Basti: World Press Freedom Day पर ही मीडियाकर्मियों को पास का हवाला देकर कवरेज़ से रोका गया

विश्व प्रेस दिवस - Basti Khabar

यूपी के बस्ती जिले में कोरोना के पहले मामले को सार्वजनिक करने से लेकर दुश्वारियों की खबरों के कवरेज़ करने से रोकने तक जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासनिक इकाईयों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

देश में लगातार पहली बार इतने लम्बे समय के लिए लॉकडाउन की प्रक्रिया जारी रखी गयी। जिसमें नागरिकों के अलावा छुट्टा व पालतू पशुओं पर भी इसका जोरदार असर देखने को मिला। खेत  – खलिहानों में घूमने वाले पशुओं को हानिकारक पॉलीथिन और विषाक्तता चीजे खाते हुए देखा गया। इस बीच पत्रकारों का ध्यानाकर्षण सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल कान्हा गौशालाओं में रह रही गायों पर हुआ। जिसमें पाया गया कि जनपद के लगभग गौशालाओं और उसमें बची – खुची गायों की दशा बेहद दयनीय है। कोई गाय मारने के कगार पर है तो किसी मरी गाय को गौशालाओं के पास झाड़ियों में खुलेआम सड़ने के लिए फेंक दिया गया है। जो बचीं हैं उन्हें देखने के बाद लगता है कि वो आख़िरी सांसे गिन रहीं हैं। इस महामारी और लंबे लॉक डाउन में बीमार गायों को पूछने वाला कोई नही दिख रहा।

जिन मीडियाकर्मियों द्वारा इन मामलों की खबरों को प्रकाशित किया गया उनपर विभागीय अधिकारियों ने मानहानि का मुकदमा ठोंक दिया गया। लेकिन मीडियाकर्मियों का उत्साह अधिकारियों के मुकदमे के आगे बिल्कुल भी कम नही हुआ। नतीज़न कई प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों द्वारा गौशालाओं की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इस बीच जिला प्रशासन अपनी कमियों की खबरों के प्रकाशन को लेकर अपना कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया। किसी पत्रकार को अधिकारियों ने धमकी भरे शब्दों में घर में ही रहने की चेतावनी तो किसी अधिकारी ने वाहनों को सीज कर चालान करने की धमकी दी।

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रविवार को रुधौली नगर पंचायत में बने गौशाला की पड़ताल के लिए स्थानीय पत्रकार पहुंचे तो उन्हें गौशाला में प्रवेश करने से रोक दिया गया। वहां उपस्थित कुछ लोगों ने गौशाला में प्रवेश के लिए चैयरमैन से बात करने की बात कही, तो पत्रकारों ने चैयरमैन को फोन किया। चैयरमैन द्वारा पत्रकारों से पास होने की बात पूछी गयी तो पत्रकारों ने बताया कि हमारे प्रेस के अलावा हमारे पास कोई पास नही है, तो चैयरमैन ने पत्रकारों से एसडीएम रुधौली से बात कर गौशाला में प्रवेश की बात कही। फिर पत्रकारों ने एसडीएम रुधौली नीरज प्रसाद पटेल से बात की तो उन्होंने भी मीडियाकर्मियों के लिए पास की अनिवार्यता की बात कही। एसडीएम रुधौली ने कहा ऊपर से आदेश आएं हैं कि बिना पास के कोई भी मीडियाकर्मी सड़क पर नही दिखना चाहिए, इसके लिए उन्होंने रुधौली थानाध्यक्ष को निर्देशित भी किया है कि चाहे कोई भी हो उसकी गाड़ी तुरंत चालान करो। एसडीएम रुधौली से मीडियाकर्मियों ने ग़ैर हॉटस्पॉट स्थलों में भी पास की अनिवार्यता के लिए जारी निर्देश या आदेश की कॉपी मांगी गई , जिसकी कोई जानकारी एसडीएम रुधौली अभी तक उपलब्ध नही करा सके।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कोविड-19 के मद्देनजर जो निर्देश जारी किए गए थे उसमें हॉटस्पॉट स्थलों पर मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। जबकि सामान्य स्थलों के कवरेज़ लिए मीडियाकर्मियों के लिए पास की अनिवार्यता का जिक्र नही किया गया था। और पत्रकार सामान्य स्थलों में अपने – अपने कार्यक्षेत्र में खबरों का संकलन करते थे। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इस महामारी में किये गए इन्तेजामों की पड़ताल कर खबरों के प्रकाशन पर जिले से लेकर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने पत्रकारों से अपना कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है।

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इस मामले को लेकर आम जनमानस द्वारा सवाल किए जा रहे हैं इस लॉक डाउन में खबरों/घटनाओं और सूचनाओं को लोगों तक तेजी से पहुंचाने वाले पत्रकारों को कवरेज़ से अगर रोक दिया जाएगा तो हमें अपने स्थानीय की घटनाओं और सूचनाओं की जानकारी कैसे होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घरों में टीवी नही है लोग अपने मोबाइल फोन्स में खबरों को पढ़कर तत्काल सरकारी निर्देशों, सूचनाओं और जिले की मुख्य गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। लेकिन पत्रकारों द्वारा सच्चाई प्रकाशित करने पर प्रशासनिक इकाईयों द्वारा उनपर लगाम लगाने की कोशिश गलत है। लोगों ने इसकी कड़ी निंदा भी की है। जनपद निवासी Basti Khabar न्यूज़ एजेंसी के फाउंडर राजन चौधरी ने बताया कि पत्रकारों के साथ यह रवैया आने वाले समय में लोकतंत्र के लिए खतरा बनता जा रहा है। देश में इस महामारी के संकट के दौरान मीडियाकर्मियों द्वारा जोख़िम उठाकर खबरों को संकलित किया जा रहा है। उनके साथ तानाशाही रवैए की हम कड़ी निंदा करते हैं। रविवार 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर मीडियाकर्मियों के साथ हुए इस मामले को लेकर मीडियाकर्मियों व जनसामान्य में मामले की निन्दा की जा रही है।

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