CAG रिपोर्ट बताती है, सियाचिन में तैनात जवानों को ज़रूरत भर खाना-कपड़ा भी नहीं मिला

 CAG रिपोर्ट बताती है, सियाचिन में तैनात जवानों को ज़रूरत भर खाना-कपड़ा भी नहीं मिला

CAG रिपोर्ट बताती है, सियाचिन में तैनात जवानों को ज़रूरत भर खाना-कपड़ा भी नहीं मिला – Basti Khabar

सियाचिन. दुनिया के सबसे मुश्किल सरहदों में से एक. जहां सेना बेहद मुश्किल हालात में देश की रक्षा के लिए मुस्तैद रहती है. इसी सेना और इसके साजो-सामान से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें बताया गया है कि इस बर्फ़ीली सरहद की रक्षा करते हुए भारतीय सेना को कपड़ों, जूतों, स्लीपिंग बैग और अन्य कई तरह की कमियों का सामना करना पड़ा.

जवानों को पर्याप्त मात्र में कैलोरी भी नहीं मिली. बर्फ़ में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल सन ग्लासेज़ भी जवानों को पर्याप्त संख्या में नहीं मिले.

ये कहा है भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी Comptroller and Auditor General of India (CAG) ने अपनी एक रिपोर्ट में. CAG की ये रिपोर्ट सोमवार, 3 फरवरी को संसद में पेश हुई. इस रिपोर्ट में सियाचीन की सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए जूतों कपड़ों समेत कई तरह के सामान की किल्लत की बात कही गई है. CAG ने ये भी बताया कि रक्षा मंत्रालय ने 2019 में इस अभाव के लिए बजट की कमी और जवानों की बढ़ती ज़रूरतों का हवाला दिया था. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017 में जवानों के लिए साजो-सामान की जरूरत में भारी बढ़ोतरी देखी गई. इस वजह से सेना मुख्यालय में सामान की कमी हो गई. हालांकि रक्षा मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में इस कमी को पूरा किया जाएगा.

सियाचीन में जवानों को 9 हज़ार फ़ीट की उंचाई पर लगातार चौकस रहना पड़ता है और ये दुनिया की सबसे चुनौती भरी पोस्टिंग होती है
सियाचिन में जवानों को 9 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर लगातार चौकस रहना पड़ता है और ये दुनिया की सबसे चुनौती भरी पोस्टिंग होती है

# राशन की कमी

कैग ने 9000 फीट ऊंचे स्थान पर रहने के लिए दिए जाने वाले विशेष राशन और आवास की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है. लेह लद्दाख और सियाचिन में रहने वाले जवानों को कैलोरी की कमी पूरा करने के लिए विशेष खाना दिया जाता है. कैग के मुताबिक, उन्हें बहुत सावधानी से राशन का इस्तेमाल करना पड़ा.

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CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष खाने के बदले दिया जाने वाला सब्स्टीट्यूट भी जवानों को नहीं मिला. इस कमी की वजह से जवानों को कई बार 82 परसेंट तक कम कैलोरी मिली. लेह की एक घटना का जिक्र करते हुए कैग ने कहा है कि यहां से स्पेशल राशन को सैनिकों के लिए जारी हुआ दिखा दिया गया, लेकिन उन्हें हकीकत में ये सामान मिला ही नहीं था.

सियाचीन जैसी जगह पर ड्यूटी करते जवानों के लिए हर एक चीज़ बहुत महत्वपूर्ण होती है, चाहे वो मास्क हो या चश्मा. क्योंकि इस पर जवानों का जीवन निर्भर करता है
सियाचिन जैसी जगह पर ड्यूटी करते जवानों के लिए हर एक चीज़ बहुत महत्वपूर्ण होती है, चाहे वो मास्क हो या चश्मा, क्योंकि इस पर जवानों का जीवन निर्भर करता है

# न तो नया फ़ेस मास्क, न नया जैकेट

रक्षा सामानों की खरीद में खामियों के बारे में CAG ने कहा कि पुराना फेस मास्क, पुराने जैकेट और स्लीपिंग बैग को खरीदा गया. इससे जवानों को परेशानी हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा रिसर्च के अभाव की वजह से देश को इन सामानों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ा.

# स्नो बूट रिसाइकल करने पड़े

कैग की रिपोर्ट को सोमवार को संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर, 2015 से लेकर सितंबर, 2016 तक जवानों को जूता नहीं दिया गया. इस वजह से जवानों को पुराने जूतों को ही रिसाइकल कर के काम चलाना पड़ा. कैग की रिपोर्ट में साफ़ लिखा है कि सामानों की खरीद में कमी, पुरानी चीजों की सप्लाई या फिर पूरी तरह से सप्लाई बंद होने की वजह से ऊंचे स्थानों पर तैनात जवानों की सेहत प्रभावित हुई.

रक्षा मंत्रालय की सफाई को मानने से इंकार कर दिया है CAG ने. CAG का कहना है कि दुर्गम इलाके में जवानों को तय सप्लाई मिलनी ही चाहिए थी
रक्षा मंत्रालय की सफाई को मानने से इनकार कर दिया है CAG ने. CAG का कहना है कि दुर्गम इलाके में जवानों को तय सप्लाई मिलनी ही चाहिए थी

सियाचीन में डटे रहने के लिए जवानों को चाहिए होते हैं स्नो ग्लासेज़. ये एक ख़ास तरह का चश्मा होता है. इसके न होने से बर्फ़ से टकराकर आने वाली सूरज की रोशनी आंखों को अंधा कर सकती है. लेकिन जवानों को इन सन ग्लासेज़ की कमी से भी जूझना पड़ा. कैग ने स्नो गॉगल्स की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी कमी 62 से 98 फीसदी के बीच दर्ज की गई.

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रक्षा मंत्रालय का दावा है कि सैनिकों को जमीनी स्तर पर सामानों की कमी नहीं होने दी गई. हालांकि कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय की सफाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

रक्षा मंत्रालय ने साल 2015-16 से लेकर 2017-18 तक जवानों को सामानों की हुई किल्लत को लेकर पिछले साल मार्च में सफाई दी थी.

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