पति के साथ मिलकर 14,000 से ज्यादा लोगों को जमीन दिलवाई, अब पद्मभूषण पा रही हैं

साल 2020 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है. इस साल कुल 141 लोगों को पद्म सम्मान मिला है. इनमें सात पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और 118 पद्मश्री सम्मान शामिल हैं. इस लिस्ट में 33 महिलाएं हैं. इन्हीं महिलाओं में एक नाम हैं कृष्णम्मल जगन्नाथन. इन्हें अपने पति शंकरलिंगम जगन्नाथन के साथ पद्मभूषण मिलने की घोषणा हुई है.

कौन हैं ये?

लैंड फॉर टिलर्स फ्रीडम (LAFTI) नाम के एनजीओ की मुखिया हैं. 94 साल की हैं. इनका एनजीओ पिछड़ी जातियों की महिलाओं और उनके परिवारों के लिए काम करता है.

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कृष्णा को 2008 में राइट लाइवलीहुड अवार्ड मिला था. ये उनको दिया जाता है, जो अपने समय की बड़ी तकलीफों से जूझने और लोगों की ज़िन्दगी बेहतर बनाने की कोशिश में लगे होते हैं. ये स्वीडन का अवार्ड है. (तस्वीर: rightlivelihood.org)

कैसे पहुंचीं यहां तक?

1926 में जन्मीं. एक भूमिहीन दलित परिवार में. माली हालत ठीक नहीं थी, फिर भी घरवालों ने उन्हें ग्रेजुएशन तक पढ़ाई कराई. उसके बाद गांधीजी के सर्वोदय आन्दोलन से जुड़ गईं. वहीं अपने पति शंकरलिंगम जगन्नाथन से मिलीं. दोनों ने कसम खाई कि शादी करेंगे, तो आज़ाद भारत में. 1950 में इनकी शादी हुई. उसके बाद से ही पति-पत्नी ने मिलकर भूमिहीन किसानों को ज़मीन दिलाने का आन्दोलन शुरू किया.

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कृष्णम्मल की पुरानी तस्वीर. (तस्वीर: rightlivelihood.org)

शंकरलिंगम ने विनोबा भावे के साथ मिलकर भूदान आन्दोलन में काम किया. इसमें जमींदारों से उनकी ज़मीन का छठवां हिस्सा भूमिहीन किसानों को देने की अपील की गई थी. तब कृष्णम्मल मद्रास में अपनी टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई कर रही थीं. फिर दोनों ने ग्रामदान आन्दोलन में भी काम किया. बाद में तंजावुर (तमिलनाडु) में इन्होंने काम करना शुरू किया.

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बायीं तरफ शंकरलिंगम, दायीं तरफ कृष्णम्मल. (तस्वीर: विकिमीडिया)

किसलिए मिला सम्मान?

इनके NGO LAFTI ने भूमिहीन किसानों/मजदूरों और जमीन के मालिकों के बीच पुल का काम किया है. 14,000 से ज़्यादा भूमिहीन लोगों को उन्होंने ज़मीन दिलाने में मदद की. यही नहीं, LAFTI कुटीर उद्योग चलवाने में मदद करता है. जैसे रस्सी बांटना, लकड़ी का काम, मछलियां पकड़ना इत्यादि. पिछड़े समूहों की (खासतौर पर दलित) लड़कियों के लिए कंप्यूटर ट्रेनिंग भी करवाई जाती है.

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