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शेयर मार्केट हुआ धड़ाम, निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये डूबे

शेयर मार्केट हुआ धड़ाम, निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये डूबे
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दुनियाभर के शेयर मार्केट में 28 फरवरी को कोरोना वायरस के डर से भारी गिरावट देखने को मिली. भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स में लगातार छठे दिन गिरावट हुई. 28 फरवरी को सेंसेक्स सुबह 658 अंकों की गिरावट के साथ 39087.47 खुला. कुछ ही देर में यह गिरावट 1000 अंक से ऊपर चली गई. वही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)का निफ्टी भी 251 अंक की गिरावट के साथ 11382 खुला. यह गिरावट 300 अंक से ज्यादा तक गई. 27 फरवरी को सेंसेक्स 143 अंक गिरकर 39745.66 अंक पर बंद हुआ था. निफ्टी 45 अंक की गिरावट के साथ 11633.30 पर बंद हुआ.

निवेशकों के चार लाख करोड़ डूबे

गिरावट से सेंसेक्स के सभी शेयर लाल निशान से नीचे चले गए. सबसे ज्यादा गिरावट टेक महिंद्रा और टाटा स्टील में देखने को मिली. बाजार गिरने से मार्केट कैपिटलाइजेशन में चार लाख करोड़ की कमी आई. यानी निवेशकों के चार लाख करोड़ रुपये डूब गए. नवंबर 2016 के बाद शेयर बाजार में यह सबसे बड़ी गिरावट है. पिछले छह दिन में शेयर बाजार में निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं.

सेंसेक्स में लगातार छठे दिन गिरावट देखने को मिली. (File Photo)
सेंसेक्स में लगातार छठे दिन गिरावट देखने को मिली. (File Photo)

अमेरिका के डाउ जोन्स में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर मार्केट पर दुनियाभर के बाजारों में गिरावट का असर पड़ा. चीन, जापान, दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी नुकसान हुआ. अमेरिकी बाजार भी नुकसान से बच नहीं पाया. 27 फरवरी को अमेरिका के डाउ जोंस में 1191अंकों की गिरावट हुई. यह डाउ जोन्स के इतिहास की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है. दुनियाभर के बाजारों में साल 2008 की मंदी के बाद से सबसे बुरा हाल नजर आ रहा है.

गिरावट की वजह

कोरोना वायरस अब चीन के बाहर भी फैल रहा है. यूरोप और एशिया के कई देश इसकी चपेट में आ चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 10 से ज्यादा देश अपने यहां कोरोनावायरस के मामलों की रिपोर्ट कर चुके हैं. इनमें नाइजीरिया भी शामिल है. नाइजीरिया अफ्रीकी महाद्वीप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

इस वजह से निवेशकों में हड़बड़ी है और वे बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. निवेशक अब गोल्ड और बॉन्ड जैसे दूसरे साधनों में पैसा लगा रहे हैं. अमेरिका का मार्केट भी 2008 के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया.

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