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कोरोना वायरस की पहचान कैसे की जाती है?

कोरोना वायरस की पहचान कैसे की जाती है?
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कोरोना वायरस. चीन के वुहान शहर से निकला बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरस. जब ये स्टोरी लिखी जा रही है, तब तक 2019 नोवेल कोरोना वायरस –

17,300 से ज़्यादा लोगों तक पहुंच चुका है.
और इसने 360 से ज़्यादा लोगों की जान ले ली है.

30-31 जनवरी की दरमियानी रात WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है.

तमाम देश इसे अपने नागरिकों तक पहुंचने से रोकने में लगे हुए हैं. कई देशों ने चीनी नागरिकों की एंट्री पर रोक लगा दी है.

लाल धब्बा मतलब कोरोनावायरस के कन्फर्म केस मिले हैं. जितना बड़ा धब्बा, उतने ज़्यादा केस. (सोर्स - WHO)
लाल धब्बा मतलब कोरोनावायरस के कन्फर्म केस मिले हैं. जितना बड़ा धब्बा, उतने ज़्यादा केस. (सोर्स – WHO)

इंडिया में कोरोना वायरस का तीसरा केस सामने आ चुका है. इसी के साथ एयरपोर्ट्स पर सिक्योरिटी टाइट हो गई है. इंडिया ने चीन से आने वालों के लिए ई-वीज़ा की सुविधा फिलहाल के लिए रोक दी है. हर कोई जो चीन से 15 जनवरी के बाद भारत आया है, उसे अलग से टेस्ट किया जा रहा है. और इसे पहचानने के इंतज़ाम एयरपोर्ट पर ही हैं.

लेकिन इसे पहचाना कैसे जा रहा है? ये हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे.

दो-तीन लाइन में आपको बता दें कि एयरपोर्ट पर कोरोना वायरस जैसे लक्षणों की पहचान की जा रही है. इस पहचान में जो कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं भी हैं, वो भी धर लिए जाते हैं. और ऐसा भी हो सकता है कि जिन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण है, वो छूट जाएं. कोरोना वायरस की मुकम्मल टेस्टिंग लैब में ही संभव है.

ज़्यादातर वायरस मुंह और नाक से ही घुसते हैं, इसलिए मास्क लगाना ठीक है. (सोर्स - रॉयटर्स)
ज़्यादातर वायरस मुंह और नाक से ही घुसते हैं, इसलिए मास्क लगाना ठीक है. (सोर्स – रॉयटर्स)

अब डिटेल में समझते हैं. इसमें पहले बताई कई चीज़ें रिपीट होंगी. लेकिन सभी को बताने की खातिर सब बताना ज़रूरी है.

एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग

क्या है कि जब कोई भी वायरस हमारे शरीर के अंदर जाता है, तो युद्ध छिड़ जाता है. इन्हें बाहर निकालने के लिए नाक बहती है, छींक और खांसी आती है. कई बार बुखार यानी फीवर भी आता है. बुखार मतलब तापमान का बढ़ना. तापमान इसलिए बढ़ता है कि अगर कोई वायरस तापमान बढ़ने से मर सकता है तो मर जाए.

छींक, खांसी और बुखार कोरोना वायरस इनफेक्शन के शुरुआती लक्षण हैं. एयरपोर्ट पर इन्हीं चीज़ों को चेक किया जा रहा है. बुखार चेक करने के लिए थर्मल स्कैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है. थर्मल स्कैनर मतलब तापमान पता करने वाली मशीन.

जिस किसी का बॉडी टेम्प्रेचर नॉर्मल से ज़्यादा है, उसको किनारे में ले लिया जाता है.

थर्मल स्कैनिंग में इन्फ्रारेड वेब्स का इस्तेमाल होता है. (सोर्स - रॉयटर्स)
थर्मल स्कैनिंग में इन्फ्रारेड वेव्स का इस्तेमाल होता है. (सोर्स – रॉयटर्स)

लेकिन ये ज़रूरी नहीं है कि जिस किसी को भी किनारे किया गया है, उसे कोरोना वायरस इन्फेक्शन हो ही. बुखार बैक्टीरिया और वायरस दोनों के कारण हो सकता है. और वायरस में भी इन्फेक्शन कोरोना वायरस का हो ये ज़रूरी नहीं.

