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यूपी/सिद्धार्थनगर: गन्ना मूल्य भुगतान में विलम्ब के कारण गन्ने की खेती से बिमुख हो रहे किसान

विलंब भुगतान, वाजिब दाम व तौल पर्ची बनी किसान की समस्या।

गन्ने की खेती/ फोटो साभार- द इकोनॉमिक टाइम्स
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गन्ने की खेती/ फोटो साभार- द इकोनॉमिक टाइम्स

सिद्धार्थनगर/डिडई। जिस देश में 'उत्तम खेती मध्यम बान, निषिद्ध चाकरी भीख निदान' जैसा दोहा प्रचलित हो, वहां की खेती-किसानी घाटे का सौदा बन जाए तो इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। देश में खेती की बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि, मिट्टी की उर्वरा शक्ति में ह्रास, पानी की किल्लत के चलते खेती घाटे का सौदा तो बन ही चुकी है। वहीं गन्ना मिलों की मनमानी के चलते क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान भी खासे परेशान हैं। गन्ना मिल द्वारा मूल्य भुगतान में देरी किसानों के परेशानी का मुख्य कारण है।और यही कारण है कि क्षेत्र के अधिकांश किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 315₹ प्रति कुंतल बिकने वाले गन्ने को 200₹ प्रति कुंटल प्राइवेट क्रेसरों (गन्ना पेरने की मशीन )पर बेंच रहे हैं।

नगदी फसल के रुप मे प्रसिद्ध गन्ने की खेती क्षेत्र के किसानों के बीच काफी अरसे तक लोकप्रिय रही, वहीं तमाम बदलावों व विसंगतियों के चलते चीनी का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र के किसानों का गन्ने की खेती से तो मोहभंग होता ही जा रहा था। और रही सही कसर सरकार द्वारा गन्ना मूल्य वृद्धि हेतु लिए गए फ़ैसले ने पूरी कर दी। क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान केवलबान चौधरी का कहना है कि,- भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश सरकार की कमान सम्हालने के बाद पहली बार कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य में प्रति कुंतल मात्र 35 रूपये, की गई अल्प वृद्धि से किसान निराश ही हुए थे। सरकार द्वारा तीन बर्ष का कार्यकाल पूरा कर लेने के बाद आज तक दोबारा गन्ना किसानों की याद नहीं आई। जिससे किसानों के मन में गन्ने की खेती के प्रति निराशा के भाव ही जगे हैं।

पूर्व में गन्ना की बहुतायत खेती करने वाले किसान राम सुरेश चौधरी, निक्का प्रसाद, पतिराम, संतराम, रामकेवल आदि का कहना है कि विपक्ष में रहने पर किसानों के हिमायती होने का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी जो स्वयं किसान यूनियनों द्वारा पूर्व से ही ₹450 प्रति कुंतल गन्ना मूल्य की मांग की पक्षधर थी। सरकार में आने के बाद उसी भाजपा सरकार से गन्ना किसानों को इतनी अल्प मूल्य वृध्दि की उम्मीद कतई नहीं थी।

प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल में गन्ना खरीद का यह तीसरा सत्र चल रहा है। प्रतिवर्ष खेती की लागत बढ़ रही है, परंतु सरकार द्वारा दोबारा गन्ने के मूल्य वृद्धि पर विचार न किया जाना आश्चर्य में डालने वाला है। लोगों का कहना है की सरकार द्वारा धान गेहूं आदि फसलों में प्रतिवर्ष मूल वृद्धि का किया जाना तो सराहनीय है। परंतु विगत वर्षों में गन्ना मूल्य में वृद्धि न किया जाना गन्ना उत्पादकों के हितों पर कुठाराघात के समान है।

