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क्या है 'नो फ्लाय लिस्ट' जिसकी वजह से कुनाल कामरा प्लेन में उड़ने से बैन हुए?

इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइस जेट और गो एयर ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुनाल कामरा पर प्रतिबंध लगा दिया है. पत्रकार अर्णब गोस्वामी को कथित तौर पर परेशान करने के लिए इंडिगो ने कुनाल कामरा पर 6 महीने का बैन लगाया है. एयर इंडिया ने कहा है कि अगली सूचना तक वो ‘No Fly’ लिस्ट में रहेंगे.

उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत की अन्य एयरलाइंस को ‘सलाह’ दी है. कुनाल कामरा पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की ‘सलाह’. उन्होंने कहा कि ऐसा आपत्तिजनक व्यवहार जो उकसावे वाला हो और विमान के अंदर अराजकता पैदा करता हो, पूरी तरह से अस्वीकार्य है. हरदीप सिंह पुरी का यह भी कहना था कि ऐसा बर्ताव हवाई यात्रा करने वाले लोगों के जीवन को खतरे में डालता है.

# बैन करने के नियम क्या हैं?

एयर इंडिया ने बैन लगाने के आदेश में ‘No Fly List’ का ज़िक्र किया है. आइए समझते हैं ये कौन सी लिस्ट है. क्यों है? और इस लिस्ट से एयरलाइन में यात्री के बैन होने का संबंध क्या है. क्योंकि यही वो लिस्ट है जो आपको आगे का सारा गुणा गणित समझा देगी.

# क्यों ज़रुरत पड़ी

मार्च 2017 में एक वाकया हुआ. एक सरकारी कर्मचारी ने फ्लाइट अटेंडेंट को चप्पलों से मारा. क्योंकि कर्मचारी को बिज़नस क्लास की सीट चाहिए थी. जबकि पूरा हवाई जहाज़ इकॉनमी क्लास की सीटों वाला था. इसी साल शिवसेना सांसद रविन्द्र गायकवाड़ ने भी एयर इंडिया के क्रू मेंबर से दुर्व्यवहार किया. मीडिया में ख़ूब बात हुई. आपत्ति जनक व्यवहार पर पक्ष विपक्ष बने. और फिर सरकार हवाई यात्रियों के लिए गाइडलाइन्स में एक नया शब्द लाई. no-fly list. वजह थी आपत्तिजनक व्यवहार. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने Civil Aviation Requirement(CAR) में बदलाव किए. और यहीं से नया शब्द आया no-fly list.

Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने आपत्तिजनक व्यवहार को अपराध माना.

# क्या नियम हैं

किसी भी यात्री के आपत्तिजनक व्यवहार पर फ्लाइट के pilot-in-command को नोटिस लेना होता है. इसके बाद एयरलाइन की एक अंतरिम कमेटी बनती है. 30 दिन के भीतर कमेटी को शिकायत का निपटारा करना होता है. अगर बैन लगाना है तो वो कितने दिन का होगा ये भी इसी दौरान तय करना होता है.

इस नियम के तहत आपत्तिजनक व्यवहार के तीन लेवल होते हैं-

# लेवल 1 में उस शिकायत को रखा जाता है जिसमें बातों से आपत्तिजनक व्यवहार किया गया हो. इस लेवल में बैन करने की समय सीमा होती है तीन महीने.

# लेवल 2 में आपत्तिजनक व्यवहार होता है शारीरिक. और इस लेवल में यात्री को 6 महीने के लिए बैन किया जा सकता है.

# लेवल 3 में उस व्यवहार को गिना जाता है जिसमें यात्री के व्यवहार से किसी की जान को ख़तरा पैदा हो गया हो. इस लेवल में अगर यात्री बैन होता है तो कम से कम 2 साल के लिए बैन होगा.

# यात्री अधिकार भी हैं?

No Fly List में लिस्टेड होने के बाद यात्री इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील कर सकता है. जिस तारीख़ को ऑर्डर आया है उससे 60 दिन के भीतर यात्री अंतरिम कमेटी में अपील दायर कर सकता है. उसकी अपील पर सुनवाई के बाद फ़ैसले पर पुनर्विचार भी किया जा सकता है.

# कौन होता है कमेटी में

जो अंतरिम कमेटी यात्री को No Fly List में लिस्टेड करती है उस कमेटी के लिए भी नियम हैं. कमेटी का चेयरमैन सिर्फ़ रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट या सेशन जज ही हो सकता है. जिस एयरलाइन की अंतरिम कमेटी है उसे छोड़कर किसी भी दूसरी एयरलाइन का एक प्रतिनिधि होना चाहिए कमेटी में. पैसेंजर एसोसिएशन और कंज्यूमर एसोसिएशन से प्रतिनिधि भी होने चाहिए कमेटी में. और Consumer Dispute Redressal Forum का एक रिटायर्ड अधिकारी होना चाहिए.

# किसने फीता काटा था इस नियम का

इस नियम का फीता काटा था एक यात्री बिरजू किशोर ने. यानी यही हुए थे सबसे पहले बैन. नवंबर 2017 में. जेट एयरवेज़ की फ्लाईट 339 से यात्रा करते हुए इस यात्री ने सबकी जान सांसत में डाल दी. मुंबई से दिल्ली जाने वाली इस फ्लाईट में अचानक एक चिट्ठी मिली. उसमें लिखा था कि इस जहाज़ में 12 हाइजैकर चढ़े हुए हैं. और उनके पास पर्याप्त मात्रा में बम बारूद है. ये नोट मिलने के बाद हवाई जहाज़ की अहमदाबाद में इमर्जेंसी लैंडिंग कराई गई. बम डिस्पोज़ल दस्ता बुलाया गया. बाद में बिरजू किशोर नाम के इस यात्री को लेवल 3 की No Fly list में डाला गया. 5 साल का बैन लगा. मुंबई पुलिस ने इस यात्री पर एंटी हाईजैकिंग एक्ट के तहत मुक़दमा किया. बाद में इस यात्री ने बताया कि उसकी मंशा जेट एयरवेज़ का दिल्ली दफ़्तर बंद कराने की थी. बिरजू को लगा था कि दिल्ली दफ़्तर बंद होने के बाद उसकी गर्लफ्रेंड जो एयरलाइन के उसी दिल्ली दफ़्तर में काम करती थी वो मुंबई वापस आ जाएगी.

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