्ती जिले के समाजसेवी और शिकायतकर्ता डॉ. प्रेम नारायण का आरोप है कि “वंश गोपाल का जाली दस्तावेजों के आधार पर सीएचसी, उसका बाजार – सिद्धार्थनगर में 23 साल नौकरी करना और फिर अवकाश लेकर पेंशन बनवाना उसके अकेले दम पर संभव नहीं है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों का भी हाथ होना स्वाभाविक है इसीलिए मेरी शिकायत पर जिलाधिकारी और सीएमओ सिद्धार्थनगर के द्वारा जारी जांच आदेश को परिवार कल्याण विभाग ने लंबे समय तक दबाए रखा। अब शिकायतों और आदेशों का दबाव बढ़ने पर उन्हें ऐक्शन लेने के मजबूर होना पड़ा।”

डॉ. प्रेम नारायण आगे बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग में बरती गई एक लापरवाही ने न जाने कितने मरीजों की जान संकट में डाली होगी और न जाने कितने उसकी सजा भुगत रहे होंगे। जनता के स्वास्थ्य के साथ किया गया खिलवाड़ सरकारों के लिए निंदनीय बात है।

नवनियुक्त सीएमओ सिद्धार्थ नगर से जब इस प्रकरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह प्रकरण अभी उनके संज्ञान में नहीं हैं।

जाली दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने और पेंशन प्राप्त करने के मामले में महानिदेशक परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मण्डल, बस्ती को प्रकरण में जांच अधिकारी नामित करते हुए जांच आख्या उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित कर दिया है।

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