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Monday, February 6, 2023

बस्ती : धूमधाम से मनाई गई महर्षि दयानंद की जयंती

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती। आर्य समाज नई बाजार बस्ती व भारत स्वाभिमान समिति द्वारा महर्षि दयानन्द जयन्ती बड़े धूमधाम के साथ मनाई गयी। इस अवसर पर देवयज्ञ कर उपस्थित आर्य जनों ने महर्षि दयानन्द के बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया व सबने मिलकर संगठन सूक्त का पाठ किया।

इस अवसर पर प्रधानाध्यापक अदित्यनारायन गिरि ने विधि विधान से देवयज्ञ कराते हुए कहा कि, महर्षि दयानन्द सरस्वती विद्या, बल, धर्म, योग, तर्क, युक्ति, प्रमाण, प्रतिभा, सुदृढ़ इच्छा निर्भीकता आदि अनेक गुणों से युक्त एवं असाधारण व्यक्तित्व सम्पन्न, धर्मिक, आध्यात्मिक व राष्ट्रभक्त सन्यासी थे। उन्होने व्यक्तिगत उन्नति के लिए बुद्धि नहीं लगाई अपितु समाज व राष्ट्र के उद्धार के लिए लेखन, प्रवचन, शास्त्रार्थ, ग्रन्थ प्रकाशन, अध्यापन, संवाद, सम्मेलन आदि अनेक विधि कार्यों को एक साथ चलाकर तत्कालीन सामाजिक राजनैतिक तथा धार्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

इस अवसर पर  नवल किशोर चौधरी कोषाध्यक्ष भारत स्वाभिमान समिति बस्ती ने कहा कि, “महर्षि दयानन्द नाम है उस वैचारिक क्रान्ति का जो समूचे विश्व को झकझोर कर रख देती है और विश्व शान्ति स्थापना में मनुर्भव का सन्देश देती है। उन्हांने आर्य समाज की स्थापना करके एक ऐसी जीवन पद्धति दी जिनके बिना न व्यक्ति का निर्माण हो सकता है न समाज का।”

अनूप कुमार त्रिपाठी व अनीशा मिश्रा ने बताया कि, महर्षि दयानन्द के चरित्र को पढ़ने के बाद मनुष्य के भीतर निर्भयता आती है ढोंग पाखण्ड से दूर रहकर राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट हो जाते हैं। उन्होंने कोई नवीन मत मतान्तर न चलाकर प्राचीन वैदिक संस्कृति के प्रचार व वेदों की ओर लौटो के लिए ही कार्य किया।

अरविन्द श्रीवास्तव ने कहा कि, “महर्षि का जीवन अनुकरणीय व प्रेरणा स्रोत है। वेदों के प्रचार एकेश्वरवाद, नारी उत्थान, छुआछूत मिटाने, पुनः वैदिक धर्म में वापसी हेतु शुद्धि, आजादी में आन्दोलन, गुरुकुल की स्थापना हेतु महर्षि दयानन्द जी आये थे।”

वन्दना कुमारी,श्रेया अंशिका पाण्डेय नीतीश कुमार राधा देवी आदि ने उनको नारी उद्धारक बताया। इस अवसर पर अनुष्का, खुशी, हुमैरा खानम, रेणुका, अंशी जयसवाल आदि बच्चों ने अपने वक्तव्य, गीत कविता आदि के माध्यम से ऋषि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

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