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बजट 2020ः ये ब्लू इकॉनमी क्या होती है, जिसे लेकर निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान किया है

बजट 2020. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मछली पालने वालों के लिए ‘सागर मित्र योजना’ का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए ये योजना लाई जा रही है. सीतारमण ने बताया कि सागर मित्र योजना के तहत 500 मछली उत्पादन संगठन और 3477 सागर मित्र बनाए जाएंगे. इसके तहत तटीय क्षेत्र के युवाओं को मछली पालन से जोड़कर रोज़गार दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि साल 2022-23 तक मछली उत्पादन 200 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है. कहा गया कि 2025-25 तक मछली निर्यात 1 लाख करोड़ रुपए तक हो जाएगा.

ब्लू इकॉनमी क्या होती है?

ब्लू इकॉनमी समुद्र से जुड़े संसाधनों के सस्टेनेबल इस्तेमाल से जुड़ी है. मतलब समुद्र के इको सिस्टम को नुकसान पहुंचाए बिना इससे फायदा लेना. इसे समुद्र की अर्थव्यवस्था भी कह सकते हैं. समुद्र पूरी धरती का एक तिहाई हिस्सा कवर करते हैं. धरती का 97 फीसदी पानी समुद्र में ही है. ग्लोबल जीडीपी का तीन से पांच फीसदी हिस्सा समुद्रों से ही तय होता है. भारत भी तीन तरफ से समुद्र से घिरा है. भारत के कुल व्यापार का 90 फीसदी समुद्री मार्ग से ही होता है. इसलिए ब्लू इकॉनमी भारत के लिए बहुत ज़रूरी है. इसे अगला ‘सनराइज सेक्टर’ कहते हैं.

– साल 2010 में गुंटर पॉली की किताब ‘The Blue Economy: 10 years, 100 innovations, 100 million jobs’ में पहली बार ब्लू इकॉनमी के कॉन्सेप्ट को बढ़ावा मिला था.

– ब्लू इकॉनमी के तहत अर्थव्यवस्था का आधार समुद्री क्षेत्र होता है. इसमें पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजनेस मॉडल तैयार किए जाते हैं और रोज़गार दिए जाते हैं.

– ‘ब्लू ग्रोथ’ के जरिए संसाधनों की कमी और कचरे के निपटारे की समस्या का समाधान करने की कोशि‍श होती है.

– ब्लू इकॉनमी के तहत समुद्र भी साफ-सुथरा रखे जाने का लक्ष्य होता है ताकि बड़े पैमाने पर समुद्र से उत्पादन हो.

– मछली पालन, मरीन एनर्जी, बंदरगाहों से ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म ब्लू इकॉनमी के हिस्से हैं और इनसे रोज़गार भी पैदा होता है.

– नीति आयोग ने भी देश की इकॉनमी के लिए ‘ब्लू इकॉनमी’ की वकालत की है.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मछली पालन, पशुपालन, डेयरी का अलग से मंत्रालय बनाया गया था. तब इस मंत्रालय को कुल बजट में से 2,932.25 करोड़ रुपए पशुपालन और डेयरी को बढ़ावा देने के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं के लिए जबकि मछली पालन क्षेत्र की योजनाओं के लिए 804.75 करोड़ रुपये रखे गए थे.

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