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Monday, September 20, 2021

अन्न महोत्सव में बार बालाओं के अश्लील डांस की खबर छापने वाले पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में उतरा पत्रकार संगठन

भारत

सरकार द्वारा चलाए जा रहे अन्न महोत्सव कार्यक्रम में आयोजकों द्वारा बार बालाओं के अश्लील डांस की खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में उतरा वेब मीडिया एसोसिएशन ऑफ इंडिया, राज्यपाल को संबोधित सौंपा ज्ञापन।

यूपी के संतकबीरनगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के बरगदवा गांव में भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं कोटेदार ने भीड़ जुटाने के लिये बाल बालाओं को बुलाया था। कार्यक्रम के दौरान बार बालाओं ने अश्लील डांस किये, इस अश्लील डांस का विडियो तेजी से सोशलमीडिया पर वायरल होते ही लोग फब्तियां कसते देखे गये।

इस पूरे मामले में शासन व सत्ता के गठजोड़ से मीडियाकर्मियों को दबाने के प्रयास के खिलाफ नाराज पत्रकारों ने वेब मीडिया एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बैनर तले राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।

विडियो को अपने टिवीटर अकाउंट के माध्यम से शेयर कर हुए कई विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी भाजपा सरकार को घेरा। और इसे निंदनीय बताते हुए अन्न और गरीबी का मज़ाक बनाने वाला कृत्य बताया।

सरकारी कार्यक्रम में इस प्रकार के अश्लील डांस से जनता में गलत संदेश गया। कुछ पत्रकारों ने पूरी निष्पक्षता और जिम्मेदारी से ये खबर प्रकाशित की जिससे भविष्य में ऐसे आयोजनों पर रोक लगे। लेकिन खबर से नाराज स्थानीय भाजपा नेताओं ने पुलिस को तहरीर देकर तीन पत्रकारों समेत 8 के खिलाफ धनघटा थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया। पुलिस ने बगैर किसी साक्ष्य या पड़ताल के आनन फानन में मुकदमा भी दर्ज कर लिया।

तहरीर में लिखा गया कि अन्न महोत्सव का कार्यक्रम खत्म होने के बाद पत्रकारों ने कूटरचित बैनर लगाकर खुद बार बालाओं का डांस करवाया और वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। जो सुनने में ही कितना हास्यास्पद है।

ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने अवगत कराया कि, इसी तरह सच को झूठ में बदलकर मीडिया को टारगेट किया जा रहा है। प्रदेश में नेताओं और पुलिस के गठजोड़ से ऐसे कृत्यों को अंजाम दिया जा रहा है जिससे सच्चाई जनता के सामने न आये और मनमानियां बखूबी जारी रहें।

बगैर साक्ष्य के पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज किये जाने के लिये पुलिस को रोका जाना चाहिये। प्रशासन और मीडिया का समन्वय बना रहना कितना जरूरी है यह बताने की जरूरत नही है लेकिन यह सच है कि ऐसे मामले होते रहे हैं। और ऐसे ही फर्जी मुकदमों से पत्रकारों को हतोत्साहित किया जाता रहा तो प्रशासन और मीडिया का समन्वय कल्पना मात्र रह जायेगा।

ज्ञापन में के माध्यम से पत्रकार संगठन ने मांग की है कि-

1- पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाये, जो पक्ष दोषी हो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाये।

2- पत्रकारों के खिलाफ बगैर साक्ष्य या जांच के मनगढ़न्त मुकदमों के दर्ज किये जाने पर रोक लगाई जाये।

3- पत्रकारों पर कथित भाजपा नेता द्वारा लगाया गया आरोप गलत साबित हो तो फर्जी मुकदमा दर्ज करने के लिये सम्बन्धित पुलिस अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाये।

4- उपरोक्त मामले में दर्ज मनगढ़न्त मुकदमा वापस नही हुआ तो प्रदेशभर में इसके खिलाफ आन्दोलन व धरना प्रदर्शन को पत्रकार बाध्य होंगे।

5- संभव हो तो कृत कार्यवाही से संगठन को भी अवगत कराया जाये।

ज्ञापन सौंपते समय वेब मीडिया एसोसियेशन के संयोजक अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार संदीप गोयल, राजकुमार पाण्डेय, अरूणेश श्रीवास्तव, दिनेश कुमार पाण्डेय, दिलीप पाण्डेय, अनिल श्रीवास्तव, राकेश त्रिपाठी, राजेश पाण्डेय, कपीश मिश्रा, बजरंग प्रसाद शुक्ल, राजप्रकाश आदि मौजूद रहे।

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