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बस्ती जिले के डॉक्टर जो मात्र 10 रुपये की फ़ीस में सालों से मरीजों का करते आ रहे इलाज़

बस्ती जिले के डॉक्टर जो मात्र 10 रुपये की फ़ीस में सालों से मरीजों का करते आ रहे इलाज़
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डॉ. साहब क्षेत्र के लगभग 20 किलोमीटर परिधि के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे, एक समय में रुधौली के वैद्य जी का चिकित्सा केन्द्र ही यहाँ के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विशेष स्थान रहा है। पिता (वैद्य जी) 65 वर्षों तक लोगों की सेवा किए अब उनके चले जाने के बाद 20 सालों से मात्र 10 में ही उपचार व परामर्श देते चले आ रहे हैं डॉ. सत्यदेव मिश्र।

बस्ती। जिले के रुधौली क़स्बे में स्थित वैद्य जी का नाम कौन नही सुना होगा। आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाला शायद ही कोई ऐसा बुजुर्ग, महिला, बच्चा, नौजवान व्यक्ति हो जो अपने स्वस्थ्य मामले को लेकर उनसे कभी मिला न हो।

बस्ती बांसी मार्ग पर छोटे से रुधौली क़स्बे में स्थित “जनकल्याण चिकित्सा केन्द्र” पर मरीजों की भीड़ हमेशा देखने को मिल ही जाती है। डॉक्टर सत्यदेव मिश्र अपने पिता स्वर्गीय परमेश्वर दत्त मिश्र (वैद्य जी) की प्रेरणा से उनके ही द्वारा स्थापित चिकित्सा केन्द्र के माध्यम से क्षेत्र के लोगों की सेवा करते चले आ रहे हैं।

डाक्टर सत्यदेव मिश्र का जनकल्याण चिकित्सा केंद्र/ Photo- Basti Khabar
डाक्टर सत्यदेव मिश्र का जनकल्याण चिकित्सा केंद्र/ Photo- Basti Khabar

पिता स्व. परमेश्वर दत्त मिश्र को यहाँ लोग वैद्य जी के नाम से जानते थे। और यही नाम आज भी पूरे क्षेत्र में चर्चित है। वैद्य जी स्व. परमेश्वर दत्त मिश्र द्वारा सन 1935 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से AMS (आयुर्वेदाचार्य इन मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री पूरी करने के बाद इस क़स्बे में चिकित्सा केन्द्र की स्थापना किए। और वर्ष 2000 तक लगभग 65 वर्षों तक लोगों की सेवा करते रहे। वैद्य जी अधिकतर अपने हाथों द्वारा निर्मित जड़ी-बूटियों का ही प्रयोग करते थे, जो मरीजों के स्वास्थ्य में चमत्कार की तरह काम करता था। यहाँ पहले आज की अपेक्षा दूर-दराज में अस्पताल और सरकारी स्वस्थ्य केन्द्र की उपलब्धता अधिक नही थी जिससे वैद्य जी को दिखाने लोग काफी दूर – दूर से आते थे। वैद्य जी के कुल 4 बेटे थे, जिनमे तीसरे बेटे डॉक्टर सत्यदेव मिश्र जी आज भी अपने पिता द्वारा स्थापित चिकित्सा केन्द्र पर लोगों को बेहतर सेवाएँ व परामर्श देते हुये उपचार कर रहे हैं।

डॉक्टर सत्यदेव मिश्र एक बीमार बच्चे को देखते हुए/ Photo- Basti Khabar
डॉक्टर सत्यदेव मिश्र एक बीमार बच्चे को देखते हुए/ Photo- Basti Khabar

डॉक्टर सत्यदेव मिश्र बताते हैं कि, “जब मैं छोटा था तभी से पिता (वैद्य जी) के साथ स्वास्थ्य केन्द्र पर उनके साथ जड़ी बूटियों को बनाने, रोगों के लक्षणों को पहचानने और उपचार में दी जाने वाली दवाओं का अनुभव ले रहा था। और पिता जी की भी इच्छा थी कि हम चारों भाइयों में चिकित्सा केन्द्र का काम कोई सभाले”।

