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पुलवामा हमले में शहीद मानेश्वर के परिवार ने कहा- एक साल बाद भी हमें न्याय का इंतजार

पुलवामा हमले में शहीद मानेश्वर के परिवार ने कहा- एक साल बाद भी हमें न्याय का इंतजार
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14 फरवरी, 2019. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला हुआ. सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए. कई जवान घायल हुए. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. सालभर हो गए इस हमले को. जांच अभी भी जारी है. इस बरसी पर ‘इंडिया टुडे’ ने हमले में शहीद मानेश्वर बासुमतारी के परिवार वालों से बातचीत की है.

मानेश्वर असम के बक्सा जिले के रहने वाले थे. मानेश्वर एक जून 1971 को पैदा हुए थे. कालीबाड़ी गांव में. यह गांव बक्सा जिले के तमुलपुर क्षेत्र में पड़ता है. बक्सा, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल का हिस्सा है. मानेश्वर ने 1994 में CRPF जॉइन किया था. चार फरवरी, 2019 को एक महीने की छुट्टी के बाद घर से निकलते वक्त मानेश्वर ने पत्नी सन्मति से कहा था कि वह घर के नज़दीक पोस्टिंग पाने की कोशिश करेंगे.

Maneswar Basumutary
शहीद मानेश्वर (फोटो: इंडिया टुडे)

पुलवामा हमले के बाद सन्मति ने कहा था-

जब वह जम्मू से श्रीनगर के लिए निकले थे, उसी वक्त आख़िरी बातचीत हुई थी. हम अक्सर जम्मू-कश्मीर में काम करने के खतरों को लेकर बात करते थे. वे जल्दी रिटायरमेंट ले सकते थे, लेकिन उन्होंने कहा कि यह सही नहीं होगा, क्योंकि हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं.

शहीद की पत्नी सन्मति ने ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत करते हए कहा, ‘एक साल हो गया है, लेकिन हमलावरों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. हम न्याय चाहते हैं. हमलावरों को सजा मिलनी चाहिए.’

सरकार की ओर से मिली सहायता को लेकर सन्मति ने बताया-

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हमारे घर का दौरा किया था और हमें 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी थी. राज्य सरकार ने पर्यटन विभाग में मेरी बेटी डीडमश्री को सरकारी नौकरी दी. इसके अलावा, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के प्रमुख हाग्रामा महिलरी ने हमें पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी थी. कई अन्य संगठनों और गैर सरकारी संगठनों ने भी हमारी मदद की थी.

Maneswar Basumutary Familiy
मानेश्वर बेटा धनंजय और उनकी पत्नी सन्मति (फोटो: इंडिया टुडे)

मानेश्वर के बेटे धनंजय पढ़ाई करते हैं. बीए सेकेंड सेमेस्टर में हैं. धनंजय बताते हैं-

साल बीत गया है, लेकिन सरकार हमलावरों का पता नहीं लगा सकी है. शहीद परिवार के लोग इससे बहुत दुखी हैं. सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए. मुझे सैन्य सेवा में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा है, लेकिन मेरी मां अकेली हो जाएंगी. CRPF अथॉरिटी ने मुझे पिता के पोस्ट पर जॉइन करने को कहा था. रिलायंस फाउंडेशन ने मुझे मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्ति दी है.

मानेश्वर के परिवार वालों की सरकार से अपील है कि हमलावरों के खिलाफ जल्द कड़ी कारवाई की जाए.

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