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फसल अवशेष जलाएं नहीं खाद बना कर बढ़ाएं जमीन की उर्वराशक्ति: डॉ आरवी सिंह

बस्ती। फसल अवशेष जलाना एक अपराध है। फसल अवशेष जलाएं नहीं बल्कि खेत की मिट्टी में ही इसको नई तकनीक से मिलाएं। अगली बोआई में यह खाद का काम करेगा।

इस समय गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। श्रमिकों की कमी एवं समय की बचत के कारण हार्वेस्टर कंबाइन से गेंहू की कटाई अधिक मात्रा में हो रही है। जिससे काफी अधिक मात्रा में फसल अवशेष खेत में ही रह जाते हैं, जिसे बाद में लोग जला देते है।

फसल अवशेष जलाना बहुत ही नु़कसान दायक होता है, फसल अवशेष जलाने से खेत में उपस्थित लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, खेत में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा फसल अवशेषों में पाए जाने वाले पोषक पदार्थ का भी नुकसान होता है। इसलिए गेहूं काटने के पश्चात फसल अवशेष को जलाएं नहीं बल्कि उसे पहली वर्षा होते ही जुताई करके खेत मे मिला दें। खेत में पोषक तत्वों की वृद्धि होगी एवं अन्य कोई नुकसान नहीं होगा।

संभव हो तो गेहूं अवशेष का भूसा बनवा लें।कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती के अध्यक्ष डा. आरवी सिंह ने बताया कि फसल अवशेष का जलाना सामाजिक बुराई के साथ-साथ एक अपराध भी है, जिसमें सजा का प्रावधान है। कृषि वैज्ञानिक आरवी सिंह ने बताया कि कोरोना जैसी महामारी को देखते हुए किसान खेत में सावधानी बरतें। शारीरिक दूरी बनाकर ही कार्य करें।

मास्क या गमछे का प्रयोग करें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। कृषि कार्य के समय धूम्रपान और ढीले कपड़ों से बचें। जिला कृषि अधिकारी संजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि फसल अवशेष जलाने पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी

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