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Tuesday, October 4, 2022

सच्चे प्रेम का प्रतीक है श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता: शिवबली चौबे

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती कांवरिया संघ चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित  श्रीमद्भागवत कथा का समापन

बस्ती। प्रभु सम्बन्ध अभियान के तहत बस्ती कांवरिया संघ चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा होटल बालाजी प्रकाश में आयोजित श्रीमद्भागवत के समापन अवसर श्रीकृष्ण-सुदामा के मित्रता की कथा सुनाई। कथावाचक ब्रह्मचारी शिवबली चौबे जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम का प्रतीक का प्रतीक है। मित्रता में समपर्ण का भाव सुदामा जैसे होना चाहिए।

महाराज जी ने बताया कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता बहुत प्रचलित है। सुदामा गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा, “हम भले ही भूखे रहें, लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए न ?” इतना बोलते-बोलते उसकी आँखों में आँसू आ गए। सुदामा को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा, “क्या कर सकते हैं ? किसी के पास माँगने थोड़े ही जा सकते है।” पत्नी ने सुदामा से कहा, “आप कई बार कृष्ण की बात करते हो। आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हो। वे तो द्वारका के राजा हैं। वहाँ क्यों नहीं जाते ? जाइए न ! वहाँ कुछ भी माँगना नहीं पड़ेगा !”

सुदामा को पत्नी की बात सही लगी। सुदामा ने द्वारका जाने का तय किया। पत्नी से कहा, “ठीक है, मैं कृष्ण के पास जाऊँगा। लेकिन उसके बच्चों के लिए क्या लेकर जाऊँ ?”सुदामा की पत्नी पड़ोस में से पोहे ले आई। उसे फटे हुए कपडे में बांधकर उसकी पोटली बनाई। सुदामा उस पोटली को लेकर द्वारका जाने के लिए निकल पड़े।

महाराज जी ने बताया कि बाद में दोनों खाना खाने बैठे। सोने की थाली में अच्छा भोजन परोसा गया। सुदामा का दिल भर आया। उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है। सुदामा वहाँ दो दिन रहे। वे कृष्ण के पास कुछ माँग नहीं सके। तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले। कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने गए। घर जाते हुए सुदामा को विचार आया, “घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए ? तो क्या जवाब दूँगा ?” सुदामा घर पहुँचे। वहाँ उन्हें अपनी झोपड़ी नज़र ही नहीं आई ! उतने में ही एक सुंदर घर में से उनकी पत्नी बाहर आई। उसने सुंदर कपड़े पहने थे। पत्नी ने सुदामा से कहा, “देखा कृष्ण का प्रताप ! हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुःख दूर कर दिए।” सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। उनकी आँखों में खूशी के आँसू आ गए।

कथा के समापन अवसर पर श्रोताओं में प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के आयोजक सुनील गुप्ता व संजय द्विवेदी ने आगन्तुक श्रोताओं व सहयोग करने वाले भक्तों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की लगातार कबरेज के लिए पत्रकार बंधुओ को धन्यवाद दिया।

इस दौरान सुनील गुप्ता, संजय द्विवेदी, विवेक गिरोत्रा, देवेंद्र श्रीवास्तव, भवानी प्रसाद शुक्ला, राजाराम गुप्ता, अयोध्या प्रसाद साहू, गौरव साहू, नागेंद्र सिंह सन्तराम,सुजाता गिरोत्रा, नीतू अरोरा, शशि द्विवेदी, पूनम साहू, हरिमोहन सरार्फ, अरविंद चौधरी,  अदालत प्रसाद, अनिल कसौधन, संतीश सोनकर, विजय गुप्ता, परशुराम चौधरी, रविन्द्र कश्यप, संजू गुप्ता, हरि चौधरी, राधेश्याम मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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