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मेडिकल टेस्ट के नाम पर महिला कर्मचारियों के साथ बेहद शर्मनाक हरकत हुई है

सूरत म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (SMC). यहां 10 महिला ट्रेनी कर्मचारियों के एक ग्रुप को बिना कपड़ों के खड़ा कर दिया गया. एक कमरे में. मेडिकल टेस्ट के लिए. इस मेडिकल टेस्ट में ट्रेनी कर्मचारियों का फिंगर टेस्ट भी किया गया. इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है. साथ ही सूरत म्यूनिसिपल कमिश्नर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

# पूरा मामला क्या है?

मामला 20 फरवरी का है. SMC द्वारा संचालित सूरत म्यूनिसिपल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड रिसर्च (SMIMER) में ये घटना हुई. यहां के नियम के मुताबिक, तीन साल की ट्रेनिंग के बाद कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट करवाया जाता है. शिकायत में SMC यूनियन ने आरोप लगाया कि महिला डॉक्टर्स ने अनमैरिड लड़कियों का भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किया. उनसे कई पर्सनल सवाल भी किए हैं. यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों की जांच करना गलत नहीं है लेकिन उनके साथ जो हरकत की गई, वो सही नहीं है. यूनियन ने शिकायत में कहा कि एक-एक महिला का टेस्ट करने के बजाए एक साथ 10 महिलाओं को बिना कपड़ों के एक साथ खड़ा कर दिया गया. ये निंदनीय है.

अस्पताल के गॉयनोकोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट की प्रमुख अश्विनी वछानी ने बताया कि गाइडलाइन्स के मुताबिक, महिलाओं का फिज़िकल टेस्ट जरूरी होता है. लेकिन अश्विनी वछानी को ये मालूम नहीं कि ये टेस्ट पुरुषों के लिए भी होता है या नहीं.

सूरत म्यूनिसिपल कमिश्नर बंचानिधि पाणि ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई है. इस टीम में कॉलेज की पूर्व डीन डॉ. कल्पना देसाई, सहायक नगरपालिका कमिश्नर गायत्री जरीवाला और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर तृप्ति कलाथिया शामिल हैं. इन्हें 15 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का कहा गया है.

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