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Monday, September 20, 2021

कोणार्क सूर्य मंदिर

भारत

कोणार्क का सूर्य मंदिर: ओडिशा के सागर तट पर स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर ऐसा हो एक महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प है जो ‘सन-टेम्पल’ नाम से प्रसिद्ध है।

कोणार्क मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में गंगवंशीय कलिंग राजा नरसिंह देव वर्मन –I ने करवाया था। स्थापत्य का यह नमूना 1200 शिल्पकारों के कला कौशल से 12 वर्ष में बनकर तैयार हुआ था। इस मंदिर का स्थापत्यकार सदशिव सामन्तराय था। कोणार्क का अर्थ ‘एंगल ऑफ सन’ है।

मंदिर निर्माण में एक विशेषता है कि सूर्य की किरणें दिनभर विभिन्न कोणों से मंदिर के गर्भ गृह में स्थित सूर्य प्रतिमा को स्पर्श करती थी। इसलिए इसका नाम कोणार्क पड़ा। यह मंदिर रथ के आकार का है जिसमें 12 विशालकाय पहिए हैं और रथ को 7 घोड़े खींच रहे हैं। काले पत्थरों को काटकर बनाए गए मानव व पशुओं की आकृतियाँ सजीव है। नृत्य करती अप्सराओं की अनेक मूर्तियाँ श्रृंगार रस से युक्त हैं।

बंगाल की खाड़ी के समुंद्री मार्ग से जाने वाले यूरोपीय जहाजियों को भी यह विशाल मंदिर आकर्षित करता था। उन्होने इसे ‘ब्लैक पैगोडा’ नाम दिया था क्योंकि इसमें काले पत्थरों का उपयोग किया गया है।

वर्ल्ड हैरीटेज साइट

यूनेस्को द्वारा इसे ‘वर्ल्ड हैरीटेज साइट’ का दर्जा 1984 ई. को दिया गया। 

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