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Tuesday, October 4, 2022

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ में स्वतंत्रता के साथ अपनी संस्कृति के सोलह संस्कार अपनाए समाज

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती। आज पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है घर-घर तिरंगा ध्वज फहराया जा रहा है ग्राम, नगर और महानगरों में पर्वतों की चोटियों और मैदानों में भारतीय ध्वज तिरंगे को लेकर आबाल, वृद्ध नर- नारी भारत माता की जय, वंदे मातरम्, के उद्घोषों से आजादी की सुरक्षा की भावना को जगा रहे है। देश आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण कर रहा है, इसी कड़ी में आर्य समाज श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार कार्यक्रम के माध्यम से वैदिक विद्वानों द्वारा आमजनमानस  वेदज्ञान का अमृत वितरण किया जा रहा है।

दिनांक 11 अगस्त से चल रहे इस महोत्सव में वेदों का संदेश अति सरल भाषा में लोगों के बीच पहुँचाया जा रहा है। कार्यक्रम के पंचम दिवस का यज्ञ कार्यक्रम नई कालोनी बस्ती में दिलीप कसौधन के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ जिसमें सम्मिलित लोगों ने वेदमंत्रों से आहुतियाँ देते हुए सबके सुखी-निरोगी रहने की कामना कर रहे थे।

यज्ञाचार्य पंडित नेम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि नाव जब पानी में चलती है तो सागर को भी पार कर देती है पर जब नाव में पानी चलने लगता है तो वह अपने सवारियों को डुबो देती है। उसी प्रकार हमारा मन दुनिया में चलता है तो विभिन्न ज्ञान विज्ञान से जीवन को उन्नति मार्ग पर ले जाता है पर जब हमारे मन में दुनिया के वैभव की चाहत चलने लगती है तो स्वार्थप्रिय बनकर अपना अस्तित्व खो देते हैं। इसलिए मन का निग्रह करके ईश्वर की उपासना में लगाना सर्वथा उचित है।

आचार्य ओमव्रत ने बताया कि आज पूरी दुनिया एक स्वर से मान रही है कि विश्व की सबसे प्राचीन पुस्तक ऋग्वेद है तो निश्चय ही उसमे पायी जाने वाली विद्या भी सर्वग्राह्य रही होगी। इसी बात से वेदों की महत्ता पर कोई प्रश्न नहीं उठ सकता।  वेदों का काल आज तक निश्चित नहीं किया जा सका है अर्थात वेद अति प्राचीन हैं और उसमें उपस्थित ज्ञान भी अति प्राचीन और सबके लिए एक समान हैं। इसलिए वेद स्वतन्त्रता पूर्वक सबको अपनाना चाहिए।

इस अवसर पर राजेन्द्र जायसवाल कोषाध्यक्ष आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में स्वतंत्रता के साथ समाज को अपनी संस्कृति के सोलह संस्कार अपनाने चाहिए। आचार्य देवव्रत आर्य ने बताया कि दिनांक 16 फरवरी को नई कालोनी करूवा बाबा चौक बस्ती में श्रीमती अचला गिरोत्रा के नेतृत्व में सम्पन्न होगा।

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