राम मंदिर ट्रस्ट का नेतृत्व करेंगे बाबरी मामले के आरोपी न्यास अध्यक्ष और वीएचपी उपाध्यक्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर के पक्ष में निर्णय देने व मंदिर निर्माण के लिए न्यास के गठन के आदेश पर पांच फरवरी को केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का ऐलान किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या में 66.7 एकड़ जमीन पर मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए गठित समिति का नेतृत्व करेंगे.

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने बुधवार को पहली बैठक की और राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास को अध्यक्ष और वीएचपी के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव नियुक्त किया.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या में 66.7 एकड़ जमीन पर मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए गठित समिति का नेतृत्व करेंगे. भवन निर्माण समिति मुख्य रूप से रामजन्मभूमि के लिये बनने वाले मंदिर से संबंधित प्रशासनिक विषयों के समाधान और कार्रवाई के समुचित निष्पादन का कार्य करेगा.

एक ट्रस्टी ने बताया कि नृपेन्द्र मिश्र भवन निर्माण समिति की बैठक करके निर्माण कार्य संबंधी कार्य योजना प्रस्तुत करेंगे.

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत द्वारा राम मंदिर के पक्ष में निर्णय देने व मंदिर निर्माण के लिए न्यास के गठन के आदेश पर पांच फरवरी को केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का ऐलान किया था.

दास और राय सीबीआई द्वारा नामित उन लोगों में शामिल हैं, जो 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से संबंधित आपराधिक षड्यंत्र के मामले में आरोपी थे. वे जमानत पर बाहर हैं और लखनऊ की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है.

15 सदस्यीय ट्रस्ट ने पुणे के गोविंददेव गिरी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया और अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक के साथ एक बैंक खाता खोलने का फैसला किया. यह 15 सदस्यीय ट्रस्ट दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में स्थित वरिष्ठ वकील और ट्रस्ट के संस्थापक के. परासरण के घर पर स्थित दफ्तर से काम कर रहा है.

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चंपत राय ने बताया, ‘उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा में बचत बैंक खाता खोला जाए और ट्रस्ट के लिये बैंक लाकर को भी उसी बैंक में सुनिश्चित किया जाए.’

उक्त बचत बैंक खाता में कुल तीन व्यक्ति अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होंगे जिनमें चंपत राय, गोविंददेव गिरि और डा. अनिल कुमार मिश्रा शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि अयोध्या में एक उचित एवं सुरक्षित स्थान खोजा जायेगा जहां पर ट्रस्ट का स्थायी कार्यालय होगा. यह दायित्व दो न्यासी विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र और डा. अनिल मिश्र को दिया गया है और दोनों अयोध्या के निवासी हैं.

बैठक में विहिप द्वारा तैयार किए गए एक मॉडल के अनुसार मंदिर का निर्माण करने का निर्णय लिया गया.

मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने की तिथि के बारे में पूछे जाने पर स्वामी गोविंददेव गिरि ने बताया कि नृपेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया है जो विशेषज्ञों एवं अन्य लोगों से विचार विमर्श करके यह तय करेगी कि निर्माण कार्य कब से शुरू किया जाए?

सूत्रों ने हालांकि बताया कि एक विचार यह आया था कि दो अप्रैल को रामनवमी को मुहूर्त कार्य किया जाए.

सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट की अगली बैठक 15 दिनों बाद अयोध्या में हो सकती है.

बैठक में नौ प्रस्ताव पारित किये गए. इस बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर अतिरिक्त सचिव गृह विभाग ज्ञानेश कुमार शामिल हुए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आईएएस अवनीश अवस्थी तथा अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा उपस्थित थे.

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बैठक में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में दिल्ली की फर्म वी शंकर अय्यर एंड कंपनी को स्वीकार किया गया.

बैठक में तब तीखी नोक-झोंक भी हुई जब महंत धरम दास बिन बुलाए पहुंच गए और उन्हें ट्रस्ट में शामिल नहीं किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी.

जब से सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद के लिए हिंदू पक्षकारों के पक्ष में फैसला सुनाया गया था तब से अटकलें लगाई जा रही थीं कि दास और राय को मंदिर निर्माण में भूमिका दी जाएगी. जब सरकार ने ट्रस्ट की घोषणा की तो दोनों को शामिल नहीं किया गया था.

सूत्रों ने कहा कि सरकार एक मामले में गंभीर आरोपों का सामना करने वाले व्यक्तियों को नामित करके विवाद शुरू नहीं करना चाहती थी. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि उन्हें शामिल करने का फैसला ट्रस्ट द्वारा लिया गया था.

वहीं, दास की अध्यक्षता वाले न्यास ने पहले ही राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के साथ विलय कर लिया है और अपनी सभी परिसंपत्तियों (मंदिर के लिए नक्काशीदार खंभे और अयोध्या आंदोलन के दौरान एकत्रित धन सहित) को नए ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया है. सूत्रों ने कहा कि जिस दिन नया ट्रस्ट पंजीकृत किया गया था, उस दिन इस विलय की औपचारिकता पूरी कर ली गई थी.

बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर सभी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया . इसमें एक अन्य प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार की सजग भूमिका के लिये धन्यवाद दिया गया . इसमें रामभक्तों के प्रति आभार प्रकट किया गया है.

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न्यास का प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण को बनाया गया था. इसके अन्य सदस्य हैं जगदगुरु शंकराचार्य, ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज (इलाहाबाद), जगदगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज (उडुपी के पेजावर मठ से), युगपुरुष परमानंद जी महाराज (हरिद्वार), स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज (पुणे) और विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (अयोध्या) शामिल हैं.

मालूम हो कि नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि जमीन विवाद पर अपना फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज करते हुए हिंदू पक्ष को जमीन देने को कहा.

एक सदी से अधिक पुराने इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामजन्मभूमि न्यास को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक़ मिलेगा. वहीं, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को अयोध्या में ही पांच एकड़ ज़मीन दी जाएगी.

मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाना होगा और इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा का एक सदस्य शामिल होगा. न्यायालय ने कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपेंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)