दिल्ली चुनाव पर बोले अमित शाह, गोली मारो और भारत पाक मैच जैसे बयान से पार्टी को नुकसान संभव

 दिल्ली चुनाव पर बोले अमित शाह, गोली मारो और भारत पाक मैच जैसे बयान से पार्टी को नुकसान संभव

दिल्ली चुनाव पर बोले अमित शाह, गोली मारो और भारत पाक मैच जैसे बयान से पार्टी को नुकसान संभव – Basti Khabar

नई दिल्ली, पीटीआइ। दिल्ली चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद अमित शाह ने कहा कि मेरा आकलन गलत हो गया। हम चुनाव सिर्फ जीत या हार के लिए नहीं लड़ते हैं। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो अपनी विचारधारा का विस्तार करने में विश्वास करती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव परिणाम सीएए और एनआरसी का जनादेश नहीं है।

चुनाव दौरान विवादित बयानों से भाजपा ने खुद को किया दूर

दिल्ली चुनाव प्रचार-प्रसार के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकर और सांसद प्रवेश वर्मा द्वारा दिए विवादित बयान पर अमित शाह ने कहा कि चुनाव में ‘गोली मरो’ और ‘भारत-पाकिस्तान मैच’ जैसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे। पार्टी ने इस तरह की बयानबाजी से से खुद को दूर कर लिया है।

दिल्ली में भाजपा का वोट पर्सेंट बढ़ा है

अन्य राज्यों के चुनाव परिणामों पर शाह ने कहा कि मोदी जी अभी कुछ ही समय पहले सबसे बड़े बहुमत के साथ विजयी रहे। अब सही बात है कि कुछ राज्यों में सफलता नहीं मिली लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भाजपा से लोगों का विश्वास उठा है। महाराष्ट्र में हम चुनाव जीते हैं। हरियाणा में केवल 6 सीटें कम हुईं हैं। झारखंड में हम चुनाव हारे और दिल्ली में पहले से हारे हुए थे बावजूद इसके सीट और वोट पर्सेंट बढ़ा है। 

सीएए में नहीं है मुस्लिमों की नागरिकता लेने का प्रावधान

अमित शाह एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू दे रहे थे जिसमें उन्होंने कि हमारा मन शुद्ध है और हम शुद्ध मन से काम करते हैं। हमने कभी भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया है। मैं आज भी देश को बताना चाहता हूं कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है। जो मुस्लिमों की नागरिकता ले लेता हो।

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अमित शाह ने कहा कि किसी ने आज तक मुझे ऐसा प्रावधान नहीं बताया कि सीएए के किस प्रावधान के तहत वो ये मानते हैं कि ये एंटी मुस्लिम है। अगर भाजपा का विरोध ही करना है तो फिर कुछ भी हो सकता है।

अपने राजनीतिक करियर पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं 13 साल की आयु से राजनीति में हूं। मेरा व्यक्तिगत कुछ नहीं है, जो देश के लिए अच्छा है, वही मेरा है। 1980-81 में जब मैंने भाजपा ज्वाइन की थी, तो उस वक्त हमारी मात्र दो सीटें थी। आज एक लंबा सफर तय करके हम यहां पहुंचे हैं।