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Uttar Pradesh
Monday, September 20, 2021

क्या लोगों को चुप कराने के लिए पेगासस स्पाइवेयर से हो रही थी जासूसी!!

भारत

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Rajan Chaudhary
Rajan Chaudhary is a freelance journalist from India. Rajan Chaudhary, who hails from Basti district of Uttar Pradesh’s largest populous state, and writes for various media organizations, mainly compiles news on various issues including youth, employment, women, health, society, environment, technology. Rajan Chaudhary is also the founder of Basti Khabar Private Limited Media Group.
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भारत की शीर्ष डिजिटल मीडिया समाचार कंपनी द वायर पेगासस और कैंडिरू की जासूसी का पर्दाफाश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जासूसी चार महाद्वीपों के 20 देशों में हुई है। भारत भी इस मामले में अहम लक्ष्य रहा और 1488 से अधिक लोगों पर पेगासस का इस्तेमाल उन्हेंं ट्रैक करने, उन्हेंं चुप कराने और मौजूदा शासन के खिलाफ किसी भी तरह के असंतोष को रोकने के लिए किया गया। मध्य एशिया में दो पेपर के साथ-साथ द वायर इसे भारत में, वाशिंगटन पोस्ट अमेरिका में और द गार्जियन यूके में प्रिंट कर रहा है। 

भारत में और खासकर गुजरात में जासूसी करना कोई नई बात नहीं है। 2007 में गुजरात में फोन सर्विलांस की शिकायतें मिली थीं। अब, शासन या अपने लोगों को पसंद नहीं करने वालों की जासूसी करने के लिए 20 देशों में इस इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर के बेचे जाने का खुलासा हुआ है।

कई राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों, असंतुष्टों, पत्रकारों और वकीलों समेत आरएसएस नेताओं सहित कई अन्य लोगों की कथित तौर पर उनके फोन के जरिये जासूसी की जा रही थी।

यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस सूची में गुजरात के या गुजरात से संबंध रखने वाले कम से कम चार लोग शामिल हैं। कुछ सूत्रों से पता चला है कि लगभग 28 नाम दिए गए हैं जिनमें दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, तीन उद्योगपतियों, 8 आरएसएस कार्यकर्ताओं, कम से कम तीन कैबिनेट मंत्रियों, शीर्ष सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों, पत्रकारों, वकीलों और दलित कार्यकर्ताओं के नंबर शामिल हैं।

बहरहाल, संसद का मॉनसून सत्र सोमवार सुबह से शुरू हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सुबह 11 बजे से पहले कम से कम पांच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक सरकार की पोल खोलने वाले इस बड़े घोटाले को प्रकाशित करेंगे।

हालांकि कहानी की सूची इससे आगे भी है। कहानी नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा संसद में किए गए उस दावे के बारे में है कि “भारत में कोई अनधिकृत स्पाइवेयर खरीदा या इस्तेमाल नहीं किया गया है।” कहानी में मोड़ यह है कि 28 नवंबर, 2019 को जब जासूसी के लिए पेगासस का मसला संसद में उठाया गया था, तब उस समय के सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्थापित प्रक्रिया के उल्लंघन पर स्पष्ट रूप से कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। साथ ही कहा था कि ‘मेरी जानकारी के हिसाब से इसके लिए कोई अवैध निर्देश जारी नहीं किए गए।’

लेकिन अब जब पेगासस ने पुष्टि कर दी है कि भारत उसके ग्राहकों में से एक रहा है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 1488 से अधिक ऐसे लोगों की सूची जारी करने वाला है, जिनके फोन की निगरानी की गई है, तो प्रश्न तो उठेंगे ही।

1. पेगासस को खरीदने का फैसला किसने और क्यों किया?

2. इसके लिए किसने भुगतान किया।

3. भुगतान को अधिकृत किसने किया।

पारंपरिक गणना के हिसाब से 1500 लोगों की जासूसी करने के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर की कीमत 700 से 810 करोड़ रुपये के बीच होगी। इसमें अगर कोई दलाली होगी, तो उसे घटा दिया जाएगा।

ऐसे में आरोप-प्रत्यारोपों की जमकर आतिशबाजी होगी। उम्मीद के मुताबिक भाजपा ने आज से ही अपने ऊपर आरोप लगने से पहले ही अपना बचाव शुरू कर दिया है।

Pegasus कैसे फ़ोन में घुसपैठ करता है और यह क्या कर सकता है

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