डॉ. सत्यदेव मिश्र के शैक्षिक योग्यता की बात करें तो प्रारम्भिक पढ़ाई के बाद सन 1980 में बीएचयू से बीएससी और सन 1988 में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज भागलपुर बिहार से बीएएमएस (बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) उत्तीर्ण कर पिता जी द्वारा स्थापित चिकित्सा केन्द्र पर लोगों की सेवा में लग गए।

डॉ. सत्यदेव मिश्र पिता की मृत्यु के बाद वर्ष 2000 से स्थायी रूप से इसी क़स्बे में मरीजों को स्वास्थ्य परामर्श और उपचार की सेवाएँ दे रहे हैं। डॉक्टर साहब बताते हैं कि; हमारे यहाँ अधिकांश मरीजों में छोटे बच्चों का इलाज़ कराने लोग अधिक आते हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों के इलाज हेतु आवश्यक परामर्श के लिए भी लोग यहाँ हर रोज आते हैं।

डॉ. सत्यदेव मिश्र के अनुसार उनके यहाँ मरीजों में रोज़ाना 100 से 120 मरीज इलाज़ कराने आते हैं। डॉ. साहब द्वारा बताए गए मरीजों की संख्या के अनुसार अनुमान लगाया जा सकता है कि यहाँ इलाज़ कराने आने वाले मरीजों की संख्या एक सामान्य सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आने वाले मरीजों की संख्या से कुछ कम नही।

डाक्टर सत्यदेव मिश्र के जनकल्याण चिकित्सा केंद्र पर मरीजों के साथ बैठे हुए लोग/ Photo- Basti Khabar
डाक्टर सत्यदेव मिश्र के जनकल्याण चिकित्सा केंद्र पर मरीजों के साथ बैठे हुए लोग/ Photo- Basti Khabar

मरीज क्या कहते हैं-

जनकल्याण चिकित्सा केन्द्र पर इलाज़ कराने आए आठ वर्षीय हानिया, पाँच महीने की अनीता, आठ वर्षीय एकता, एक वर्षीय सोमनाथ के परिजनों विशाल उपाध्याय, तारामती, शंकर जीत पाण्डेय ने बताया कि हम लोगों के यहाँ परिवार में किसी को कोई भी समस्या होती है तो सबसे पहले हम प्राथमिक उपचार के लिए यहीं वैद्य जी के यहाँ ही आते हैं। यहा डॉ. साहब द्वारा लिखी गयी दवाओं से हमारे बच्चे जल्द स्वस्थ्य हो जाते हैं। और स्वस्थ्य केन्द्र के पास ही निवास स्थान होने के कारण व सिरियस मामलों में डॉ. साहब कई बार रात्रि में ही उठकर दवा करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

ख़ास क्या है-

डॉ. सत्यदेव मिश्र बताते हैं कि पिताजी के देहावसान के बाद वर्ष 2000 से अब तक लगभग 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान यहाँ आने वाले मरीजों से मात्र 10 रुपये का ही फ़ीस लिया जाता रहा है। कई बार ऐसा भी हुआ है कि इलाज़ कराने कुछ ऐसे लोग भी हमारे यहाँ आए हैं जिनके पास फ़ीस देने तक के लिए रुपये नही थे उनका भी इलाज़ सभी मरीजों की तरह बिना भेद-भाव किया गया है।

देश में ऐसी कई परिस्थितियाँ आईं जिनमें बेरोजगारी, बदहाली लंबे समय तक पाँव जमाए रही, सरकारें बदली, महगाई आसमान छूने लगीं लेकिन डॉक्टर साहब की फ़ीस न बढ़ी न घटी। पिता (वैद्य जी) के उद्देश्यों को लेकर उनका मानना हैं की परिस्थिति चाहे कोई भी हो हम मरीजों की सेवा से कभी मुकर नही सकते। बीस वर्षों से फ़ीस केवल 10 रुपये ही इसलिए है, कि कोई भी मरीज चाहे वह गरीब हो या अमीर, असहाय हो या बेरोजगार, यहाँ आकर सरलता से अपने इलाज़ का परामर्श लेकर समुचित उपचार करा सके।

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