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Tuesday, November 29, 2022

योग से भागेंगे रोग, रहेंगे निरोग-ओम प्रकाश आर्य

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती।भारत स्वाभिमान एवं पतंजलि योग समिति बस्ती के तत्वावधान में जनता इण्टर कालेज भादी में चल रहे तीन दिवसीय योग विज्ञान का समापन वैदिक यज्ञ से हुआ। इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य जिला प्रभारी भारत स्वाभिमान समिति बस्ती ने कहा कि योग करने से रोग भागेंगे और हम निरोगी रहेंगे। योगाभ्यास जहाँ हमारे शरीर को सुंदरता व मजबूती प्रदान करता है वही प्राणायाम हमारे आन्तरिक अंगों को सबल बनाता है और सूक्ष्म शरीर को पोषित करता है। अपने उद्बोधन में उन्होंने साधको को शाकाहार का महत्व बताते हुए उसे अपनाने की सलाह दी और कहा कि जहाँ मन और इन्द्रियाँ रहती हैं उसे मंदिर कहते हैं इसे अशुद्ध आहार से दूषित नहीं करना चाहिए। शाकाहार और सात्विक विचार से रोग शरीर पर कोई संक्रमण नहीं कर पाते। हमें आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति अपनानी होगी तभी हम स्वस्थ रह सकेंगे।

इसके साथ ही उन्होंने सूर्य नमस्कार प्रतियोगिता में विजयी शिवा, देवेन्द्र, रामसुन्दर, अमर व अंशिका को शब्दकोश व वैदिक साहित्य देकर सम्मानित किया और विद्यालय के शिक्षकों संतोष कुमार, बृजेन्द्र वर्मा, विवेक मिश्रा और विशेष सहयोग के लिए सुधीर शुक्ल को वैदिक साहित्य भेटकर सम्मानित किया। शिविर के दौरान योग प्रशिक्षक डॉ प्रवेश कुमार व गरुण ध्वज पाण्डेय ने विद्यार्थियों को बीमारियों से बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि दूध में हल्दी मिलाकर लेने और किशमिश, गुग्गुल, गिलोय, चिरायता के साथ दालचीनी तथा छोटी इलाइची मिलाकर हवन करने से पूरा वातावरण वायरस से मुक्त हो जाता है। वाह्य प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए कहा कि त्रिबन्ध के साथ वाह्य प्राणायाम से शरीर की ऊर्जा उर्ध्वगामी होती है जिससे शरीर स्वस्थ होती है और आत्मा सबल। मूलबन्ध में अपनी मूलेन्द्रिय को ऊपर की ओर संकुचन करना होता है, उड्डीयान बन्ध में नाभि को पीछे की ओर खींचते हैं जबकि जालन्धर बन्ध लगाने के लिए अपनी ठोड़ी को कण्ठकूप से लगाते है। वाह्य प्राणायाम के लिए पूरा सांस बाहर निकालकर तीनों बन्धों को एक साथ लगाना होता है। इसको तीन से पाॅच बार प्रतिदिन करने से एकाग्रता बढ़ती है। अपच, गैस दूर होता ही है साथ ही पुरानी बवासीर भी ठीक हो जाती है। इस अवसर पर अष्टांग योग के तीसरे सोपान आसन पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस स्थिति में सुखपूर्वक, स्थिर होकर रुक सकते हैं उसे आसन कहते हैं। सह योग शिक्षक शिव श्याम व योग सहायक दीपक शुक्ल ने लोगों को विशेष रूप सुखासन, सिद्धासन, बज्रासन, मण्डूकासन एवं शशकासन का अभ्यास कराया। शांतिपाठ व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ

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