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Latest Updates in India: भारत में खाद्यान्न की उपलब्धता और उसकी समस्याएं

फोटो: Ancilla Tilia/ Flickr
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फोटो: Ancilla Tilia/ Flickr

भारत में हर वर्ष जितना भोजन तैयार होता है, उसका एक तिहाई बर्बाद चला जाता है। बर्बाद जाने वाला भोजन इतना होता है कि उससे करोड़ों लोगों की खाने की जरूरत पूरी हो सकती है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में बढ़ती संपन्नता के साथ ही लोग खाने के प्रति असंवेदनशील हो रहे हैं। खर्च करने की क्षमता के साथ ही खाना फेंकने की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है। आज भी देश में विवाह स्थलों के पास रखे कूड़ा घरों में 40% से अधिक खाना फेंका हुआ मिलता है। अगर इस बर्बादी को रोका जा सके तो कई लोगों का पेट भरा जा सकता है।

विश्व खाद्य संगठन के प्रतिवेदन के अनुसार देश में हर साल पचार हजार करोड़ रुपए का भोजन बर्बाद चला जाता है, जो कि देश के उत्पादन का 40 फीसदी है। एक आकलन के मुताबिक बर्बाद होने वाले भोजन की धनराशि से 5 करोड़ बच्चों की जिंदगी सवारी जा सकती है।

भूख से मौत की खबर

वह भी भारत जैसे देश में, यह सुनने में कितना अटपटा लगता है। उस भारत में; जहां अरबों रुपए के सरकारी अनुदान पर खाद्य सुरक्षा की कई योजनाएं चल रही हैं; जहां मध्यान भोजन-योजना के तहत हर दिन 12 करोड़ बच्चों को दिन के भरपेट भोजन देने का दावा किया जाता है; जहां हर हाथ को काम व हर पेट को भोजन के नाम पर हर दिन सरकारी कोष से करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। भारत में हर साल 5 साल से कम उम्र के 10 लाख बच्चों के भूख या कुपोषण से मरने के आंकड़े संयुक्त राष्ट्र ने जारी किए हैं। देश के 51% परिवारों की आय का जरिया केवल अस्थाई मजदूरी है। 4 लाख से ज्यादा परिवार कूड़ाबीनकर, तो 6.68 लाख परिवार भीख मांगकर अपना गुजारा करते हैं।

गांव में रहने वाले 40% परिवारों की औसत मासिक आय दस हजार से भी कम है। हर दिन कई लाख लोगों के भूखे पेट सोने के गैरसरकारी आंकड़ों वाले भारत देश के ये आंकड़े भी विचारणीय है कि हमारे देश में हर साल उतना गेहूं बर्बाद होता है, जितनी आस्ट्रेलिया की कुल पैदावार है। नष्ट हुए गेहूं की कीमत लगभग 50 हजार करोड़ करोड़ रुपए होती है और इससे 30 करोड़ लोगों को साल भर भरपेट भोजन दिया जा सकता है।

हमारे देश में 2.1 करोड़ टन अनाज केवल इसलिए बर्बाद होता है; क्योंकि उसे रखने के लिए हमारे पास पर्याप्त भंडारण की सुविधा नहीं है। औसतन हर भारतीय 1 साल में 6 से 11 किलो अन्न बर्बाद करता है। साल में जितना सरकारी खरीद का धान व गेंहू खुले में पड़े होने के कारण नष्ट हो जाते हैं उससे ग्रामीण अंचलों में 5 हजार अन्न भंडारण भवन बनाए जा सकते हैं। बस जरूरत है तो एक सशक्त प्रयास करने की।

इस संदर्भ में विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट में खाद्यान्नों के अपव्यय से जुड़ी चुनौतियों का बारीकी से विश्लेषण किया गया है। संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य अपव्यय को रोके बिना खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है। इस रिपोर्ट में वैश्विक खाद्य-अपव्यय का अध्ययन पर्यावरणीय दृष्टिकोण से करते हुए बताया है कि भोजन के अपव्यय से जल, जमीन और जलवायु के साथ-साथ जैव-विविधता पर भी बेहद नकारात्मक असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक अपव्यय किए जाने वाले इस भोजन की वजह से 3 अरब टन से भी ज्यादा मात्रा में खतरनाक ग्रीन हाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं। रिपोर्ट बताती है कि हमारी लापरवाही और अनुचित गतिविधियों के कारण पैदा किए जाने वाले अनाज का एक-तिहाई हिस्सा बर्बाद कर दिया जाता है।

Basti Khabar

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Basti Khabar Pvt. Ltd. Desk


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