26.8 C
Uttar Pradesh
Monday, October 3, 2022

भ्रष्टाचार के मामले में जिला जेल में बंद पकरी छब्बर के पूर्व ग्राम प्रधान को नही मिली जमानत

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

अपराध की गंभीरता के आधार पर अदालत ने भ्रष्टाचार के दोषी पूर्व ग्राम प्रधान को जमानत देने से किया मना।

बस्ती। की एक अदालत ने मनरेगा के अंतर्गत कराए गए कार्यों में अनियमितता संबंधी दस वर्ष पुराने प्रकरण में जिला कारागार में निरुद्ध पूर्व ग्राम प्रधान श्रीराम को न्यायालय ने जमानत देने से मना कर दिया। मामला विकास खण्ड बहादुरपुर के ग्राम पंचायत पकड़ी छब्बर का है।

धन गबन के दस वर्ष पुराने प्रकरण में 1 सितंबर को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम अमित मिश्रा की अदालत ने विकास खण्ड  बहादुरपुर के ग्राम पंचायत पकड़ी छब्बर के पूर्व ग्राम प्रधान श्रीराम को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया था।

जमानत प्रार्थना पत्र में अभियुक्त की ओर से कहा गया कि वह पूरी तरह निर्दोष है और मामला गढ़ा गया है। प्रार्थी प्रधानी वर्ष 2005 के दौरान कभी भी सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं किया,न ही  गबन किया। प्रार्थी/आवेदक दाएं हाथ से विकलांग है। थाने की पुलिस ने 9 सितंबर को सुबह घर से पकड़कर थाने ले आई और दिन भर टॉर्चर करने के बाद शाम को चालान कर दिया।

पूर्व ग्राम प्रधान श्रीराम की ओर से 19 सितंबर को न्यायालय में दिए जमानत प्रार्थना पत्र को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, बस्ती मीनू शर्मा ने यह कह कर निरस्त कर दिया कि अपराध की प्रकृति तथा मामले की परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए मामले के गुण- दोष पर विचार किए बिना अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त को जमानत पर रिहा किए जाने के पर्याप्त आधार नहीं हैं।

साल 2012 में बस्ती जिले में बहादुरपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत पकड़ी छब्बर के पूर्व ग्राम प्रधान प्रधान श्रीराम व सचिव सुमन देवी ने मिलकर जल निकासी के लिए ह्यूम पाइप लगाने का कार्य कराया जिसमें 200mm पाइप लगाकर 300mm के पाइप का भुगतान ले लिया था । ग्राम वासियों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को दी तब शासन से प्रकरण की जांच कराई गई और शिकायत सही पाई गई थी।

शासन के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी बस्ती ने गबन के संपूर्ण धनराशि ₹1,39,000 का एक तिहाई भाग ग्राम प्रधान, एक तिहाई भाग सचिव व एक तिहाई भाग मनरेगा टेक्नीशियन बेचन प्रसाद को जमा करने का आदेश जारी किया। जिसमें तीनों आरोपियों ने अपने-अपने अपने हिस्से का धन राजकोष में जमा कर दिया था।

आपत्तिकर्ता व मुकदमे की पैरवी कर रहे जनहित संस्था के प्रबंधक कुंवर ब्रह्म देव उपाध्याय का कहना है कि न्यायालय ने पूर्व ग्राम प्रधान श्रीराम की जमानत अर्जी को खारिज कर भ्रष्टाचारियों के मनोबल को तोड़ने का काम किया है। यह सामाजिक रूप से बड़ा संदेश है।

Advertisement
- Advertisement -

सबसे अधिक पढ़ी गई

- Advertisement -

ताजा खबरें