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राजकोषीय घाटा क्या है!

राजकोषीय घाटा क्या है!
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राजकोषीय घाटा: सरकारी बजट के घाटे की सबसे स्पष्ट तस्वीर राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) पेश करता है। पेंच यह है कि राजकोषीय घाटे का आकलन केवल ठोस प्राप्तियों के संदर्भ में किया जाता है, यानि उन्हें समान्यतः पूंजी प्राप्तियों में ही शुमार कर लिया जाता है। इस संदर्भ में व्यय के भी ठोस आंकड़े ही लिए जाते हैं। मसलन जब ऋण का जिक्र होगा तो उसमें से वापसी अदायगियों को घटा दिया जाएगा। इस तरह सरकार की ठोस प्राप्तियों (राजस्व और पूंजीगत) और ठोस व्यय (राजस्व व पूंजीगत) का अंतर राजकोषीय घाटे को जन्म देता है।

राजकोषीय घाटे की तुलना में राजस्व घाटा मात्र एक क्षेत्रीय घाटा ही दर्शाता है। जबकि समग्र घाटा आय व खर्च के अंतर की एक सकल (ग्रास) तस्वीर पेश करता है।

राजकोषीय घाटा विशुद्ध (नेट) अथवा समायोजित घाटा है। इन आंकड़ों के साथ-साथ बजट दस्तावेज़ में कुछ अन्य महत्वपूर्ण पत्र भी पेश किए जाते हैं। इनमें निष्पादन बजट जिसमें सभा, मंत्रालयों और विभागों के कार्य-कलापों व उपलब्धियों का लेखा-जोखा और मूल्यांकन किया जाता है।

सरकारी क्षेत्र में उद्यमों की रिपोर्ट, मंत्रालयों, विभागों के लिए अनुदान (ग्रांट) की मांगें आदि प्रमुख हैं। मगर सबसे अधिक उत्सुकता वित्त विधेयक की बाबत ही देखी जाती है, क्योकि उसी में नए करों आदि का ब्यौरा होता है। अखबारों की सुर्खियां वित्त विधेयक के कर प्रस्ताव को ही प्रतिबिम्बित करती हैं।

Basti Khabar

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Basti Khabar Pvt. Ltd. Desk


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