केंद्र ने एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की, बोली लगाने के दस्तावेज़ जारी

एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार कंपनी की सस्ती विमानन सेवा ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ में भी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेचेगी. बीते साल केंद्र की मोदी सरकार ने एयर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए निविदा जारी की थी, लेकिन किसी ने बोली ही नहीं लगाई थी.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को भारी कर्ज से लदी एयर इंडिया के 100 फीसदी शेयर बेचने की घोषणा कर दी. सोमवार को जारी निविदा दस्तावेज के अनुसार, एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार कंपनी की सस्ती विमानन सेवा ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ में भी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी.

इसके अलावा एयर इंडिया के सिंगापुर एयरलाइंस (सैट्स) के साथ संयुक्त उपक्रम ‘एयर इंडिया-सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड’ (एआईसैट्स) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी. एआईसैट्स हवाई अड्डों पर विमानों के खड़े होने और रखरखाव इत्यादि की सेवाएं देती है.

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद एयर इंडिया का प्रबंधन भी सफल बोली लगाने वाले को हस्तांतरित कर दिया जाएगा. दो साल से भी कम अवधि में एयर इंडिया को बेचने की यह सरकार की दूसरी कोशिश है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली बार सरकार का यह प्रयास असफल रहा था.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में सरकार ने एयर इंडिया में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रबंधकीय नियंत्रण निजी हाथों में देने के लिए निविदा जारी की थी.

सरकार ने इस विनिवेश में बोली प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगी और 17 मार्च तक एयर इंडिया खरीदने के इच्छुक पक्षों से रुचि पत्र मांगे हैं.

एयर इंडिया की एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेस, एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेस, एयरलाइन एलाइड सर्विसेस और भारतीय होटल निगम में भी हिस्सेदारी है. इन सभी को एक अलग कंपनी एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को हस्तांतरित कर दिया जाएगा और यह एयर इंडिया की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के सौदे का हिस्सा नहीं होंगी.

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दस्तावेज में कहा गया है कि ये इकाइयां एक अलग कंपनी- एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल)- को हस्तांतरित होने की प्रक्रिया में हैं और प्रस्तावित लेन-देन का हिस्सा नहीं होंगी.

निविदा दस्तावेजों के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस पर विनिवेश दस्तावेज तैयार होने तक (रिपीट विनिवेश दस्तावेज तैयार होने तक) 23,286.50 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया रह जाएगा. एयर इंडिया पर बाकी का कर्ज एआईएएचएल को हस्तांरित कर दिया जाएगा.

एयर इंडिया की इस विनिवेश प्रक्रिया के लिए परामर्शक की भूमिका ईवाई करेगी.

साल 2018 में सरकार ने एयर इंडिया की 76 प्रतिशत इक्विटी शेयर पूंजी को बंद करने के साथ-साथ निजी कंपनियों को प्रबंधन नियंत्रण स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, इसकी किसी ने बोली नहीं लगाई थी.

मालूम हो कि हाल ही में एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अश्विनी लोहानी ने कहा था कि कंपनी के बंद होने को लेकर अफवाहें पूरी तरह आधारहीन हैं. सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया उड़ान भरती रहेगी और परिचालन का विस्तार भी करेगी.

हालांकि लोहानी के दावों के उलट अब सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला किया हुआ है.

विनिवेश प्रक्रिया में कंपनी के कर्मचारियों को कुल तीन प्रतिशत शेयर दिए जाने का प्रस्ताव होगा. सूत्र ने कहा कि ईसॉप्स के तहत 98 करोड़ शेयर अलग से रखे गए हैं. एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल कर्मचारियों की संख्या एक नवंबर 2019 तक 16,077 है. इसमें कंपनी के स्थायी कर्मचारी भी शामिल है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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