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लेबनान की राजधानी बेरुत में बड़ा धमाका, बड़ी संख्या में लोग ज़ख़्मी

लेबनान की राजधानी बेरुत में बड़ा धमाका, बड़ी संख्या में लोग ज़ख़्मी
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लेबनान की राजधानी बेरुत में एक बड़ा धमाका हुआ है. यह धमाका 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या की जाँच और अदालती सुनवाई का फ़ैसला आने के ठीक पहले हुआ है.

मीडिया रिपोट्स के मुताबिक़ धमाका शहर रके तटीय इलाक़े में हुआ है. प्रशासन को आशंका है कि इसमें कई लोग हताहत हुए हैं. ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो में धमाके का दृश्य काफ़ी भयावह है. आग की लपटों के साथ धुएं के गुबार उठ रहे हैं.

कार बम के ज़रिए 2005 में हरीरी की हत्या कर दी गई थी. संयुक्त राष्ट्र का एक ट्राइब्यूनल इस हत्या के मामले में शुक्रवार को फ़ैसला सुनाने वाला है. इसमें सभी चार संदिग्ध ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह समूह के हैं.

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हालांकि ये इस हमले में शामिल होने से इनकार करते रहे हैं. हरीरी के आवास के बाहर एक दूसरे धमाके की भी बात कही जा रही है. चारों संदिग्ध शिया मुसलमान हैं और इनके ख़िलाफ़ अदालती सुनवाई नीदरलैंड्स में हुई है. हरीरी को जब कार बम के ज़रिए मारा गया था तो इसमें 21 अन्य लोगों की भी जान गई थी.

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि आज हुए धमाके में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है. स्थानीय मीडिया में दिखाया जा रहा है कि लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं. एक चश्मदीद ने कहा कि पहला धमाका बहरा कर देने वाला था.

अभी तक धमाके की वजह पता नहीं चल पाई है. लेबनान में पिछले कुछ समय से सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लेबनान 1975-1990 के गृह युद्ध के बाद से सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है और लोग सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं.

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हरीरी मामला क्या है?

14 फ़रवरी 2005 को रफ़ीक हरीरी जब एक गाड़ी से जा रहे थे तभी उन्हें निशाना बनाकर एक बड़ा धमाका किया गया था. इस धमाके में उनकी मौत हो गई थी.

हरीरी लेबनान के प्रमुख सुन्नी नेता थे. हत्या से पहले वह विपक्ष के साथ आ गए थे. हरीरी ने लेबनान से सीरिया की सेना हटाने की मांग का भी समर्थन किया था, जो लेबनान में 1976 में हुए गृह युद्ध के बाद से ही मौजूद थी.

हरीरी की हत्या के बाद सीरिया समर्थक सरकार के ख़िलाफ़ हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने उतरे थे. हरीरी की हत्या के लिए लेबनान के ताक़तवर पड़ोसी को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. हमले के दो सप्ताह के भीतर ही सरकार को इस्तीफ़ा देना पड़ा और कुछ वक़्त बाद सीरिया को भी अपनी फ़ौज वापस बुलानी पड़ी.

सारे सबूत इकठ्ठा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र और लेबनान ने विस्फोट की जांच के लिए 2007 में द हेग में एक ट्राइब्यूनल का गठन किया. इस ट्राइब्यूनल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के चार संदिग्धों पर आतंकवाद, हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप तय किए.

हमले से जुड़े एक पाँचवें शख़्स और हिजबुल्लाह के सैन्य कमांडर मुस्तफ़ा अमीन की 2016 में सीरिया में हत्या कर दी गई थी. हिजबुल्लाह के समर्थकों ने इस ट्रायल को ख़ारिज कर दिया है. उनका कहना है कि ट्राइब्यूनल राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं है.

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