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ओसामा को पकड़वाने वाले जिस पाकिस्तानी को 10 करोड़ मिलने थे, वो भूखा मर रहा है!

ओसामा को पकड़वाने वाले जिस पाकिस्तानी को 10 करोड़ मिलने थे, वो भूखा मर रहा है!
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पाकिस्तान के डॉक्टर शकील अफरीदी. 2011 में अफरीदी ने आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारने में अमेरिकी सेना की मदद की थी. तब तो अफरीदी को करोड़ों रुपए इनाम मिलना तय हुआ था. लेकिन अब नौ साल बाद यही आदमी पाकिस्तान की एक जेल में कैद है, भूखे मरने की नौबत आ चुकी है. अफरीदी ने जेल में हंगर स्ट्राइक कर दी है. आमरण अनशन.

पूरी बात बताते हैं. शुरू से.

#लादेन की मौत और उसमें शकील का रोल

11 सितंबर, 2001. इस दिन अमेरिका के न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर आतंकी हमला हुआ था. कई लोग मारे गए, हज़ारों घायल हुए. हमले के बाद एक नाम सामने आया, जिसका खौफ पूरी दुनिया में फैल गया. अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन. अमेरिका के लिए ये हमला एक बड़ा झटका था. अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियां, पुलिस और सेना लादेन को ढूंढने में जुट गई. 10 साल की कोशिशों के बाद ओसामा मिला. पाकिस्तान के एबटाबाद में. पता था- बिलाल टाउन कंपाउंड, एबटाबाद, खैबर पख़्तूनख़्वा, पाकिस्तान. यहां तक पहुंचने में US की मदद की थी पाकिस्तान के डॉक्टर शकील अफरीदी ने.

CIA की शकील ने कैसे मदद की थी?

अमेरिका की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CIA) जी जान से लादेन की तलाश में जुटी थी. लादेन का सुराग पाने के लिए उसका DNA सैंपल मिलना ज़रूरी था. ताकि ये साफ हो सके कि जिस शख्स को ओसामा समझा जा रहा है, वह ओसामा ही है. ओसामा का DNA सैंपल लाना कोई छोटा काम तो था नहीं. इसलिए CIA ने एबटाबाद में फेक वैक्सिनेशन प्रोग्राम चलाया. यानी झूठा टीकाकरण अभियान. अभियान के लिए भरोसा किया गया डॉक्टर शकील अफरीदी पर. अफरीदी ने CIA को लादेन का DNA सैंपल भेज दिया. इसी के आधार पर ओसामा के एबटाबाद में होने की पुष्टि हुई और वह मारा गया.

अमेरिकी सेना ने भी स्वीकार किया था कि उन्हें अफरीदी से मदद मिली थी. खबर ये भी थी कि उन्हें अमेरिकी सेना से इनाम भी मिलने वाला था. 10 करोड़ रुपये का. लेकिन उससे पहले ही शकील पर बड़ा इल्ज़ाम लग गया.

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पाकिस्तान के खैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के एबटाबाद शहर के बिलाल टाउन इलाके में लादेन ने ठीहा जमा रखा था. बिल्कुल सीक्रेट सा. अल-कायदा की सारी ब्रेन स्टॉर्मिंग यहीं से चलती थी. (फोटो- India Today)

पाकिस्तान का गुस्सा अफरीदी पर उतरा

ओसामा की मौत के बाद पूरी दुनिया को पता चल गया कि पाकिस्तान ने ही उसे छिपाकर रखा था. पाकिस्तान के लिए ये बड़ी शर्मिंदगी थी. इस शर्मिंदगी की वजह उसने अफरीदी को माना. उन पर देश के अंदर आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे. 2011 के आखिर में उन्हें गिरफ्तार किया गया. 2012 में उन्हें सज़ा भी सुना दी गई. 33 साल की सज़ा. बाद में उनकी 10 साल की सज़ा माफ कर दी गई यानी अब वो 23 साल की सज़ा काट रहे हैं. इस वक्त वह जेल में हैं.

हंगर स्ट्राइक पर हैं अफरीदी

शकील अफरीदी के वकील कमर नदीम बताते हैं कि अफरीदी अब तक 65 बार अपनी सज़ा के खिलाफ अपील कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. जेल में भी वो लगातार खराब व्यवहार की शिकायत कर चुके हैं. इन्हीं सब बातों से परेशान होकर और अपनी बात को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाने के लिए अफरीदी ने जेल में ही हंगर स्ट्राइक शुरू कर दी है.

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