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Wednesday, August 17, 2022

कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला हुआ जारी

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद गाजीपुर सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों ने किसान जिंदाबाद के नारे लगाए।ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों ने घर जाने की तैयारी शुरू की। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया गुरु पर्व का तोहफा,प्रधानमंत्री मोदी का किया धन्यवाद।

देश में लंबे समय से चल रहे तीन विवादित कृषि कानूनों के वापसी के लिए किसानों के देशव्यापी आंदोलन को आज बड़ी सफलता मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुरु नानक जी के प्रकाश पर्व पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए किसानों से माफी मांगा और तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है।

कृषि कानून वापसी पर मायावती

कृषि कानूनों की वापसी पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि, किसानों का बलिदान आखिरकार रंग लाया है। उन्होंने कहा कि सर्दी, गर्मी और बरसात की मार झेलते हुए आंदोलन पर डटे किसानों की यह जीत हुई है। मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन विवादित कानूनों को अति देर से वापस लेने की घोषणा की जबकि यही फैसला बहुत पहले ले लेना चाहिए था। केंद्र सरकार यदि ये फैसला काफी पहले ले लेती तो देश अनेकों प्रकार के झगड़ों, झंझट आदि से बच जाता। लेकिन अभी भी किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य देने संबंधी राष्ट्रीय कानून बनाने की खास मांग भी इनकी अधूरी पड़ी है। 

गैर जरूरी विवाद से देश को व राज्यों को बचाना चाहिए

बीएसपी की मांग है कि केंद्र सरकार आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कानून बनाकर किसानों की इस मांग को भी जरूर स्वीकार करें। इतना ही नहीं बल्कि बीएसपी की शुरू से यह मांग रही है कि, खासकर खेती किसानी व किसानों के मामले में कोई भी नया कानून बनाने से पहले उनसे सलाह व परामर्श आदि जरूर करना चाहिए ताकि किसी भी गैर जरूरी विवाद से देश को व राज्यों को बचाया जा सके।

किसानों ने अपने संघर्ष के जरिए इस जीत को हासिल किया

बसपा सुप्रीमो आगे कहती हैं, एक बार फिर से देश के किसानों को उनके संघर्ष के जरिए इस जीत को हासिल करने के लिए उन्हें में तहे दिल से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देती हूँ, लेकिन आज मैं खासतौर से केंद्र की सरकार से यह भी कहना चाहूंगी कि किसानों के इस आंदोलन के दौरान जो किसान शहीद हो गए हैं उनके परिवार को उचित आर्थिक मदद दें और उनके परिवार में से किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दें, यह हमारी पार्टी की केंद्र सरकार से मांग है।

आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व किसान नेता राकेश टिकैत ने पीएम मोदी के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें।”

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