37.7 C
Uttar Pradesh
Tuesday, July 5, 2022

बस्ती: रमज़ान पर सजीं मस्जिदें, रोजेदारों ने दी एक दूसरे को मुबारकबाद

भारत

नगर बाजार/बस्ती। रमज़ान का पाक महीना शुरू हो गया है। शनिवार को लोगों ने चाँद देखा और एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। यह पूरा महीना 30 दिनों का होता है, इस पूरे महीने रोज़े रखे जाते हैं। इस्लामी कैलेंडर में इस महीने को हिजरी कहा जाता है।

मान्यता है कि हिजरी के इस पूरे महीने में कुरान पढ़ने से ज्यादा सबाब मिलता है। वहीं, रोज़े को इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना गया है। इस महीने मुसलमान ताक्वा को प्राप्त करने के लिए रोज़े रखते हैं। ताक्वा का अर्थ है अल्लाह को नापसंद काम न कर उनकी पसंद के कार्यों को करना। आसान शब्दों में कहा जाए तो ये महीना मुसलमानों के लिए सबसे खास होता है।

इस्लाम में बेहद पवित्र माना गया है रमजान का महीना

इस्लाम मजहब में रमजान के महीने को बेहद मुकद्दस (पवित्र) माना जाता है। रमजान अल्‍लाह की रहमतों, बरकतों का महीना है। रमजान के पाक महीने में अल्लाह ने मुसलमानों से रोजा रखने का फर्ज किया है। रोजे इस्‍लाम के पांच बुनियादी सिद्धांतों और सबसे अहम फर्जों में से एक हैं। रोजा हर बालिग मुसलमान पर फर्ज है। इस पूरे महीने भर रोजा (उपवास) रखें जाते हैं, पांचों वक्त की नमाज अदा की जाती है और दिन अल्‍लाह की इबादत में गुजरता है।

कहा जाता है कि इस महीने की जाने वाली इबादत का सवाब (पुण्‍य) अन्य महीनों की तुलना में कई गुना ज्यादा मिलता है।

रमजान पर सजाई गई नगर बाजार की जामा मस्जिद / फोटो - मोहम्मद जाहिद, बस्ती खबर
रमजान पर रात में सजाई गई नगर बाजार की जामा मस्जिद / फोटो – मोहम्मद जाहिद, बस्ती खबर

नगर बाजार जामा मस्जिद के ईमाम मौलाना गुलाम यजदानी मिसबाही ने बताया कि, “रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है। इस पूरे महीने मुसलमान रोजा यानी उपवास रखते हैं, सूर्योदय से पहले और सूर्योदय के बाद ही खाना-पीना करते हैं। रमजान के महीने को इबादत और बरकत का महीना माना जाता है”

वैसे इस पवित्र महीने की शुरुआत चांद दिखाई देने पर होती है। रमजान का महीना कभी 29 दिन और कभी 30 दिन का होता है। उन्होंने बताया कि, रमजान के महीने का महत्व- रमजान का महीना नबी पाक के मुताबिक गमख्वारी का महीना है। गरीबों, यतीमों की मदद और उनका ख्याल रखने का महीना है। खासतौर से हर मुसलमान के लिए तमाम इंसानियत का ख्याल रखना जरूरी है, लेकिन रमजान के महीने में सदका और खैरात बेहद जरूरी है। ऐसा माना जाता है कि जकात, सदका दिए बिना ईद की नमाज कुबूल नहीं होती है।

सहरी का वक्त

सहरी, इफ्तार और तरावीह- रमजान के दिनों में लोग तड़के उठकर सहरी करते हैं। सहरी खाने का वक्त सुबह-ए-सादिक (सूरज निकलने से करीब डेढ़ घंटे पहले का वक्त) होने से पहले का होता है। सहरी खाने के बाद रोजा शुरू हो जाता है। रोजेदार पूरे दिन कुछ भी खा-पी नहीं सकते हैं। शाम को तय वक्त पर इफ्तार कर रोजा खोला जाता है और मगरिब की नमाज अदा करने के बाद रोजेदार तरावीह की नमाज अदा करते हैं।

Advertisement
- Advertisement -

सबसे अधिक पढ़ी गई

- Advertisement -

ताजा खबरें