और ये भी ज़रूरी नहीं कि जिसे किनारे न लिया गया हो उसे कोरोना वायरस का इन्फेक्शन नहीं है. कोरोना वायरस इन्फेक्शन के बाद उसके लक्षण पैदा होने में 2 से 14 दिन का वक्त लग सकता है. अब मान लीजिए कि किसी को एक दिन पहले ही कोरोना वायरस इन्फेक्शन हुआ है. वो तो निकल जाएगा न एयरपोर्ट के सिक्योरिटी स्कैन से?

कोरोना वायरस इन्फेक्शन की पुष्टि करने के लिए लैब का सहारा लेना पड़ता है.

वायरसों की पढ़ाई को वायरोलॉजी कहते हैं. (सोर्स - विकिमीडिया)
वायरसों की पढ़ाई को वायरोलॉजी कहते हैं. (सोर्स – विकिमीडिया)

लैब में क्या देखते हैं?

सबसे पहले तो लैब के पास उस वायरस का जेनेटिक सीक्वेंस होना चाहिए. चीन के डॉक्टर्स ने 10 जनवरी को ये डिटेल्स सार्वजनिक कर दी थीं. WHO और CDC जैसी संस्थाओं ने जानकारी अपनी वेबसाइट पर डाल रखी हैं. तो ये पहली चीज़ तो सबके पास है.

अगली चीज़ जो चाहिए होगी, वो है – टेस्ट किट. जेनेटिक सीक्वेंस से वायरस की पहचान करने के लिए PCR Test बहुत पॉपुलर है. PCR मतलब पॉलीमरेस चेन रिएक्शन.

हम DNA और RNA के बारे में सुनते रहते हैं. ये किसी जीवित चीज़ की एक खास पहचान होते हैं. दरअसल ये न्यूक्लिक एसिड्स ही किसी जीव की बनावट तय करते हैं. इसलिए ये हर जीव के लिए अलग होते हैं. PCR Test में इसी चीज़ का फायदा उठाया जाता है. इस मेथड में उस वायरस के DNA या RNA के एक खास हिस्से को अलग कर लिया जाता है. वो हिस्सा जो उस वायरस की जमात को बाकियों से अलग बनाता है.

RNA मतलब राइबोन्यूक्लिक एसिड. DNA डीऑक्सी-राइबो-न्यूक्लिक एसिड. (सोर्स - विकिमीडिया)
RNA मतलब राइबोन्यूक्लिक एसिड. DNA डीऑक्सी-राइबो-न्यूक्लिक एसिड. (सोर्स – विकिमीडिया)

PCR मेथड में सैंपल के सहारे इस हिस्से की बहुत सारी कॉपीज़( नकल) तैयार की जाती हैं. और ये कॉपीज़ तभी तैयार होती हैं, जब सैंपल में वायरस मौजूद हो. जब बहुत सारी कॉपीज़ बनने लगती हैं, तब पक्का हो जाता है कि इसी वायरस का इन्फेक्शन हुआ है. ये नया, किफायती और तेज़ तरीका है.

अब तक क्या किया?

लेकिन हर किसी को पकड़ के लैब टेस्ट कराना तो मुश्किल है. इसलिए फिलहाल एयरपोर्ट पर जो थर्मल स्कैन वाला सिस्टम लगा है, वो बेस्ट है.

2 फरवरी को भारत सरकार ने ट्रैवल एडवाइज़री जारी की. इसके मुताबिक, 2 फरवरी तक 58,658 लोगों की स्क्रीनिंग की गई. इसमें से 142 लोगों में लक्षण समझ आए और इन्हें अलग कर लिया गया. इनमें से 130 सैंपल्स को टेस्ट किए गए, जिसमें से दो पॉज़िटिव केस निकले. ये 2 फरवरी का अपडेट है. 3 फरवरी को एक और पॉज़िटिव केस सामने आया है.

ये उस एड्वाइज़री का स्क्रीनशॉट है. इसी में ई-वीज़ा कैंसिल करने वाली बात भी लिखी है. (सोर्स - भारत सरकार)
ये उस एड्वाइज़री का स्क्रीनशॉट है. इसी में ई-वीज़ा कैंसिल करने वाली बात भी लिखी है. (सोर्स – भारत सरकार)

कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने में महीने भर से ज़्यादा का वक्त लग सकता है. इसलिए तब तक सावधानी बरतना ही बेस्ट है. अगर किसी में ज़ुकाम या निमोनिया जैसे लक्षण नज़र आते हैं, तो चेकअप कराने में बिलकुल न हिचकिचाएं. और आपके आसपास कोई चीन से लौटकर आया है, तो बिना किसी लक्षण के भी चेकअप करा सकते हैं. अंग्रज़ी में कहावत है – प्रिवेंशन इज़ बेटर देन क्योर.

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