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Wednesday, May 18, 2022

Diwali 2021: द‍िवाली के पांच द‍िन कौन से हैं, देखें धनतेरस से भैया दूज तक का मुहूर्त और कैलेंडर

भारत

Diwali 2021 Date Calendar: हिंदी पंचांग के अनुसार दीपावली का पावन पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वों की माला भी कहा जाता है। पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल दीपावली और गोवर्धन पूजा तक सीमित नहीं रहता बल्कि महापर्व छठ पूजा तक चलता है। दीपावाली के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और धन धान्य की कमी नहीं होती। इस बार दीपावाली का पावन पर्व 4 नवंबर 2021, बृहस्पतिवार को है। ऐसे में इस लेख के माध्यम से आइए जानते हैं दीपावली के पहले व बाद में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहारों की तिथि और शुभ मुहूर्त।

Diwali 2021 Date in India, 2021 में कब है दीपावली

हिंदी पंचांग के अनुसार दीपावली का पावन पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है, जिसे दीपावली पूजन और लक्ष्मी गणेश पूजन के नाम से जाना जाता है। इस बार दीपावली का पावन पर्व 4 नवंबर 2021, बृहस्पतिवार को है। अमावस्या तिथि 4 नवंबर 2021, बृहस्पतिवार को 06 बजकर 03 मिनट से शुरु होकर 05 नवंबर 2021, शुक्रवार को 02 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। आइए जानते हैं दीपावली के पूरे पांच दिन का कैलेंडर।

Day 1 — Dhanteras: November 2, 2021 (Tuesday) Dwadashi, दीपावली 2021 का पहला दिन : धनतेरस 

दीपावली की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह 2 नवंबर 2021, मंगलवार को है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धनवंत्री की पूजा करने से घर में कभी धन धान्य की कमी नहीं होती। इस दिन पूजा का समय शाम 6:37 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक है।

दीपावली का पर्व आने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। वहीं इस बार दिवाली से पहले मनाया जाने वाला पर्व धनतेरस 2 नवंबर को है। कार्तिक मास के कृष्‍णपक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के त्‍योहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर, मां लक्ष्‍मी, धन्‍वतंरि और यमराज की पूजा की जाती है। धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की उदयव्यापिनी त्रयोदशी को मनाई जाती है। यहां उदयव्यापिनी त्रयोदशी से मतलब है कि, अगर त्रयोदशी तिथि सूर्य उदय के साथ शुरू होती है, तो धनतेरस मनाई जानी चाहिए।

धन तेरस के दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में यमराज को दीपदान भी किया जाता है। अगर दोनों दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल का स्पर्श करती है अथवा नहीं करती है तो दोनों स्थिति में दीपदान दूसरे दिन किया जाता है।

इस दिन सोने-चांदी और घर के बर्तनों की खरीदारी करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन की गई खरीदारी आपको बहुत लाभ पहुंचा सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर कुछ चीजें ऐसी है जिन्हें खरीदने पर मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती है और घर में धन की कोई कमी नहीं होती है। तो आइए जानते हैं धनतेरस पर क्या खरीदने से मां लक्ष्‍मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पीतल के बर्तन: जो लोग सोने-चांदी के सिक्के नहीं खरीद सकते वो लोग आज पीतल का कोई भी बर्तन खरीदें और उसमें कुछ मीठा या चावल के दाने डालकर लाइये। धनतेरस पर किसी चीज़ से भरा हुआ पीतल का बर्तन लाना बड़ा ही अच्छा माना जाता है। दरअसल इसके पीछे एक मान्यता छुपी हुई है। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान धन्वन्तरि का अवतरण हुआ था, तब वो अपने दो बायें हाथों में से एक में अमृत से भरा पीतल का कलश लिये हुए थे और उनके बाकी हाथों में शंख, चक्र और औषधी विद्यमान थी, लिहाजा इस दिन पीतल का बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ होता है।

झाड़ू: झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू को घर लाने से स्वयं मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। झाड़ू से हम अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और घर का सारी नकारात्‍मकता दूर करते हैं। यही कारण है कि झाड़ू का महत्व बेहद ही खास माना जाता है।

अक्षत: धनतेरस के दिन अक्षत यानी चावल को भी घर लाना चाहिए। शास्‍त्रों में बताया गया है कि अन्‍न में चावल यानी कि अक्षत को सबसे शुभ माना जाता है। अक्षत का मतलब होता है धन संपत्ति में अनंत वृद्धि। इसलिए धनतेरस के दिन अक्षत लाने से आपके धन में वृद्धि होती है।

