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Sunday, October 17, 2021

प्राणायाम से इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों को सक्रिय कर दुखों से छूट सकतें हैं : गरुण ध्वज पाण्डेय

भारत

डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती। जिले के हर थानों में चलाए जा रहे योग विज्ञान शिविरों में एडवांस योग, एक्यूप्रेशर, आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में भी बताया जाएगा। यह जानकारी देते हुए ओम प्रकाश आर्य जिला प्रभारी भारत स्वाभिमान समिति बस्ती ने बताया कि योग के माध्यम से हम युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं जिससे युवाओं का रुझान योग की ओर बढ़ा है। पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशानुसार आर्य समाज व भारत स्वाभिमान समिति बस्ती द्वारा थाना कप्तानगंज में चल रहे दो दिवसीय योग विज्ञान शिविर का समापन हुआ।

इस अवसर पर योग शिक्षक अदित्यनारायन गिरि द्वारा थानाध्यक्ष बृजेश सिंह को महर्षि दयानंद कृत सत्यार्थ प्रकाश भेंट किया गया। समापन पर योग शिक्षको के प्रति आभार व्यक्त करते हुए थानाध्यक्ष बृजेश सिंह ने कहा कि योग वह विधा है जो शरीर, आत्मा और मन तीनो का संतुलन बना करके स्वास्थ्य को उत्तम बनाने का कार्य करता है। योग चित्त विक्षेप को समाप्त कर अपने निज आत्म स्वरूप को देखने,समझने, परखने तथा ‘स्व ‘ का साक्षात्कार करने मे सक्षम बनाता है । वर्तमान परिदृश्य में योग जीवन का अभिन्न अंग बन गया है । योग से शारीरिक, मानसिक लाभ के साथ साथ अध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है ।

योगाचार्य  श्री आदित्य नारायण गिरि जी द्वारा व्यायाम, आसनों के साथ सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार तथा ध्यान मुद्रा का अभ्यास कराया गया । उन्होंने बताया कि केवल गुफा और कन्दराओं में बैठकर की जाने वाली साधना ही योग नहीं है। हम अपने जीवन में, अपने कर्मों को कितनी श्रेष्ठता के साथ करते हैं, कितनी स्वच्छता के साथ करते हैं बस यही तो योग है। सुख-दुःख, हानि लाभ, मान अपमान, इन्ही सभी परिस्थितियों में समता का भाव ही तो योग है।

योग शिक्षक प्रशिक्षक गरुणध्वज पाण्डेय ने इस अवसर पर भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, शीतली, सीत्कारी, भ्रामरी व उद्गीथ प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया। त्रिवेणी के बारे में बताते हुए कहा कि हमारी तीन प्रमुख प्राणवाहिनी नाड़ियाॅ इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना हमारी जीवनी शक्ति को बढ़ाती हैं। धर्मग्रन्थों में इड़ा को गंगा, पिंगला को यमुना और सुषुम्ना को सरस्वती कहा गया है। इस त्रिवेणी का जहाॅ संगम है, उसे तीर्थराज कहते है। इसमें स्नान करके साधक समस्त दुःखों से  मुक्त हो जाता  है। यह त्रिवेणी का संगम बाहर नहीं बल्कि भीतर ही है। प्राणायामों के द्वारा इसे सक्रिय किया जा सकता है।

साधकों को ध्यान की महत्ता बताते हुए बताया कि केवल पाॅच मिनट के सकारात्मक ध्यान से हम अपने आप को तनावमुक्त कर सकते हैं। जिनकी नाक बजती है उन्हे कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उदगीथ प्राणायाम करना चाहिए तथा देशी गाय का शुद्ध घी नाक में डालना चाहिए। गठिया या अन्य जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के फलों का चूर्ण बनाकर उसे आधा चम्मच सुबह खाली पेट सेवन करने से दर्द दूर होता है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से थानाध्यक्ष श्री वृजेश सिंह जी, हेड कांस्टेबल गोरख सिंह, कांस्टेबल राजबीर साहनी, शंशाक विश्वकर्मा, शशिकपूर यादव, मनेष कुमार, राकेश यादव, सतीश यादव, विजय कुमार सिंह,अभय सिंह, श्रवण कुमार, रामानन्द, रिकी चौहान, रामेश्वर यादव, प्रियंका कुशवाहा, सपना कुमारी, राजकुमार, हरिलाल, राजकुमार यादव, वीरेन्द्र सिंह सहित बहुत से पुलिस कर्मी सम्मिलित हुए।

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