तुर्की के राष्ट्रपति पाकिस्तान की संसद में कश्मीर का ज़िक्र कर फंस गए!

जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से झगड़ा चलता आ रहा है. भारत इसको अपना आंतरिक मसला बताता रहा है. और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को नकारता रहा है. अब भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्डोगन को नसीहत दी है कि वो जम्मू-कश्मीर के मसले में अपनी टांग न अड़ाएं. विदेश मंत्रालय ने 15 फरवरी को साफ-साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शनिवार को कहा,

हम तुर्की की लीडरशिप को कहना चाहते हैं कि वे हमारे अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप न करें. उन्हें पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से भारत और आसपास के इलाकों में पैदा होने वाले खतरे के बारे में समझ विकसित करने की ज़रूरत है.

विदेश मंत्रालय की तरफ से ऐसा बयान क्यों जारी किया गया है? इसकी वजह है तुर्की के राष्ट्रपति का वो भाषण, जो उन्होंने पाकिस्तान के संसद की संयुक्त बैठक में दिया था. तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन 13 फरवरी को पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे थे. रावलपिंडी के नूर खान बेस पर एर्डोगन की आगवानी के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ उनकी पूरी कैबिनेट मौजूद थी. शुक्रवार 14 फरवरी को एर्डोगन ने पाकिस्तान की संसद में एक संबोधन दिया.

इस संबोधन के दौरान उन्होंनें कश्मीर का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा,

हमारे कश्मीरी भाइयों और बहनों ने दशकों से मुश्किलें झेली हैं और हालिया समय में लिए गए एकतरफा फैसलों से स्थिति और खतरनाक हुई है. आज, कश्मीर का मुद्दा हमारे लिए उतना ही ज़रूरी है जितना कि आप पाकिस्तानियों के लिए. न्याय और निष्पक्षता के आधार पर निकला हल सभी पक्षों के हितों को पूरा करेगा. कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए न्याय, शांति और बातचीत के प्रयास के साथ तुर्की हमेशा खड़ा रहेगा.

ये पहली बार नहीं है जब तुर्की ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर अपनी राय रखी हो. पिछले साल सितंबर में एर्डोगन ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया था. तब भारत ने इसकी निंदा की थी और कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है.

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