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Saturday, September 18, 2021

बसपा शासन में 1400 करोड़ स्मारक घोटाले में दो पूर्व मंत्रियों पर कसेगा कानून का शिकंजा

भारत

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डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बसपा शासन के 1400 करोड़ स्मारक घोटाले में बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी को विजिलेंस भेजेगी नोटिस, जल्द हो सकती है पूछताछ.

1400 crore memorial scam in BSP regime 01
1400 crore memorial scam in BSP regime 01

लखनऊ। बसपा सरकार में हुए 1400 करोड़ रुपए के स्मारक घोटाले में तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर शिकंजा कसने की तैयारी विजिलेंस ने कर ली है।

पिछले महीने से अब तक हुई 4 अधिकारियों और दो पट्टाधारकों की गिरफ्तारी के बाद मिले साक्ष्य के आधार पर विजिलेंस दोनों पूर्व मंत्रियों को बयान दर्ज करवाने के लिए नोटिस भेजने वाली है।

मामले में एक जनवरी 2014 को दर्ज हुए मुकदमें में दोनों पूर्व मंत्री आरोपी बनाए गए थे। मामले की सुनवाई एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही है।

भाजपा सरकार बनने के बाद से सुस्त पड़ी स्मारक घोटाले की जांच विजिलेंस ने अचानक तेज कर दी है। घोटाले में शामिल छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चार अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। दो पट्टाधारकों को इसी 28 जून को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। विजिलेंस ने इन आरोपियों से कई ऐसे अहम साक्ष्य जुटा लिए हैं, जो तत्कालीन मंत्रियों से पूछताछ का आधार बन रहे हैं।

ADG विजिलेंस पीवी रामाशास्त्री का कहना है कि जांच में जिनके खिलाफ साक्ष्य मिल रहे हैं उन्हें बयान के लिए नोटिस दिया जा रहा है। करीब 20 अधिकारियों सहित 40 लोगों को नोटिस भेजा जा चुका है। कुछ और महत्वपूर्ण लोगों को जल्द ही बयान के लिए बुलाया जाएगा।

नसीमुद्दीन सिद्दकी के आवास पर होती ​थी ​मीटिंग

विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक स्मारक निर्माण के लिए निर्माण निमग द्वारा कराए जा रहे कामों की समीक्षा तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी करते थे। उच्चाधिकारियों की बैठक भी नसीमुद्दीन के आवास पर ही होती थी। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग भी यही करते थे। इसी तरह बाबू सिंह कुशवाहा के आवास पर भी उच्चाधिकारियों की बैठक होती थी।

अधिकारियों को मिलता था राजनैतिक संरक्षण

विजिलेंस की जांच में सामने आया कि स्मारक घोटाले में शामिल अफसरों को राजनैतिक संरक्षण मिलता था। इसमें सबसे अहम तत्कालीन संयुक्त निदेश खनन एसए फारुकी थे, जिनके खिलाफ विजिलेंस ने करीब छह महीने पहले ही चार्जशीट दाखिल की थी। फारुकी 31 दिसंबर 2008 को रिटायर हो गए थे। इसके बाद उन्हें निदेशालय में सलाहकार बना दिया गया था। 26 अप्रैल 2011 तक वह सलाहकार के पद पर रहे। मामले में विजिलेंस ने पिछले महीने वित्तीय परामर्शदाता विमलकांत मुद्गल, महाप्रबंधक तकनीकी एसके त्यागी, महाप्रबंधक सोडिक कृष्ण कुमार और इकाई प्रभारी कामेश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 28 जून को मिर्जापुर के पत्थर खदानों के पट्टाधारक किशोरीलाल और रमेश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

सोने के भाव खरीदे गए थे मिर्जापुर की खदान के गुलाबी पत्थर

मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों से तराशा गया पार्क और उसमें हुई नक्काशियां।
मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों से तराशा गया पार्क और उसमें हुई नक्काशियां।

विजिलेंस की जांच में सामाने आया कि, 9 जुलाई 2007 को तत्कालीन खनन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने मीरजापुर सैंड स्टोन के गुलाबी पत्थरों को स्मारकों में लगाने के लिए निर्देश दिए थे। इसके बाद 18 जुलाई को इनके रेट तय करने के लिए गठित क्रय समिति की बैठक हुई थी। इसमे यूपी राजकीय निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्रा, एके सक्सेना, इकाई प्रभारी केआर सिंह और सहायक स्थानिक अभियंता राजीव गर्ग शामिल थे। कमेटी ने मिर्जापुर सैंड स्टोन के ब्लॉक खरीदने किए जाने के लिए कंसोटियम बनाकर 150 रुपए प्रति घन फुट रेट तय किया। इसमे लोडिंग के लिए बीस रुपये प्रति घन फुट और जोड़कर सप्लाई के रेट तय कर दिए थे। इन दरों के अलावा रॉयल्टी और ट्रेड टैक्स का अतिरिक्त भुगतान किया गया था। जबकि उस समय इन पत्थरों का बाजार भाव 50 से 80 रुपये घन फुट से ज्यादा नहीं था।

बैठक में शामिल अधिकारियों ने लगाई थी रेट पर मुहर

स्मारक में लगाई गईं करोड़ों रुपये के हाथियों की प्रतिमाएं।
स्मारक में लगाई गईं करोड़ों रुपये के हाथियों की प्रतिमाएं।

विजिलेंस की अब तक की जांच में सामने आया कि गुलाबी पत्थरों के दर को निर्धारण करने के लिए 28 फरवरी 2009 को बैठक हुई थी। इसमें निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक एसपी गुप्ता, पीके जैन, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी, राकेश चंद्रा, मुकेश कुमार, एके सक्सेना, हीरालाल, एसके चौबे के अलावा इकाई प्रभारी एसपी सिंह, एसके शुक्ला और मुरली मनोहर मौजूद थे। मंडलायुक्त लखनऊ के स्तर पर दरों के निर्धारण के लिए निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी पीपी सिंह कमेटी में शामिल थे।

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