सोने-चांदी के सिक्के: आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार मां लक्ष्मी की कृपा से अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिये और अपने बिजनेस में पैसों की आवाजाही को बढ़ाने के लिये धनतेरस को लक्ष्मी-गणेश जी का चित्र बना हुआ सोने या चांदी का सिक्का लाकर, उसे संभालकर अपने पास रखना चाहिए और दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के समय इसे लकड़ी के पाटे पर स्थापित करके इसकी विधि-पूर्वक पूजा करनी चाहिए और बाद में इसे अपने घर या ऑफिस की तिजोरी या मन्दिर में स्थापित करना चाहिए। इससे आपके घर और बिजनेस की आर्थिक स्थिति अच्छी होगी और आपको लाभ ही लाभ मिलेंग। मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश जी खरीदना भी बड़ा ही शुभ होता है।

धनिया: धनतेरस के दिन धनिया खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन धनिया लाकर मां लक्ष्मी को अर्पित करनी चाहिए और इसेमें से कुछ दाने गमले में भी बो देने चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसको बोने पर अगर धनिया के पौधे निकलते हैं तो पूरी साल आपके घर समृद्धि बनी रहती है।

धनतेरस पूजा 2021 शुभ मुहूर्त: 2 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक का है। वहीं वृषभ काल शाम 6.18 मिनट से रात 8.14 मिनट तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6.18 मिनट से रात 8.11मिनट तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6.18 मिनट से रात 8.11 मिनट तक रहेगा।

Day 2 — Choti Diwali: November 3, 2021 (Wednesday) Trayodashi, दीपावली का दूसरा दिन : छोटी द‍िवाली 

दीपावली के एक दिन पहले यानि 3 नवंबर 2021, बुधवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन शाम के समय दीप जलाकर अकाल मृत्यु की भय से मुक्ति व बेहतर स्वास्थ्य के लिए लोग यमराज की पूजा करते हैं।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (Kartik Month Chaturdashi Tithi) को नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi 2021) का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन यमराज की पूजा (Yamraj Puja) का विधान है. नरक चतुर्दशी को नरक चौदस (Narak Chaudas), रूप चतुर्दशी (Roop Chaturdashi) और छोटी दिवाली (Choti Diwali 2021) के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन हनुमान जी का जन्म (Hanuman Ji Janam) हुआ था इसलिए इसी दिन हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti ) भी मनाई जाती है. वाल्मीकि रचित रमायण के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मंगलवार के दिन हनुमान का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा (Hanuman Puja On Narak Chaturdashi) भी की जाती है. हनुमान जी को संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी के ये कुछ उपाय करने से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है. 

इस बार नरक चौदस 3 नवंबर, 2021 बुधवार की पड़ रही है. आइए जानते हैं नरक चौदस या छोटी दिवाली पर ये कुछ उपाय करने से आपके हर कष्ट और संकट से छुटकारा मिल जाएगा. 

नरक चौदस पर करें ये उपाय  (Narak Chaturdashi Remedy 2021)

1. अगर आपके जीवन में संकट और कष्ट समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा. और आप कई तरह के उपाय या कोशिशें कर के थक चुके हैं, तो नरक चौदस के दिन हनुमान बाबा का चोला चढ़ाना चाहिए. कहते हैं कि चोला बाबा को अति प्रिय है. हनुमान जी चोला चढ़ाने वाले भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं. अगर आप हनुमान का चोला चढ़ा रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि इस दौरान श्री राम के नाम का जाप करें. 

इसके अलावा, इस दिन हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं. साथ ही, एक नारियल को सिर से 7 बार वार कर हनुमान जी के चरणों में रख दें. ऐसा करने से आपके जीवन में कई तरह के बदलाव आएंगे. और धीरे-धीरे संकटों से मुक्ति मिलना शुरू हो जाएगी. 

2. अगर आप पैसों की तंगी से परेशान हैं तो छोटी दिवाली के दिन पीपल के 11 पत्तों पर श्री राम का नाम लिखें और उसकी माला बनाकर हनुमान जी को पहना दें. इसके साथ ही उनसे अपनी समस्या के समाधान की प्रार्थना करें. ऐसा करने से बाबा आपकी परेशानी जरूर दूर करेंगे. वहीं, अगर आप बिजनेस में मुनाफा चाहते हैं तो सिंदूरी रंग का लंगोट हनुमान जी को पहनाने से बिजनेस में फायदा होगा. 

3. अपने दुश्मनों का नाश करने और बुरे समय को खत्म करने के लिए नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी को गुलाब की माला पहनाएं. इसके बाद एक नारियल पर स्वस्तित बनाते हुए नारियल को हनुमान जी के चरणों में अर्पित करें. साथ ही, उन्हें पांच देसी घी की रोटी का भोग लगाने से बुरा समय जल्द खत्म हो जाएगा. और दुश्मनों से भी छुटकारा मिलेगा. 

