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यूपी में बिना परमिशन पैदल नहीं चल सकते? पुलिस ने 10 लोगों को किया गिरफ़्तार

यूपी में बिना परमिशन पैदल नहीं चल सकते? पुलिस ने 10 लोगों को किया गिरफ़्तार
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BHU. हिंदी में लिखें तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. यहां के कुछ छात्रों ने एक मार्च निकाला. मार्च था नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा. चौरी चौरा से शुरू करके दिल्ली के राजघाट में ख़त्म होनी थी. छात्रों के साथ एक पत्रकार और कुछ सामजिक कार्यकर्ता थे. ये यात्रा दो दिनों पहले यानी 11 फरवरी को गाजीपुर पहुंची. यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. धारा 107/116 के तहत केस दर्ज किया गया और भेज दिया गया जेल.

मुद्दा बस इतना नहीं है. गिरफ्तारी के अगले दिन यानी 12 फरवरी को जब ज़मानत के लिए याचिका दायर की गयी. गाजीपुर के एसडीएम, सदर ने ज़मानत के लिए जो आदेश जारी किया है, वो “अजीबोगरीब” है. कैसे? क्योंकि ज़मानत के लिए दिए गए आदेश में SDM ने कहा है कि जितने लोग गिरफ्त में लिए गए हैं, सभी को 2.5-2.5 लाख राशि के 2-2 बांड भरने हैं. और साथ ही हरेक व्यक्ति की दो राजपत्रित अधिकारियों द्वारा गारंटी होनी चाहिए. इतना हो गया, तभी ज़मानत मिल सकेगी.

Bail order by SDM, Ghazipur sadar
एसडीएम ग़ाज़ीपुर सदर द्वारा जारी किया गया ज़मानत का आदेश

जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शेष नारायण ओझा (30), प्रियेश पाण्डेय (27), अनंत शुक्ला (28), अतुल यादव (27), नीरज राय (26), राज अभिषेक (26), रवीन्द्र कुमार रवि(27), मुरारी कुमार (25), मनीष शर्मा (29) और प्रदीपिका सारस्वत (28) के नाम शामिल हैं.

क्यों निकाली गयी पदयात्रा?

यूपी में CAA और NRC को लेकर प्रोटेस्ट हुए थे. युवाओं ने मिलकर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनायी. टीम ने तय किया की हिंसा प्रभावित जगहों पर पहुंचकर गांधी का संदेश देंगे. उनके द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति की बात करें तो ये लोग भाईचारे, अमन और अहिंसा की बात करेंगे.

2 फरवरी 2020 को चौरीचौरा से ये यात्रा निकली थी. चौरीचौरा से इसलिए क्योंकि ये वह जगह थी जहां 1922 में अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था. लगभग 200 किमी की पदयात्रा करके ये छात्र मऊ से आगे बढ़कर गाजीपुर पहुंचे थे.

Nagrik Padyatra Satyagrah
नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा का पोस्टर

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा पर निकली टीम के साथ विकास कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी है. कहा है कि ज़मानत की ये शर्त अजीब है. कोई भी सरकारी राजपत्रित अधिकारी किसी की ज़मानत के लिए क्यों साइन करेगा, जबकि वो खुद उसी सरकार का मुलाजिम है? कहा है कि एसडीएम द्वारा जारी किया गया आदेश प्राकृतिक न्याय के आईडिया के खिलाफ है.

नागरिकता संशोधन क़ानून और NRC पर हाल में हुए विरोध के बाद यूपी सरकार ने पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी थी. इसके बारे में नागरिक पदयात्रा की टीम ने कहा है कि यूपी सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.

प्रशासन का क्या कहना है?

आदेश में लिखा है कि ये लोग बिना परमिशन के पदयात्रा कर रहे हैं. CAA और NRC के संबंध में लोगों / जनता को भ्रामक संदेश देते हुए गुमराहकर भड़का रहे हैं, जिससे शान्ति भंग होने की प्रबल संभावना है. इस कृत्य से जनता में वैमनस्य पैदा होगा तथा संज्ञेय अपराध घटित हो सकता है.

Bail order issued by SDM Sadar Ghazipur
एसडीएम ग़ाज़ीपुर सदर द्वारा कारी किये गए आदेश का हिस्सा

छात्रों की गिरफ्तारी और उनकी जमानत के लिए दिए गए आर्डर के संबंध में हमने ग़ाज़ीपुर प्रशासन से बात करने की कोशिश की. ग़ाज़ीपुर के डीएम और एसडीएम दोनों से ही संपर्क साधने की कोशिश की गयी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. सीधा जवाब मिलने पर उससे अवगत करा देंगे. लेकिन समाचार वेबसाइट सत्याग्रह से बातचीत में एसडीएम ने कहा,

“इन सभी लोगों ने पदयात्रा के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी. सिर्फ छह लोगों की पदयात्रा से प्रशासन को क्या समस्या है, इस पर उनका कहना था कि फिलहाल तो गिरफ्तारी की जा रही है और मामले में जांच करके आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

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