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Latest Uttar Pradesh: अनुसूचित व्यक्ति भी बिना अनुमति के नहीं खरीद सकता अनुसूचित जाति की जमीन

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अनुसूचित जाति के भूमिधर की जमीन खरीदने से पहले नियमानुसार अनुमति लेना अनिवार्य है। भले ही जमीन खरीदने वाला स्वयं अनुसूचित जाति का सदस्य क्यों ना हो।

अदालत ने इस मामले में याची के गरीब होने और कानून की जानकारी ना होने पर इक्विटी का लाभ देने से भी इनकार कर दिया। अनुसूचित जाति के रामलाल की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने दिया। याची रामलाल ने अपने गांव में अनुसूचित जाति के व्यक्ति से उसकी दो कृषि भूमि खरीदी थी। बेचने वाले को यह जमीन ग्रामसभा से आवंटित की गई थी, जिस पर उसे स्थानांतरणीय भूमधरी का अधिकार प्राप्त था। याची की सेल डीड यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि उसने जमीदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 157 ए के तहत अनुसूचित जाति की भूमि खरीदने से पूर्व आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। उसकी सेल डीड खारिज कर जमीन राज्य सरकार में समाहित कर ली गई।

इसके खिलाफ एसडीएम वित्त और कमिश्नर ने उसकी अर्जी तथा अपील खारिज कर दी, इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याची के अधिवक्ता की दलील थी कि याची स्वयं अनुसूचित जाति का है इसलिए अनुसूचित जाति के व्यक्ति को दूसरे अनुसूचित जाति की जमीन खरीदने के लिए पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं है।

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