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क्या चीन में बने सामान छूने से किसी को कोरोना वायरस इंफेक्शन हो सकता है?

क्या चीन में बने सामान छूने से किसी को कोरोना वायरस इंफेक्शन हो सकता है?
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2019 नोवेल कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार बढ़ती जा रही है. जब ये स्टोरी लिखी जा रही है, तब तक कोरोना वायरस लगभग 31,400 लोगों तक पहुंच चुका है और इससे 638 लोगों की मौत हो चुकी है. बहुत लोगों को ऐसा लग रहा है चूंकि कोरोना वायरस चीन से में फैलना शुरू हुआ है, इसलिए चीन से आया सामान छूने से वायरस इन्फेक्शन हो सकता है. कुछ को इस बात की खुशी भी है कि चलो, इसी बहाने चीन का सामान बिकना तो बंद हुआ!

थोड़ी देर के लिए ‘ट्रेड वॉर’ को किनारे रख देते हैं और देखते हैं कि चीन में बने सामान छूने से वायरस फैलने की आशंका कितनी सही है?

पिछले साल मेड इन चाइना नाम से राजकुमार राव की फिल्म भी आई थी. (सोर्स - रॉयटर्स)
पिछले साल ‘मेड इन चाइना’ नाम से राजकुमार राव की फिल्म भी आई थी. (सोर्स – रॉयटर्स)

मान लीजिए कोई पैकेज बीजिंग के एयरपोर्ट पर रखा है और उसके पास कोरोना वायरस से इन्फेक्टेड कोई मरीज़ जाकर छींक देता है. फिर वो पैकेज नई दिल्ली के एयरपोर्ट पर आ जाता है. उसी पैकेज को आप छू लेते हैं, तो क्या आप भी कोरोना वायरस से इन्फेक्ट हो जाएंगे?

एक लाइन का जवाब होगा – संभवत: नहीं.

क्यों नहीं? ये समझने के लिए वायरस को समझना होगा. वैसे अभी 2019 नोवेल कोरोना वायरस के बारे में काफी-कुछ समझना बाकी है. लेकिन हम इस जैसे पुराने कोरोना वायरस (SARS और MERS) से अपनी समझ बना सकते हैं.

पहले वायरस के बारे में बेसिक डीटेल जान लीजिए. वायरस का अपना खाने-पीने का जुगाड़ नहीं होता, इसलिए वे जीवित कोशिकाओं पर हमला करते हैं. इन कोशिकाओं का खाना लूटकर वो खुद को ज़िंदा रखते हैं और अपने जैसे दूसरे वायरस बनाते हैं.

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर कोरोनावायरस. (सोर्स - विकिमीडिया)
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर कोरोना वायरस. (सोर्स – विकिमीडिया)

तो ऐसा है कि ज़िंदा रहने के लिए वायरस को कोई जीवित होस्ट की जरूरत होती है. इसके बिना वायरस कुछ ही घंटों तक ज़िंदा रह सकता है. अंग्रेज़ी में इसे कहते हैं – पूअर सर्वाइवेबिलिटी.

CDC यानी सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक –

हम इससे पहले दो और कोरोना वायरस आउटब्रेक देख चुके हैं – SARS और MERS. 2019 नोवेल कोरोना वायरस इन दोनों से काफी जेनेटिकली रिलेटेड है. मतलब ये लोग एक ही कुनबे के हैं. हमें पक्का तो नहीं पता कि ये कोरोना वायरस भी SARS और MERS जैसा ही है. लेकिन इन दोनों से मिली जानकारी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

जनरल बात यही है कि सतह पर इनकी जिंदा रहने की क्षमता बहुत बुरी है. तो जिन पैकेज को शिप होने में कई दिन या हफ्ते लगते हैं, उनसे इसके फैलने के चांस बहुत कम हैं.

कोरोनावायरस के शुरुआती लक्षण रेस्पिरेटरी यानी सांस से जुड़े ही होते हैं. (सोर्स - विकिमीडिया)
कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण रेस्पिरेटरी यानी सांस से जुड़े ही होते हैं. (सोर्स – विकिमीडिया)

आम तौर पर कोरोना वायरस रेस्पिरेटरी ड्रॉप्लेट्स यानी सांस से निकलने वाली बूंदों से फैलता है. अभी हमारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि 2019-nCoV सामान इंपोर्ट करने से भी फैल सकता है.

शुरुआत में नोवेल कोरोना वायरस जानवरों से कुछ इंसानों तक फैला. अब ये मुख्य रूप से इंसानों से ही इंसानो के बीच फैल रहा है. इंसानों में भी मुख्य रूप से लोगों की सांस के संपर्क में आने से. छींकने से. खांसने से.

आखिर में यही कहा जा सकता है कि जिन निर्जीव वस्तुओं को चीन से भारत आने में कई घंटे या दिन लगते हैं, उनसे हमें कोरोना वायरस इन्फेक्शन का कोई खतरा नहीं है.

अब आप ये ग्राफ देखिए –

लेफ्ट में कोरोनावायरस से इन्फेक्ट हुए लोगों का ग्राफ है. राइट में इस वायरस से हुई मौतों का ग्राफ है. (सोर्स - वर्ल्डोमीटर)
लेफ्ट में कोरोना वायरस से इन्फेक्ट हुए लोगों का ग्राफ है. राइट में इस वायरस से हुई मौतों का ग्राफ है. (सोर्स – वर्ल्डोमीटर)

लगभग ऐसे ग्राफ देखकर मैथ्स के स्टूडेंट्स को एक्सपोनेंशियल ग्रोथ रेट याद आ जाती है. दरअसल, कोरोना वायरस के साथ इसका डर भी इसी रेट से फैल रहा है. और अक्सर डर जन्म देता है बहुत सारी गलत सूचनाओं को.

इन्फेक्शन के साथ-साथ गलत सूचनाओं से बचना भी ज़रूरी है. इसलिए ये ज़रूरी है कि कोरोना वायरस के बारे में आपकी समझ दुरुस्त हो.

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