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Wednesday, May 18, 2022

बस्ती: समाज में उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए मिलेगा ‘क्रांतिवीर पिरई खां सेवा मेडल’

भारत

नगर बाजार (बस्ती)। क्रांतिवीर पिरई खां सेवा मेडल दिये जाने वाले कर्मवीरों के चयन के लिए तीन सदस्यीय निर्णायक समिति बनाई गई है। जिसमें जालन्धर नगर से कर्नल तिलक राज, कोलकाता से डॉ. मुन्नी गुप्ता और दिल्ली से डॉ. अरुण प्रकाश शामिल हैं। जो कि आए हुए आवेदनों पर 30 मई, 2022 को अपना निर्णय देंगे। यह जानकारी देते हुए महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह के संयोजक प्रसिद्ध दस्तावेजी फिल्मकार और लेखक शाह आलम राना ने कहा कि, ‘क्रांतिवीर पिरई खां सेवा मेडल’ प्रेरणा सम्मान है जिसे आजादी आंदोलन के महानायक पिरई खां की स्मृति में शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा, “यह समाज में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाएगा है। यह पदक समाज को बेहतर बनाने के लिए विविध क्षेत्रों में लगे कर्मवीरों की प्रतिबद्धता की सराहना है। कृषि, साहित्य, खेल, सामाजिक एकता, चिकित्सा, पर्यावरण क्षेत्रों में कार्य कर मिसाल कायम करने वाले कर्मवीरों को यह मेडल आगामी 10 जून को आयोजित किए गए महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह में प्रदान किया जाएगा।”

क्रांतिवीर पिरई खां सेवा मेडल
क्रांतिवीर पिरई खां सेवा मेडल

प्रस्तावक द्वारा भरे गए प्रारूप, रिपोर्ट, दस्तावेज तस्वीरें, वीडियो, सूचना-सामग्री आदि के साथ आवेदन भेजने की आखिरी तिथि 25 मई, 2022 है।

बताते चलें कि, चयन समिति में कर्नल तिलक राज, जैसा कि उनके नाम से जाहिर है कि वह एक फौजी अधिकारी रहे हैं और उन्होंने फौजी सेवा के साथ-साथ शायरी को भी गले लगाया। एक हाथ में बंदूक थामे हुए, उन्होंने देश की सरहदों की जहां रक्षा की तो वहीं दूसरी ओर कविता के क्षेत्र में भी शोहरत कमायी।

वह चीफ़ पीएमजी पंजाब एवं चण्डीगढ़ के उच्च पद से रिटायर होने के बाद क़लम को ही अपना शस्त्र बनाते हैं और अपने गीतों तथा ग़ज़लों द्वारा प्यार, मुहब्बत की बात करते हैं। वह न केवल नफ़रत की दीवारें को तोड़ने का शक्तिशाली जज़्बा पैदा करते हैं बल्कि सभी प्रकार की बुराईयों और अत्याचार के ख़िलाफ़ निरन्तर लड़ने का आह्वान भी करते हैं। सेना में उत्कृष्ट कार्यों के लिए, थलसेना अध्यक्षों ने उन्हें दो बार सम्मानित किया। पंजाबी, हिन्दी, डोगरी और अंग्रेज़ी के गहरे जानकार कर्नल तिलक राज ने कई पुस्तकों की रचना भी की।

डॉ. मुन्नी गुप्ता प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय कोलकाता में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं वे मूलतः कवियत्री, अनुवादक, आलोचक होने के साथ स्त्री-विमर्श को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में पन्द्रह वर्षों से अध्यापन के साथ बांग्ला स्त्री आत्मकथाओं का सम्पादन एवं अनुवाद किया है। आधा दर्जन से अधिक पुस्तकों की लेखिका डॉ. मुन्नी गुप्ता को कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है।

डॉ. अरुण प्रकाश दार्शनिक व लेखक हैं। दिल्ली में अध्यापन व पत्रकारिता का भी लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. अरुण ने थारू जनजाति, जेल बंदियों व किन्नर समाज की उच्च शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। वे दर्शनशास्त्र, गणित, इतिहास व साहित्य सहित विविध विषयों में निष्णात हैं, और हिंदी के साथ ही संस्कृत, फारसी व अंग्रेजी भाषा पर भी अधिकार रखते हैं। डॉ. अरुण कई विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में मूल्य शिक्षा, दर्शन व भारत-विद्या पाठ्यक्रमों का निर्माण कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं भारत-कोरिया अकादमिक संबंधों को नया आयाम देने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित सम्मान से विभूषित किया जा चुका है।

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