किसानों की मानें तो गन्ना मूल्य भुगतान में बलरामपुर जिले में स्थित चीनी मिल नंबर एक पर है। परन्तु रुधौली स्थित बजाज चीनी मिल के ऊपर बस्ती व सिद्धार्थनगर के किसानों का करोड़ों रुपयों का बीते सत्र का बकाया है। जो सरकार के काफी दबाव के बाद भी पूरा नहीं किया गया। क्षेत्र के सरैनिया निवासी छठिराम, शेषराम, घिसियावन, राम निहाल,केवला देबी, सभापति, ओमप्रकाश, वीरेन्द्र, सुरेमन, सीताराम, राम चरन आदि किसानों ने बताया कि हम लोगों का बीते वर्ष का हजारों रुपयों का बकाया धनराशि अभी तक नही मिल पाया है। जिससे ऊब कर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए गन्ने की अपनी उपज प्राइवेट कोल्हू चालको (गुड व्यवसियों) के हाथ 210₹ प्रति कुंतल बेचने पर मजबूर है।

लोगों ने मिल द्वारा गन्ना तौल पर्ची का मैसेज किसानों के मोबाइल पर ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत दिए जाने की बात को ठीक बताते हुए कहा कि यदि कतिपय कारणों से किसान मिल द्वारा निर्धारित समयावधि 72 घंटे के अंदर गन्ना क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचा पा रहा है तो मिल को चाहिए कि वह किसानों को अनावश्यक भागदौड़ से बचाने के लिए तौल पर्ची को कम से कम समय में स्वत: अपडेट कर दे। ताकि किसान का छीलकर तैयार किया गया गन्ना सूखने से बचाया जा सके।

किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी व जिला गन्ना विकास समिति बस्ती, जिला गन्ना अधिकारी व गन्ना विकास समिति सिद्धार्थनगर का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बजाज चीनी मिल द्वारा विगत सत्र के गन्ना मूल्य का अविलंब भुगतान कराने व तौल पर्ची हायल होने की दशा में स्वत: पर्ची को अपडेट कराने की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग सहित गन्ना तैयार करने में लेबर समस्या के दृष्टिगत तौल पर्ची के मैसेज व गन्ना को क्रय केंद्र पर पहुंचाने के समयावधि अंतराल को भी बढ़ाने की भी मांग किया है।

मंजू सिंह जिला गन्ना अधिकारी सिद्धार्थनगर/ फोटो- राम नरेश चौधरी

जिला गन्ना अधिकारी सिद्धार्थनगर मंजू सिंह के अनुसार,- जिला गन्ना विकास समिति बढ़नी सिद्धार्थनगर के जिन किसानों ने अपने गन्ने की सप्लाई तुलसीपुर स्थित शुगर फैक्ट्री को किया था उन किसानों का फैक्ट्री के ऊपर विगत वर्ष का कोई बकाया शेष नहीं है। परन्तु बढ़नी गन्ना विकास समिति के जिन किसानों ने अपना गन्ना बस्ती जिले के अठदमा (रूधौली) स्थित बजाज शुगर फैक्ट्री को बेंचा था। इन किसानों का अभी भी बजाज शुगर फैक्ट्री के ऊपर 4 करोड़ 3 लाख 62 हजार रुपया बकाया पड़ा है।

रंजीत कुमार निराला सचिव गन्ना विकास समिति बस्ती/ फोटो- राम नरेश चौधरी

किसानों के विगत वर्ष के गन्ना मूल्य बकाया के बाबत पूछने पर गन्ना विकास समिति बस्ती के सचिव रंजीत कुमार निराला ने बताया कि,- गन्ना किसानों का बजाज शुगर फैक्ट्री अठदमा के जिम्मे गन्ना किसानों का कुल 47 करोड़ 11 लाख 27000 रुपया बकाया था। जिसमें से चीनी मिल द्वारा अभी तक 22 करोड़ 97 लाख 46000 रुपयों का भुगतान किया जा चुका है। परंतु अभी भी फैक्ट्री के ऊपर किसानों का 24 करोड़ 13 लाख ₹81000 बकाया भुगतान करना शेष है।










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Ram Naresh Chaudhary

Ram Naresh Chaudhary

Basti Khabar, Special correspondent from Kesharaha Siddharthnagar


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