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Monday, September 20, 2021

5 हजार वर्ष पहले ज्ञात सुनामी से बचने का तरीका

भारत

वर्ष 2004 में हिन्द महासागर में आए प्रलयकारी भूकंप के बाद आधुनिक विश्व ने प्रथम बार सुनामी को जाना और समझा। लेकिन करेंट साइंस जर्नल 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 5000 वर्ष पहले भारत में मौजूद हड़प्पा सभ्यता के लोग सुनामी को न सिर्फ जानते थे बल्कि इन विनाशकारी लहरों से बचने की कला में पारंगत भी थे। उन्होने समुद्र के बसे अपने शहर में चौड़ी दीवारें बना रखीं थी। यह रिपोर्ट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशिनोग्राफी (NIO) गोवा के शोधकर्ताओं ने जारी की है।

रिपोर्ट के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने अपने धौलावीरा शहर में 18 मीटर तक चौड़ी दीवारें बनाई हुयी थी। जहां यह शहर स्थित था, वह क्षेत्र अब गुजरात में है। इस दीवार के एक किले और शहर के ऊपरी व निचले में मौजूद होने के प्रमाण मिले हैं।

सुनामी के लिए दीवार

शोधकर्ताओं के अनुसार उस समय धौलावीरा के लोगों को इतनी चौड़ी दीवार की जरूरत न तो बाढ़ से बचने के लिए थी और न ही दुश्मनों से। क्योंकि उस समय इन दोनों ही खतरों का अस्तित्व नही था। जबकि धौलावीरा के उत्तर में मनसर और दक्षिण में मनहार नामक दो छोटी नहरें थी। यह कच्छ के कण की झील से भी घिरी है।

हड़प्पा सभ्यता

इसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहते हैं। अनुमान के अनुसार इसमें 50 लाख लोग बसे थे। इसके 8000 वर्ष पुराने होने का दावा भी है। यह मौजूदा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत में फैली थी। अनुमानित क्षेत्रफल 12.60 लाख वर्ग किमी था। इसे 1842 ई. में पहली बार ब्रिटिश खोजकर्ता चार्ल्स मेसन ने खोजा था।

सुनामी

26 दिसंबर, 2004 को हिन्द महासागर में भूकंप के बाद भारत समेत देशों को सुनामी ने अपने प्रभाव में लिया था। शोधकर्ताओं को वर्ष 2000 में पहले गुजरात के समुद्र तट पर 3.5 मीटर ऊंची सुनामी लहरों के टकराने के प्रमाण मिले हैं।

कारण- धौलावीरा कच्छ की खड़ी और अरब सागर के निकट था, इसलिए वहाँ समुद्र की छोटी सी भी हलचल का प्रभाव पड़ने का खतरा रहता था। इससे ऊंची लहरों की आशंका बनी रहती थी। अब धौलावीरा समुद्र से दूर है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार 4000 वर्ष पहले समुद्र जलस्तर मौजूदा जलस्तर से अधिक था। इसलिए धौलावीरा इसकी सीमा में था।

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