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Monday, September 20, 2021

अलौकिक साहित्य

भारत

अलौकिक साहित्य के अंतर्गत विभिन्न ऐतिहासिक तथा अर्ध ऐतिहासिक ग्रन्थों का अध्ययन किया जाता है। ऐसे साहित्य को धर्मोत्तर साहित्य कहते हैं।

अर्थशास्त्र: अर्थशास्त्र की रचना चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री विष्णुगुप्त (चाणक्य व कौटिल्य) ने की थी। अर्थशास्त्र को भारत का प्रथम राजनैतिक ग्रंथ माना जाता है। अर्थशास्त्र में मौर्यकालीन समाज, राजनीतिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था का विवरण प्राप्त होता है।

अष्टाध्यायी: अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसके रचयिता पाणिनी हैं। पाणिनी का समयकाल 400 ई.पू. के आसपास माना जाता है। इस ग्रंथ से पूर्व मौर्यकालीन भारत की राजनैतिक दशा पर प्रकाश पड़ता है।

वार्तिक: वार्तिक संस्कृत व्याकरण का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है। इस ग्रंथ के रचयिता कात्यायन हैं। कात्यायन का समयकाल 300 ई.पू. के आसपास माना जाता है। वर्तिका ग्रंथ से मौर्यकालीन भारत की राजनैतिक दशा का वर्णन प्राप्त होता है।

महाभाष्य: महाभाष्य पाणिनी के अष्टाध्यायी पर एक विशालकाय टीका है। इस ग्रंथ के रचयिता पतंजलि हैं। इनका समयकाल 150 ई.पू. के आसपास (द्वितीय शताब्दी ई.पू.) माना जाता है। पतंजलि शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित थे। इस ग्रंथ से आरंभिक शुंगकालीन शासकों के समकालीन राजनैतिक घटनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है।

मालविकाग्नमित्राम: मालविकाग्नमित्राम कालिदास द्वारा रचित प्रथम शताब्दी ई.पू. का नाट्य ग्रंथ प्रारम्भिक शुंग राजाओं के विषय में महत्वपूर्ण ज्ञान देता है। कुछ विद्वान कालीदास का समय गुप्तकाल मानते हैं। परंतु स्व. क्षेत्रेश चन्द्र चट्टोपाध्याय तथा स्व. एन.एम.घोष जैसे विद्वान उनका समय प्रथम शताब्दी ई.पू. मानते हैं।

दिव्यावदान, ललित विस्तार, महावस्तु: दिव्यावदान, ललित विस्तार और महावस्तु संस्कृत भाषा में लिखित बौद्ध ग्रंथ है। इस बौद्ध ग्रन्थों से मौर्य तथा शाक्य राजवंशों के परम्पराओं पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है।

दीपवंश, महावंश: दीपवंश और महावंश पालि भाषा में लिखित सिंहलीय बौद्ध ग्रंथ है। इन बौद्ध ग्रन्थों से भी मौर्यकालीन व शाक्यकालीन परम्पराओं का विवरण मिलता है।

बुद्धरचित: बुद्धरचित कनिष्क के दरबारी कवि अश्वघोष द्वारा प्रथम शताब्दी ई.पू. में रचित ग्रंथ है। इस ग्रंथ की भाषा संस्कृत है। यह ग्रंथ गौतम बुद्ध के विविध चरित्रों का वर्णन प्रस्तुत करता है।

मुद्रा राक्षस: मुद्राराक्षस विशाखदत्त द्वारा रचित ऐतिहासिक नाट्य है। इस ग्रंथ की रचना 500 ई. के आसपास हुई। इस ग्रंथ के माध्यम से नन्द राजाओं तथा चन्द्रगुप्त मौर्य से संबन्धित इतिहास पर प्रकाश पड़ता है।

 मृच्छकटिकम: मृच्छकटिकम महाकवि शूद्रक द्वारा रचित ग्रंथ है। मृच्छ्कटिकम में गुप्तकालीन भारत का वर्णन प्राप्त होता है।

 रत्नावली, प्रियदर्शिका नागानंद: रत्नावली और प्रियदर्शिका नागानंद सम्राट हर्षवर्धन (606-648 ई.) द्वारा प्रणीत ये नाट्य कृतियाँ 7वीं शताब्दी के इतिहास पर रोचक प्रकाश डालती हैं। इन ग्रन्थों की रचना 7वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हुई थी।

 हर्षचरित: हर्षचरित सम्राट हर्षवर्धन के राजकवि बाणभट्ट द्वारा रचित ग्रंथ है। इस ग्रंथ से हर्षकालीन भारत के इतिहास पर प्रकाश पड़ता है।

 विक्रमांकदेवचरित: विक्रमांकदेवचरित कवि विल्हड़ द्वारा 11वीं शताब्दी में रचित ग्रंथ है। इस ग्रंथ के माध्यम से कल्याणी के चालुक्यवंशी नरेश विक्रमादित्य-VI के संदर्भ में जानकारी प्राप्त होती है।

 नवसाहसांक चरितम: नवसाहसांक चरितम पद्मगुप्त द्वारा 11वीं शताब्दी में रचित ग्रंथ है। संस्कृत साहित्य का यह प्रथम ऐतिहासिक महाकाव्य है। इस ग्रंथ से परमार शासक सिंधुराज नवसाहसांक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त होती है।

 राजतरंगगिणी: ऐतिहासिक ग्रन्थों में राजतरंगगिणी को सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस ग्रंथ के माध्यम से आदिकाल से लेकर 1151 ई. तक के कश्मीरी राजाओं का इतिहास प्राप्त होता है। इस ऐतिहासिक ग्रंथ के रचयिता कल्हण हैं। जिन्होने 12वीं शताब्दी में इस ग्रंथ की रचना की थी। संस्कृत भाषा में रचित ऐतिहासिक घटनाओं का प्रथम क्रमबद्ध विवरण राजतरंगगिणी में ही प्राप्त होता है।

 कुमारपाल चरित: कुमारपाल चरित हेमचंद्र द्वारा प्राकृत भाषा में रचित ऐतिहासिक ग्रंथ है। इस ग्रंथ के माध्यम से चालुक्य वंश के शासकों के संदर्भ में जानकारी प्राप्त होती है।

 प्रबंध चिंतामणि: प्रबंध चिंतामणि मेरु-तुंगा चार्य द्वारा रचित (1305 ई.) ग्रंथ है। प्रबंध चिंतामणि की गणना एक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ के रूप में की जाती है।

 वसंत विलास: वसंत विलास महाकवि बालचन्द्र द्वारा रचित ग्रंथ है। इस ग्रंथ में चालुक्य शासकों के संदर्भ में जानकारी प्राप्त होती है।

 किर्ति कौमुदी: किर्ति कौमुदी सोमेश्वर द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इस ग्रंथ के माध्यम से चालुक्य वंशीय इतिहास के संदर्भ में जानकारी प्राप्त होती है।

 पृथ्वीराज विजय: पृथ्वीराज विजय प्रारम्भिक 12वीं शताब्दी मे रचित ऐतिहासिक ग्रंथ है जिसकी रचना एक कश्मीरी पंडित जयनक ने की थी।

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