दिल्ली के अस्पताल सिर्फ़ दिल्लीवासियों के लिए, इस पर निर्णय 6 जून को: अरविंद केजरीवाल

दिल्ली| मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि शनिवार 6 जून तक दिल्ली के अस्पतालों पर निर्णय कर दिया जाएगा. हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से सुझाव माँगे थे कि दिल्ली के अस्पताल सिर्फ़ राजधानी में रह रहे लोगों के लिए इस्तेमाल किए जायें या नही. 

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने न्यूज़18 इंडिया से बातचीत में कहा, “दिल्ली के अस्पतालों में वैसे 60-70% मरीज़ दिल्ली के बाहर से आए होते हैं. लॉकडाउन के तहत जो भी दिल्ली में इस समय रह रहा है उनके इलाज की व्यवस्था हमारी चिंता है. अगर इस समय दिल्ली को पूरे देश के लोगों के लिए खोल दिया और ज़्यादा तादाद में बाकी देश के लोग आ गये तो दिल्ली के लोग कहा जाएँगे इलाज करने? दिल्ली के लिए एक संकट पैदा हो सकता है.”

उन्होने बताया की दिल्ली में इस समय 8500 बेड हैं और 3500 लोग अस्पतालों में हैं. इस प्रकार से लगभग 5000 बेड खाली हैं. 

दिल्ली कोरोना ऐप: प्राइवेट अस्पतालों में आ रही है दिक्कत

दिल्ली सरकार ने इसी हफ्ते दिल्ली कोरोना ऐप लॉंच किया है. इल्ज़ाम है की ऐप पर बेड्स की जानकारी होने के बावजूद कुछ अस्पताल माना कर देते हैं की उनके यहा बेड्स नही हैं. इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा की उनकी सरकार ने ईमानदारी के साथ सारे अस्पतालों की जानकारी ऐप पर डाली है की किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं.

“ये जानकारी हम नही डाल रहे. ये अस्पताल वाले डालते हैं. कुछ अस्पताल बदमाशी कर रहे हैं जो बहुत से कारणों से अपने यहा कोरोना का इलाज नही करना चाहते. हम उन्हें मानने की कोशिश कर रहे हैं, अगर नही माने तो सख्ती की जाएगी. 2-3 दिन में हम इसका समाधान कर देंगे.”

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प्राइवेट अस्पतालों को 20% बेड कोरोना के मरीज़ों के लिए रिज़र्व करने के लिए कहा गया था. अरविंद केजरीवाल का कहना है की अस्पतालों को शुक्रवार तक का समय दिया गया है. जो इस बात को नही मानेंगे उनको 100% कोविद अस्पताल कर दिया जाएगा. उन्होने कहा की लॉकडाउन खुलने के बाद एक बार केस ज़रूर बढ़ेंगे. लेकिन दिल्ली सरकार 20,000 बेड्स की तैयारी कर रहे हैं 

घर पर रह रहे कोविद मरीज़ों को औक्सीमीटर देने की पहल

अरविंद केजरीवाल ने बताया की उनकी सरकार जिनको भी घर पर आइसोलेशन के लिए बोल रही हैं उनको अब औक्सीमीटर भी दिया जाएगा. “करोना में औक्सिजन की मात्रा कम हो जाती है, इससे साँस फूलने लगती है और कई बार लोगों की स्तिथि गंभीर हो जाती है. औक्सीमीटर से लोग हर घंटे अपना औक्सिजन लेवेल जाँच सकते हैं. अगर वो कम हो तो दिल्ली सरकार को फोन करें और हम आंब्युलेन्स भेज कर उन्हे अस्पताल ले जाने में मदद करेंगे.”

उन्होने दिल्ली वालो से अपील भी की. “करोना होते ही अस्पताल की तरफ ना भागें. अगर आपको मामूली लक्षण हैं तो घर पर रहें.” उन्होने बताया की दिल्ली कोरोना ऐप की लॉंच के बाद सिर्फ़ एक दिन के अंदर एक हज़ार मरीज़ों की बढ़ोतरी हुई अस्पतालों में. “ढाई महीने में 2500 मरीज़ थे, एक दिन में 3500 मरीज़ हो गये”

लॉकडाउन का फ़ैसला सही

मुख्यमंत्री केजरीवाल के मुताबिक शुरुआत में लॉकडाउन लगाना सही था. “उस वक़्त देश और राज्य सरकारें कोरोना से निपटने के लिए तैयार नही थी. कोरोना के बारे में कुछ नही पता था किसी को. दुनिया के देश इससे निपटने में सक्षम नही थे. उस समय अगर लॉकडाउन नही लगते तो देश में कोरोना बहुत तेज़ी से फैल जाता. उस समय ना पीपीई की किट थीं, ना टेस्टिंग किट थीं,”

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केंद्र से 5000 करोड़ रुपय की माँग 

आरोप है की केजरीवाल सरकार कहती है उनकी सरकार तो मुनाफ़े में थी तो अब केंद्र से मदद क्यों माँगी जा रही है? उन्होने बताया की दिल्ली सरकार अकेली सरकार है पूरे देश में जो पिछले पाँच साल से मुनाफ़े में चल रही है. “टॅक्स नही आ रहा सरकार के पास तो हमारे पास पैसे कहा से आएँगे? इसलिए हमने माँगी है केंद्र सरकार से मदद. शराब पर कर बढ़ा दिया है लेकिन और किसी पर नही बढ़ा सकते क्योंकि जीएसटी केंद्र सरकार तय करती है. अगर केंद्र सरकार नही मदद करती तो कुछ ना कुछ करेंगे लेकिन जनता को तकलीफ़ नही होने देंगे.”

आरोप ये भी है की विज्ञापन के पैसे हैं लेकिन सरकारी करंचारियों की तनख़्वाह के पैसे नही है. केजरीवाल ने कहा की पिछले दो महीने के सारे विज्ञापन उठा के देख लें, सभी विज्ञापन करोना के बारे में जागरूकता फैलने के लिए दिए जा रहे हैं. 

एकनामिक पॅकेज और सीधे पैसे ट्रान्स्फर

केजरीवाल के अनुसार एकनामिक पॅकेज और पैसे ट्रान्स्फर दोनो होना चाहिए था. “एकनामिक पॅकेज के तहत लोन देने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है लेकिन लोगों की जेब में अभी पैसा नही है खरीदने के लिए तो सीधे पैसे ट्रान्स्फर करने से लोग ख़रीदेंगे. मुझे लगता है दोनो चीज़ें ज़रूरी थी. बीस लाख करोड़ के पॅकेज में दस लाख करोड़ का कॅश ट्रान्स्फर कर सकते थे या 70.30 कर सकते थे. डिमांड और सप्लाइ दोनो की तरफ ध्यान देना चाहिए.”

Report- Srishti Jain (News18 India)