4. कहते हैं कि हनुमान जी को विशेष पान का बीड़ा बहुत पसंद है. इसमें सभी मुलायम चीजें जैसे खोपरा बूरा, गुलकंद, बादाम कतरी आदि डलवाएं और उन्हें अर्पित करें. हनुमान भक्तों के सिर्फ भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं. ऐसे में भावपूर्वक उन्हें ये चीजें अर्पित करने से वे आपकी हर मनोकामना सुनेंगे और उसे दूर करेंगे.

Day 3 — Diwali and Lakshmi Puja: November 4, 2021 (Thursday) Amavasya, दीपावली 2021 की डेट 

इस बार दीपावली का पावन पर्व 4 नवंबर 2021, बृहस्पतिवार को है। इस दिन अमावस्या तिथि की शुरुआत 4 नवंबर 2021, बृहस्पतिवार को 06 बजकर 03 मिनट से होगी और 05 नवंबर 2021, शुक्रवार को 02 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।

Day 4 — Govardhan Puja: November 5, 2021 (Friday) Pratipada, दीपावली का चौथा दिन : गोवर्धन पूजा 

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पावन पर्व मनाया जाता है। इस बार गोवर्धन पूजा 5 नवंबर 2021, शुक्रवार को है।

Day 5 — Bhai Duj: November 6, 2021 (Saturday) Dwitiya, दीपावली का पांचवां दिन : भैया दूज 

दीपावली के दूसरे दिन भैयादूज का पर्व मनाया जाता है। इस बार भैयादूज का पावन पर्व 6 नवंबर 2021, शनिवार को है।

हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि (Kartik Month Dwitiya Tithi) को भैया दूज 2021 (Bhai Dooj 2021) का त्योहार मनाया जाता है. पांच दिवसीय दिवाली (Diwali 2021) के त्योहार का समापन भैया दूज के दिन होता है. गोवर्धन (Govardhan 2021) के अगले दिन भाई दूज पर्व मनाया जाता है. भैया दूज को यम द्वितीया (Yam Dwitiya) भी कहते हैं. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना के पूजन (Yamraj and Yamina Pujan) का विधान है. राखी के त्योहार की ही तरह इस दिन बहनें भाई के तिलक कर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं. इस दिन भाई बहनों से मिलने घर जाते हैं और तिलक करवाते हैं. बहनें तिलक करते समय उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं, तो वहीं भाई भी बहन को गिफ्ट देकर अपना प्यार जताते हैं. इस साल भाई दूज का त्योहार 6 नवंबर 2021 (Bhai Dooj 6 November 2021) को मनाया जाएगा. आइए जानते हैं इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त और पौरणिक कथा के बारे में. 


भैयादूज तिथि और शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj Tithi And Shubh Muhurat 2021)

भैयादूज पर्व का भी हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. भाई-बहन के प्यार का प्रतीक ये पर्व इस बार 6 नवंबर को मनाया जाएगा. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है. बता दें कि इस साल द्वितिया तिथि 05 नवंबर को रात्रि 11 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर, 06 नवंबर को शाम 07 बजकर 44 मिनट तक रहेगी. ऐसे में द्वितीया तिथि 06 नवंबर को मानी जाएगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भाई दूज के दिन भाईयों को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दिन में 01 बजकर 10 मिनट से लेकर 03 बजकर 21 मिनट बजे तक है. बहने भाइयों को इस शुभ मुहूर्त के बीच में तिलक कर लें तो शुभ होगा.

भाई दूज की पौराणिक कथा (Bhai Dooj Katha 2021)

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संध्या की संतान धर्मराज यम और यमुना थे. लेकिन भगवान सूर्य के तेज को सहन न कर पाने के कारण उनकी पत्नी संध्या देवी अपनी संतानों को छोड़ कर मायके चली गईं. और जाते समय अपनी प्रतिकृति छाया को भगवान सूर्य के पास छोड़ गईं. यमराज और यमुना छाया की संतान न होने के कारण मां के प्यार से वंचित रहते थे. मां का प्यार न सही लेकिन दोनों ही भाई बहन में आपस में खूब प्यार था. यमुना की शादी होने बाद वे भाई यम को कई बार अपने घर बुलाया करती थी, लेकिन वे नहीं जाते थे. एक बार काफी समय बाद धर्मराज यम बहन के लगातार बुलाने पर यम द्वितीया के दिन उनके घर पहुंचे. भाई के घर आने की खुशी में यमुना ने भाई का खूब सत्कार किया. उन्हें तिलक लगा कर पूजन किया. बस, उसी दिन से भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. 

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