पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीनी सैनिकों से फिर झड़प, भारत ने जारी किया बयान

 पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीनी सैनिकों से फिर झड़प, भारत ने जारी किया बयान

Pangong Valley Ladakh/ Photo- Basti Khabar

भारत सरकार ने सोमवार को कहा कि चीन सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में सीमा पर बनी सहमति का उल्लंघन किया है. सरकार ने कहा है कि चीनी सैनिकों ने उकसाऊ क़दम उठाते हुए सरहद पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की लेकिन भारतीय सैनिकों (Indian Army) ने उन्हें रोक दिया.

भारतीय सेना के बयान को पीआईबी (Press Information Bureau) की ओर से जारी किया गया है. बयान के अनुसार, ”भारतीय सैनिकों ने पंन्गोंग त्सो लेक (Pangong Tso Lake) में चीनी सैनिकों के उकसाऊ क़दम को रोक दिया है. भारतीय सेना संवाद के ज़रिए शांति बहाल करने का पक्षधर है लेकिन इसके साथ ही अपने इलाक़े की अखंडता की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है. पूरे विवाद पर ब्रिगेड कमांडर स्तर पर बैठक जारी है.”

SITUATION UPDATE: EASTERN LADAKH/ Source : Ministry of Defence
SITUATION UPDATE: EASTERN LADAKH/ Source : Ministry of Defence

भारतीय सेना के अनुसार यह झड़प 29 अगस्त की रात हुई है. भारतीय सेना ने कहा है कि चीनी पीप्लस लिब्रेशन आर्मी (Chinese People’s Liberation Army) यानी पीएलए ने सीमा पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की लेकिन सतर्क भारतीय सैनिकों ने ऐसा नहीं होने दिया.

पिछले हफ़्ते ही भारतीय विदेश मंत्री (Indian Foreign Minister) एस जयशंकर ने कहा था कि चीन के साथ एलएसी यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव 1962 के बाद सबसे गंभीर स्थिति है. एस जयशंकर ने कहा था, ”निश्चित तौर पर 1962 के बाद यह सबसे गंभीर स्थिति है. यहां तक कि 45 साल बाद चीन के साथ संघर्ष में सैनिक हताहत हुए हैं. सीमा पर दोनों तरफ़ से सैनिकों की तैनाती भी अप्रत्याशित है.”

विदेश मंत्री ने कहा था कि भारत ने चीन से कह दिया है कि सीमा पर शांति की स्थापना दोनों पड़ोसी देशों में बराबरी के संबंधों पर ही संभव है. विदेश मंत्री ने कहा था, ”अगर हम पिछले तीन दशकों से देखें तो विवादों का निपटारा राजनयिक संवाद के ज़रिए ही हुआ है और हम अब भी यही कोशिश कर रहे हैं.”

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इससे पहले भारत के चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ और पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत (Former Army Chief General Bipin Rawat) ने कहा था कि चीन के साथ बातचीत जारी है. उन्होंने कहा था कि अगर बातचीत से चीज़ें नहीं सुलझती हैं तो सैन्य विकल्प मौजूद है.

पूर्वी लद्दाख चीन के सैनिकों तैनाती बड़ी संख्या में है. रविवार को हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ये बात विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने भी कही थी. पिछले चार महीनों में पूर्वी लद्दाख के कई इलाक़ों में भारत और चीन के सैनिकों में झड़प हुई है.

15 जून को गलवान घाटी (Galvan Valley) में चीन और भारत के बीच हिंसक झड़प के बाद सैनिकों को पीछे हटाने के लिए कई समझौते हुए हैं. लेकिन चीनी सैनिक (Chinese soldier) अब भी इलाक़े में हैं और भारत सरकार ने उनके पूरी तरह से पीछे जाने की बात नहीं कही है. चीनी सैनिकों ख़ासकर पन्गोंग त्सो इलाक़े में (In Pangong Tso area) जमे हुए हैं.